शुरुआती स्टेज में पैन्क्रियाटिक कैंसर का सफल इलाज संभव

पैन्क्रियाटिक कैंसर के 80 प्रतिशत मरीज अंतिम चरण में हमारे पास आते हैं: डॉ संदीप जैन

शुरुआती स्टेज में पैन्क्रियाटिक कैंसर का सफल इलाज संभव

पैन्क्रियाटिक कैंसर के सफल इलाज में अब तेजी से संभावनाएं बढ़ी हैं। बशर्त यह है कि पैन्क्रियाटिक कैंसर से पीडि़त मरीज शुरुआती स्टेज में ही डॉक्टर से कंसल्ट करे और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखने पर ही डॉक्टर से सलाह लेकर जल्द से जल्द इलाज लेना शुरु करे।

पैन्क्रियाटिक कैंसर के सफल इलाज में अब तेजी से संभावनाएं बढ़ी हैं। बशर्त यह है कि पैन्क्रियाटिक कैंसर से पीडि़त मरीज शुरुआती स्टेज में ही डॉक्टर से कंसल्ट करे और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखने पर ही डॉक्टर से सलाह लेकर जल्द से जल्द इलाज लेना शुरु करे। यह कहना है डॉ संदीप जैन का जो शहर के एक निजी अस्पताल में डायरेक्टर एवं हेड, डिपार्टमेंट ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी, हेपेटो-पैन्क्रियेटो-बाईलियरी, बेरियाट्रिक एवं मिनिमल एक्सेस सर्जरी स्पेशलिस्ट हैं। संदीप जैन ने आगे बताते हैं कि कैंसर के इलाज में अब नई तकनीकों द्वारा इलाज संभव हुआ है इसमें मल्टी-मोडलिटी बेहतरीन तकनीक है जिस वजह से मरीजों के बचाए जाने की दर में भी सुधार हुआ है। डॉ. जैन ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि कैंसर चाहे जैसा भी हो, पर यह एक जानलेवा बीमारी है। कैंसर पीडि़त मरीज के बचने की संभावना कितनी है, यह इससे तय होता है कि कैंसर कितनी तेजी से फैलता है और डायग्र्नोिस्टक के वक्त  कैंसर किस स्टेज में है। कैंसर के चार स्टेज होते हैं। जितना जल्दी कैंसर के बारे में पता चलता है उतनी जल्दी इसका इलाज शुरू हो जाता है, जिससे मरीज की जिंदगी बचाये जाने की संभावना बढ़ जाती है।

तेजी से फैलने वाला कैंसर है पैन्क्रियाटिक

डॉ संदीप जैन ने बताते हैं कि पैन्क्रियाटिक कैंसर तेजी से फैलने वाला कैंसर है, और ज्यादातर मामलों में, सर्जरी के साथ मल्टी-मोडलिटी इलाज, रेडियोथेरेपी के साथ या रेडियोथेरेपी के बिना कीमोथेरेपी ऐसे मरीजों को जीवित रखने की अवधि को बढ़ाने का एकमात्र तरीका है। उन्होंने बताया कि उनके पास आने वाले 80 प्रतिशत मरीज पैन्क्रियाटिक कैंसर के अंतिम चरण में होते हैं, क्योंकि ज्यादातर मामलों में मरीजों में लक्षण बीमारी बढऩे के बहुत बाद सामने आते हैं।

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बदलता लाइफस्टाल बढ़ाता है यह बीमारी

असंतुलित और बदलता लाइफस्टाइल पैन्क्रियाटिक कैंसर का बहुत बड़ा कारण है। इस बारे में जागरुक बढ़ाने की बहुत सख्त जरुरत है। स्मोकिंग और एल्कोहल  का अत्याधिक सेवन के कारण बढ़ता मोटापा भी इस बीमारी का एक मुख्य कारण है जिसके बारे में लोगों का जागरुक होना बहुत जरूरी है।


कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी की एडवांस तकनीक से इलाज संभव

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डॉ. जैन ने बताया कि हमारे देश में कैंसर के इलाज में काफी प्रगति हुई है। डॉ. जैन ने एक तो डायग्नोस्टिक में तरक्की हुई है और इस बीमारी के शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है। दूसरी प्रगति इलाज की प्रक्रिया में हुई है। अब हमारे पास कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के नए तरीके हैं, जिनसे हम उनके आकार को कम कर सर्जरी द्वारा इलाज योग्य बना सकते हैं और ऑपरेशन के बाद उन्हें दोबारा बढऩे से रोक सकते हैं। सर्जिकल तकनीकों में काफी सुधार हुआ है और पोस्ट ऑपरेटिव जटिलताओं एवं मृत्यु दर (विशेषज्ञ केंद्रों में 3 प्रतिशत से कम) में कमी आई है। दूसरी प्रगति लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया में हुई है, जो अब पैन्क्रियाटिक कैंसर के ज्यादातर मामलों में की जा सकती हैं।

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