बाढ़ ने बिगाड़ी रिवर फ्रंट के निचले हिस्से की दशा : अधिकतर पत्थर व छतरियां उखड़े और चंबल में बहे

उखड़े पत्थर बयां कर रहे रिवर फ्रंट की दुर्दशा

बाढ़ ने बिगाड़ी रिवर फ्रंट के निचले हिस्से की दशा : अधिकतर पत्थर व छतरियां उखड़े और चंबल में बहे

नगर विकास न्यास द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से बनाए जा रहे चम्बल रिवर फ्रंट के निचले हिस्से के उखड़े पत्थर उसकी दांस्तां बयां कर रहे हैं। घाटों से नीचे जाने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के अधिकतर पत्थर उखड़ चुके हैं। साथ ही कई छतरियां पानी में बह गई। जिन्हें बनाने में फिर से मशक्कत करनी पड़ेगी।

कोटा। नगर विकास न्यास द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से बनाए जा रहे चम्बल रिवर फ्रंट के निचले हिस्से के उखड़े पत्थर उसकी दांस्तां बयां कर रहे हैं। घाटों से नीचे जाने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के  अधिकतर पत्थर उखड़ चुके हैं। साथ ही कई छतरियां पानी में बह गई। जिन्हें बनाने में फिर से मशक्कत करनी पड़ेगी। अगस्त के अंतिम सप्ताह में कोटा बैराज से छोड़े गए लाखों लीटर पानी का दबाव जैसे ही रिवर फ्रंट के निचले हिस्से में बनाई गई सीढ़ियों पर पड़ा वैसे ही उसने यहां हो रहे काम की पोल तो खोली ही। साथ ही इंजीनियरों व श्रमिकों के काम पर भी पानी फेर दिया। पिछले करीब दो साल से यहां सैकड़ों श्रमिक व इंजीनियर दिन रात काम कर रहे हैं। बड़ी-बड़ी और भारी भरकम मशीनें लगी हुई हैं। करीेब 250 मीटर ऊंचाई तक रिवर फ्रंट को पहुंचाने में जो मेहनत लगी उस मेहनत पर कोटा बैराज के पानी से आई बाढ़ ने दशा ही बिगाड़ दी। हालत यह है कि कोटा  बैराज के 16 गेट खोलकर सवा पांच लाख क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया। यदि वर्ष 2019 की तरह सभी 19 गेट खोलकर 7 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जाता तो उस समय 250 मीटर ऊंचाई तक पानी पहुंचने से इससे भी बुरी दशा देखने को मिलती। कोटा बैराज से लेकर नयापुरा स्थित रियासतकालीन पुलिया तक निचले हिस्से की न केवल सीढ़ियों के ही बड़े-बड़े पत्थरों को उखाड़ कर फेक दिया। वरन् कारीगरों की मेहनत से तैयार कर रिवर फ्रंट का सौन्दर्य बढ़ाने के लिए लगाई गई कई छतरियां तक नदी के पानी में बह गई। 

पानी के तेज बहाव व थपेड़ों के कारण उखड़े भारी भरकम पत्थरों में से अधिकतर तो बिखरकर वहीं पड़े हुए हैं। जबकि कई पत्थर नदी में पानी के  साथ बह गए। वहीं कई जगह की छतरियां भी पानी में बह गई। यह स्थिति किसी एक जगह विशेष की नहीं है। चम्बल माता की मूृर्ति के पास का हिस्सा हो या शिवदास घाट के पास का । नयापुरा स्थित रियासतकालीन पुलिया के पास का हिस्सा हो या मध्य में बनी दुकानों के पास का हिस्सा। हर जगह की दुर्दशा आंसू बहा रही है। रिवर फ्रंट के दोनों तरफ अधिकतर हिस्से की है। नदी के इस पार और नदी के उस पार कुन्हाड़ी साइड पर दोनों तरफ की हालत इतनी अधिक खराब हो गई कि उसे देखकर लगता है हर साल बरसात के मौसम में  कोटा बैराज के अधिक गेट खुलने व बाढ़ आने पर इसीे तरह के दृश्य देखने को मिलेंगे। एक तरफ बाढ़ से रिवर फ्रंट की दुर्दशा दिखाई दे रही है। वहीं दूसरी तरफ न्यास अधिकारी व आर्किटेक्ट का कहना है कि बाढ़ से रिवर फ्रंट को कोई नुकसान नही हुआ है। वह पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि न्यास के कुछ अधिकािरयों का कहना है कि अभी काम चल रहा है । निचले हिस्से में जो नुकसान हुआ है वह संवेदक पूरा करेगा।   वहीं संवेदक फर्म के कर्मचारियों का कहना है कि नयापुरा पुलिया की तरफ से रिवर फ्रंट के काम के लिए कंटेनर में बनाया गया आॅफिस व कई मशीनरी तक बाढ़ के पानी में बहने से लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। 

क्रेनों से पत्थर सेट करने में लगे महीनों
रिवर फ्रंट पर काम कर रहे श्रमिकों व कारीगरों  का कहना है कि बाढ़ का पानी तेज बहाव से आने पर उसक टक्कर से नदी किनारे के निचले हिस्से के पत्थर उखड़कर बिखर गए। जबकि काफी पत्थर पानीे में बह गए। उनका कहना है कि ये पत्थर काफी बड़े और भारी हैं। उन्हें क्रेनों की सहायता से सैट किया गया था। जिसमें काफी समय लगा था। बाढ़ में बहने से अब फिर से दोबारा पत्थरों को सैट करना भारी काम है। 

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800 करोड़ से हो रहा काम
चम्बल रिवर फ्रंट पर कोटा बैराज से नयापुरा सिथत रियासतकालीन पुलिया तक 6 किलों के क्षेत्र में काम  किया जा रहा है। फस्ट फेज के इस काम पर करीब 800 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसका काम पूरा होने के बाद करीब एक हजार करोड़ रुपए से 13 किलों में सैकंड फेज का काम किया जाएगा। 

दिसम्बर तक काम पूरा होना मुश्किल
नगर विकास न्यास के अधिकारियों व आर्किटेक्ट द्वारा रिवर फ्रंट के फस्ट फेज के काम को दिसम्बर तक पूरा होने की संभावना तो जता जा रही है। लेकिन वर्तमान में रिवर फ्रंट पर जिस तरह की हालत है उसे देखकर लगता नहीं कि यह काम दिसम्बर तक पूरा हो पाएगा। 

पूरे ऊंट लगे ना मूर्तियां
चम्बल रिवर फ्रंट के सिंह घाट पर जहां शेरों को स्थापित किया गया है। वहीं आमने-सामने 6 ऊंट लगाए जाने हैं। जिनमें से अभी तक मात्र एक ही ऊंट लगा है। वहीं म्यूजिकल घाट और साहित्य घाट पर मूर्तियां लगाई जानी हैं। ये मूर्तियां आए हुए 6 माह से अधिक का समय हो गया है। लेकिन बरसात व बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अभी तक भी उन्हें नहीं लगाया गया है। 

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जवाब देने से बचते रहे न्यास सचिव
बाढ़ के कारण रिवर फ्रंट के निचलते हिस्से को हुए नुकसान के बारे में जानने के लिए जब नगर विकास न्यास के सचिव राजेश जोशी को फोन किया तो उनहोंने फोन रिसीव नहीं किया। वाट्सअप मैसेज किया तो उस पर भी वे जवाब देने से बचते रहे। 

जनता के धन की बर्बादी
चम्बल रिवर फ्रंट बनाया तो जा रहा है। लेकिन उसका लाभ कोटा वासियों को नहीं होगा। विदेशी पर्यटक आएंगे। जिससे इसके ठेकेदारों व व्यापारियों को लाभ होगा। रिवर फ्रंट में न तो ठेकेदार और न ही श्रमिक व कारीगर कोटा के हैं। पत्थर से लेकर सभी काम बाहर से हो रहा है। मूर्तियां तक जयपुर से बनकर आ रही हैं। बाढ़ में हुए नुकसान को देखकर लगता है कि नगर विकास न्यास द्वारा जनता के करोड़ों रुपए की बर्बादीे की जा रही है। 
- मनीष सक्सेना, नयापुरा

अभी यह हालत तो बाद में क्या होगी
रिवर फ्रंट का काम अभी तो चल ही रहा है। बैराज के पूरे गेट भी नहीं खुले हैं। उस समय में हीे यह स्थिति है तो आने वाले वर्षों में जब पानी अधिक छोड़ा जाएगा और इसकी देखभाल व मेंटेनेंस सही नहीं हुई तो कुछ ही समय में इसकी हालत भी अन्य विकास कार्यों की तरह हो जाएगाी। न्यास द्वारा यदि इतने रुपए में किसी को रोजगार दिया जाता तो काम भी आता।
- गोविंद खत्री, दादाबाड़ी 

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