साउथ ईस्ट एशिया में वल्चर की सबसे बड़ी ब्रिडिंग कॉलोनी मुकुंदरा

हाड़ौती में 20 से 25 की संख्या में किंग वल्चर

साउथ ईस्ट एशिया में वल्चर की सबसे बड़ी ब्रिडिंग कॉलोनी मुकुंदरा

चंबल में इस समय 200 के करीब इंडियन वल्चर है। करीब 50 की संख्या में व्हाइट रुम्पेड वल्चर की संख्या 50 के करीब है। गिद्दों की यह प्रजाति चंबल पर नेस्टिंग करती है।

कोटा। लोंग बिल्ड वल्चर दुनिया में भले ही खतरे में हो लेकिन चंबल की कराईयों के बीच काफी संख्या में गिद्द हैं। साउथ ईस्ट एशिया की सबसे बड़ी ब्रिडिंग कॉलोनी है। मोटे अनुमान के तौर पर चंबल में इस समय 200 के करीब इंडियन वल्चर है। करीब 50 की संख्या में व्हाइट रुम्पेड वल्चर  है। गिद्दों की यह प्रजाति चंबल पर नेस्टिंग करती है। हाड़ौती में किंग वल्चर की संख्या 20 से 25 है। पॉम सिवेट भी खासी संख्या में हैं।

सवा दो सौ पक्षियों का कलरव
नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि मुकुन्दरा हिल्स में पक्षी की सवा दौ सौ प्रजातियां है। इनमें क्रेसअ‍ेड सरपेंट, ईगल, शॉर्ट टोड,पैराडाइज फ्लाई केचर, सारस क्रेन, स्टोक बिल किंग फिशर, कलर्ड स्कोप्स आउलग्रीन पीजन, गोल्एन ओरिओल,बैबलर,गागरोनी तोता, टुईंया तोता, एलेक जेन्डेरियन पैराकीट, रूडी शेल्डक, वाइट पैलिकन, ग्रेट फलेमिंगो, नोर्दन शावलर, नोर्दन पिंटटेल, बार एडेड गूज, ग्रेलेक गूज, गारगेनी टील समेत पक्षियों की कई प्रजातियां हैं।

मुकुंदरा को मिला प्रकृति का वरदान 
ऐसा है मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रेल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। यह करीब 760 वर्ग किमी में चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौडगढ़ में फैला है। करीब 417 वर्ग किमी कोर और 342 वर्ग किमी बफर जोन है। इसमें मुकुन्दरा राष्ट्रीय उद्यान, दरा अभयारण्य, जवाहर सागर व चंबल घडिाल अभयारण्य का कुछ भाग शामिल है।

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अनूठा है मुकुंदरा
जेडीबी कॉलेज में वनस्पति एसोसिएट प्रोफेसर पूनम जायसवाल ने बताया कि मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में शुष्क, पतझड़ी वन, पहाडिां, नदी, घाटियों के बीच तेंदू, पलाश, बरगद, पीपल, महुआ, बेल, अमलताश, जामुन, नीम, इमली, अर्जुन, कदम, सेमल और आंवले के घने वृक्ष हैं। साथ ही पादक विविधता अधिक मात्रा में है। औषधी पौधों की भरमार है। 

दुर्लभ वन्यजीव भी हैं यहां
चम्बल नदी किनारे बघेरे, भालू, भेडिा, चीतल, सांभर, चिंकारा, नीलगाय, काले हरिन, दुर्लभ स्याहगोह, निशाचर सिविट केट और रेटल जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी देखने को मिलेंगे। इसके अलावा, चीतल, भालू, पैंथर सांभर, जंगली बिल्ली, सियार, जरख, लंगूर, नेवला, झाउ चूहा, जंगली खरगोश, गिल्हरी, चिंटीखोर यानी पैंगोलिन, सिही जंगली चूहा सहित कई वन्यजीव हैं।

मोटे अनुमान के तौर पर चंबल में इस समय 200 के करीब इंडियन वल्चर है। करीब 50 की संख्या में व्हाइट रुम्पेड वल्चर की संख्या 50 के करीब है। गिद्दों की यह प्रजाति चंबल पर नेस्टिंग करती है। हाड़ौती में किंग वल्चर की संख्या 20 से 25 है। पॉम सिवेट भी खासी संख्या में हैं।
- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर 

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