महाराजा कॉलेज की जमीन अधिग्रहण के खिलाफ तेज हुए विरोधी सुर, सिंडीकेट बैठक में भी हुई चर्चा

महाराजा कॉलेज से जमीन के अधिग्रहण को लेकर विश्वविद्यालय की सिंडीकेट बैठक आयोजित

महाराजा कॉलेज की जमीन अधिग्रहण के खिलाफ तेज हुए विरोधी सुर, सिंडीकेट बैठक में भी हुई चर्चा

राजधानी जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज (महाविद्यालय) में भारत का सबसे बड़ा आईपीडी टावर बनाया जा रहा है। जिसके लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में चलाए गए इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान सरकार की जमकर तारीफ भी हो रही है।

जयपुर।  राजधानी  जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज (महाविद्यालय) में भारत का सबसे बड़ा आईपीडी टावर बनाया जा रहा है। जिसके लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में चलाए गए इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान सरकार की जमकर तारीफ भी हो रही है। लेकिन आईपीडी टावर के लिए राजस्थान के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेजों में से एक महाराजा कॉलेज की 10750 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, जिसके खिलाफ विरोध के सुर तेज होते जा रहे हैं। यह जमीन एसएमएस मेडिकल कॉलेज में बन रहे आईपीडी टॉवर के लिए ली जा रही है। जिसको लेकर सरकार का चौतरफा विरोध हो रहा है। महाराजा कॉलेज से जमीन के अधिग्रहण को लेकर विश्वविद्यालय की सिंडीकेट बैठक में भी चर्चा हुई। जिसमें सभी सदस्यों ने जमीन अधिग्रहण का विरोध किया है। साथ ही विश्व विद्यालय से जुड़े शिक्षण संगठन और अ शैक्षणिक कर्मचारी संघ ने भी फैसले पर विरोध जताया है।

आईपीडी टावर के लिए 132 केवी का ग्रिड बनाना भी प्रस्तावित

दरअसल आईपीडी टावर के सामने की सड़क को चौड़ा किया जायेगा। इसके अलावा आईपीडी टावर के लिए 132 केवी का ग्रिड बनाना भी प्रस्तावित है। जिसके लिए महाराजा कॉलेज की जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा। और सरकार के इसी फैसले को लेकर अब एबीवीपी, एनएसयूआई, एलुमिनाई और वर्तमान छात्र आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

भारत के सबसे पुराने महाविद्यालयों में से एक, 1844 में हुई स्थापना

महाराजा महाविद्यालय भारत के सबसे पुराने महाविद्यालयों में से एक है। इसकी स्थापना 1844 में की गई थी। वर्तमान में यह विज्ञान संकाय में उच्‍च स्‍तर की शिक्षा के लिए राजस्‍थान का सबसे अग्रणी महाविद्यालय है। इसी कॉलेज के कैंपस में 70 सालों से गोखले हॉस्टल भी संचालित है। जिसमें करीबन 300 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई करते हैं। महाराजा कॉलेज के पास में ही एसएमएस मेडिकल कॉलेज संचालित है। जिसमें देश का सबसे बड़ा आईपीडी टावर बनाया जा रहा है। टावर के लिए 132 केवी जीएसएस का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा आईपीडी टावर के सामने वाली सड़क को चौड़ा किया जायेगा। इसके लिए महाराजा कॉलेज के गोखले हॉस्टल की 10750 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा। प्रस्तावित अधिग्रहण की वजह से गोखले हॉस्टल में बने कर्मचारीयों के 17 क्वार्टर्स, हॉस्टल का मेस, एल्यूमिनाई का ऑफिस और कैंपस में लगे सैंकड़ों पैड खत्म किए जायेंगे। इसी को लेकर एबीवीपी, एनएसयूआई और वर्तमान से लेकर पूर्व छात्र, इस अधिग्रहण के खिलाफ खड़े हो गए है।

तोड़ी गई चीजों के निर्माण के बाद ही होगा अधिग्रहण: धारीवाल

महाराजा महाविद्यालय की 10750 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण के बढ़ते विरोध के बीच मंत्री शांति धारीवाल और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आईपीडी टॉवर के लिए ली जा रही जमीन की वजह से महाराजा कॉलेज की जो भी चीजें तोड़ी जाएंगी। पहले उनका कहीं ओर जगह पर निर्माण किया जाएगा और उसके बाद ही कॉलेज में से जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।

महाराजा कॉलेज सिर्फ़ एक बिल्डिंग नहीं बल्कि एक बॉन्डिंग है: वार्डन 

जमीन अधिग्रहण को लेकर महाराजा कॉलेज के वार्डन से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दुख जताया। उन्होंने कहा कि महाराजा महाविद्यालय जिससे पढ़कर कोई राजनिति के शिखर पर पहुंचा तो कोई दुनिया का सबसे अच्छा डॉक्टर बना। ऐसे में यहां पढ़ रहे विद्यार्थी हो या फिर यहां से पढ़कर निकले विद्यार्थी हो, उनके लिए महाराजा कॉलेज सिर्फ़ एक बिल्डिंग नहीं बल्कि एक बॉन्डिंग है। ऐसे में अब इसी बॉन्डिंग को बनाए रखने के लिए प्रदेश से लेकर विदेश तक महाराजा कॉलेज से की जा रही जमीन के अधिग्रहण की आवाज उठ रही है।

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