जल जीवन मिशन में गिरी रैंकिंग, 31वें स्थान पर प्रदेश

अभी तक केवल 46.40 फीसदी ही काम हुआ है

जल जीवन मिशन में गिरी रैंकिंग, 31वें स्थान पर प्रदेश

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से अपडेट हो रही राज्यों की रिपोर्ट के अनुसार गोवा, तेलंगाना, पुड्‌डुचेरी आदि है, जिनमें 100 प्रतिशत घरों को नल से पानी देने के लिए कनेक्शन मुहैया करवाए गए है, जबकि हरियाणा, बिहार, गुजरात और पंजाब आदि राज्यों ने भी 70 से 99 प्रतिशत तक प्रगति प्राप्त की है, लेकिन राजस्थान में 26.40 प्रतिशत ही काम हुआ है।

जयपुर। जल जीवन मिशन के तहत हर घर को नल से पानी मुहैया करवाने की क्रियान्विति में एक बार फिर से राजस्थान की रैंकिंग अन्य प्रदेशों की तुलना में नीचे आ गई है। यूपी, हरियाणा और बिहार की अच्छी रैकिंग है, लेकिन राजस्थान में अभी तक केवल 46.40 फीसदी ही काम हुआ है। यानी राज्य का 31वां स्थान है। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से अपडेट हो रही राज्यों की रिपोर्ट के अनुसार गोवा, तेलंगाना, पुड्‌डुचेरी आदि है, जिनमें 100 प्रतिशत घरों को नल से पानी देने के लिए कनेक्शन मुहैया करवाए गए है, जबकि हरियाणा, बिहार, गुजरात और पंजाब आदि राज्यों ने भी 70 से 99 प्रतिशत तक प्रगति प्राप्त की है, लेकिन राजस्थान में 26.40 प्रतिशत ही काम हुआ है। 1,05,68,775 को कनेक्शन देने के लक्ष्य के मुताबिक अब तक केवल 27,89,685 नल कनेक्शन हुए है।

राजस्थान का दूसरे राज्यों की तुलना में यह तर्क
मिशन की शुरुआत के समय राजस्थान में मात्र 11 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास ही जल कनेक्शन थे। उस समय गुजरात में 71 प्रतिशत, गोवा में 75 प्रतिशत, पुद्दुचेरी में 81, हरियाणा में 57, पंजाब में 49, हिमाचल में 44, अंडमान-निकोबार में 46 और महाराष्ट्र में करीब 34 फीसदी घरों में नल कनेक्शन पहले से ही उपलब्ध थे, जो राजस्थान के 11 प्रतिशत कनेक्शनों के मुकाबले काफी अधिक थे। इस वित्तीय वर्ष में अभी तक तीन लाख से अधिक जल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। केंद्र सरकार ने मिशन की गाइडलाइन दिसम्बर 2019 में जारी की थी। उससे पहले तक प्रदेश में हर घर जल कनेक्शन वाले परिवारों की संख्या 11 लाख 74 हजार 131 थी।

जेजेएम के तहत प्रदेश में काफी गति से काम हो रहा है। केन्द्र से भी पूरा सहयोग मिल रहा है। अन्य राज्यों की तुलना में मिशन अवधि के दौरान काफी काम हुआ है। योजनाओं की स्वीकृति और उनकी क्रियान्विति के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

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- डॉ. सुबोध अग्रवाल, एसीएस पीएचईडी

राजस्थान में पानी की उपलब्धता कम होने, सतही जल स्रोतों की दूरी अधिक होने और आबादी बिखरी होने के कारण न सिर्फ  योजनाओं की लागत काफी अधिक आती है, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में भी अधिक समय लगता है। इन सभी परिस्थितियों के बाद भी राजस्थान मिशन की शुरुआत से अभी तक 16 लाख से अधिक नए कनेक्शन दे चुका है।।
- डॉ. महेश जोशी, जलदाय मंत्री 

 

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