IMPS से राशि ट्रांसफर की सीमा बढ़कर पांच लाख

IMPS से राशि ट्रांसफर की सीमा बढ़कर पांच लाख

अब ऑफलाइन भी होगा भुगतान

मुंबई।  रिजर्व बैंक (आरबीआई) डिजिटल लेनदेन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाते हुए तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) के माध्यम से प्रतिदिन राशि ट्रांसफर करने की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने तथा अब इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं रहने (ऑफलाइन) पर भी भुगतान किये जाने की सुविधा शुरू करने की तैयारी कर रहा है।


आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास ने उनकी अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की समाप्त तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद बताया कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की आईएमपीएस एक महत्वपूर्ण भुगतान प्रणाली है जो 24 घंटे सातो दिन घरेलू स्तर पर इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग ऐप, बैंक शाखाओं, एटीएम, एसएमएस और आईवीआरएस जैसे विभिन्न चैनलों के माध्यम से राशि हस्तांतरण सुविधा प्रदान करती है। आईएमपीएस में प्रति लेन-देन की सीमा, जनवरी 2014 से प्रभावी, वर्तमान में एसएमएस और आईवीआरएस के अलावा अन्य चैनलों के लिए दो लाख रुपये तक सीमित है। एसएमएस और आईवीआरएस चैनलों के लिए प्रति लेनदेन की सीमा 5000 रुपये है।


उन्होंने बताया कि आरटीजीएस (वास्तविक समय में सकल निपटान सेवा) के अब चौबीसों घंटे कार्यरत रहने के साथ आईएमपीएस के माध्यम से निपटान में समान वृद्धि हुई है, जिससे ऋण और निपटान का जोखिम कम हो गया है। घरेलू स्तर पर भुगतान एवं लेनदेन में आईएमपीएस प्रणाली के महत्व को देखते हुए एसएमएस और आईवीआरएस के अलावा अन्य चैनलों के लिए प्रति लेनदेन की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख करने का प्रस्ताव है। इससे डिजिटल भुगतान में और वृद्धि होगी और ग्राहकों को दो लाख रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान के लिए अतिरिक्त सुविधा प्रदान की जाएगी। इस संबंध में आवश्यक निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

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दास ने बताया कि 06 अगस्त 2020 की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में नई प्रौद्योगिकी के पायलट परीक्षण करने के लिए एक योजना की घोषणा की गई थी। यह प्रौद्योगिकी इंटरनेट कनेक्टिविटी की गति धीमी होने या उपलब्ध नहीं होने (ऑफलाइन मोड) की स्थिति में भी खुदरा डिजिटल भुगतान को संभव बनाता है। सितंबर 2020 से जून 2021 के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में इस योजना के तहत सफलतापूर्वक तीन पायलट परीक्षण किये गये।


उन्होंने बताया कि इस परीक्षण के दौरान 1.16 करोड़ रुपये मूल्य के 2.41 लाख लेनदेन किये गये। इस परियोजना से प्राप्त अनुभव ने स्पष्ट किया कि खासकर दूरदराज के इलाकों में इस तरह के समाधान पेश करने की गुंजाइश है। इस परीक्षण से प्राप्त अनुभव और उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए देश भर में ऑफलाइन मोड में खुदरा डिजिटल भुगतान करने के लिए एक रूपरेखा पेश करने का प्रस्ताव है। विस्तृत दिशा-निर्देश यथासमय जारी किए जाएंगे।

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