गांवों में बनेंगी मॉडल सड़कें और कचरे से खाद, सामुदायिक शौचालय, महिलाओं के बनाए उत्पाद बिकेंगे मॉल्स में : मीणा

गांवों में बनेंगी मॉडल सड़कें और कचरे से खाद, सामुदायिक शौचालय, महिलाओं के बनाए उत्पाद बिकेंगे मॉल्स में : मीणा

मंत्री का दावा: ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग में जल्दी दिखेंगे कई बदलाव, कचरे और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव कर खाद भी बनाएंगी पंचायतें

जयपुर। प्रदेश के ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग में पिछले एक साल में हुए कार्यों पर नजर डालें तो ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं पर कई योजनाओं का पैसा खर्च हुआ है। कोरोनाकाल की वजह से नरेगा, राजीविका, वाटरशेड सहित कई योजनाओं में कुछ मद चाहकर भी खर्च नहीं हो पाया।


इस राशि से विभाग आगामी दिनों में नए सिरे से खर्च करने का खाका तैयार कर रहा है। पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा ने दावा किया है कि गांवों में जल्दी ही मॉडल सड़कें, शहरी तर्ज पर शौचालय, महिला समूहों के उत्पादों का शहरी मॉल्स में बिकना, ग्रामीण युवाओं को रोजगार, बेहतर जल प्रबंधन नजर आएंगे।

सरकार के तीन साल होने पर पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा से दैनिक नवज्योति ने की खास बातचीत
    पिछले एक साल में सरकार की योजनाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में कितना असर रहा और लोगों तक कितना फायदा पहुंचा।
जवाब: राज्य सरकार ने कई नीतिगत निर्णय लेकर क्रियान्वयन किया। नरेगा, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, जलग्रहण और भू संरक्षण, शौचालय निर्माण, आवास निर्माण, सड़क, बिजली, पानी आदि में खूब काम कराए। प्रशासन गांव के संग अभियान में चारागाह भूमि पर भी लोगों को पट्टे मिले। कोरोनाकाल में जरूर कुछ काम बाधित हुए, लेकिन विधायकों के फंड से ग्रामीण क्षेत्रों में खूब काम कराए गए।


    केन्द्र और राज्य की कई योजनाओं के काम भी अटके रहे, ये कब पूरे होंगे।
जवाब: यह सही है कि कोरोना के चलते केन्द्र और राज्य की कई योजनाओं का काम पूरी तरह धरातल पर नहीं हो पाया। कुछ केन्द्रीय योजनाओं का पैसा समय से नहीं मिलने के कारण भी परेशानी हुई। कोरोनाकाल के दौरान वित्तीय प्रबंधन के दौरान कुछ कार्यों की रफ्तार कम हुई तो उन्हें अब गति दी जाएगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कम रफ्तार वाले कार्यों पर खुद सजग हैं।

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    पिछले एक साल में हुए कार्यों में वित्तीय संकट जैसे अडंगों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाएंगे।
जवाब: कोरोनाकाल के दौरान कई योजनाओं के मद का पैसा रोका गया था। अब इस पैसे को ढंग से उपयोग के लिए प्लानिंग चल रही है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभागीय अफसर अलग-अलग मदों के पैसे का आंकलन कर रहे हैं। कन्वर्जेंस के माध्यम से यह पैसा अटके कार्यों पर खर्च किया जाएगा।


    किस तरह के बदलाव नजर आएंगे और इनके लिए क्या प्लानिंग की जा रही है।
जवाब: एमएलए और एमपी लैड स्कीम, वित्त आयोगों की राशि, केन्द्र और राज्य प्रवर्तित योजनाओं के सभी मदों में खर्च और अवशेष राशि का डाटा तैयार किया जा रहा है। इस पैसे को कन्वर्जेंस माध्यम से खर्च कर गांव में मॉडल सड़कें, गांव के कचरे और ड्रेनेज से खाद बनाने, राजीविका के तहत महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को और अधिक रोजगार से जोडने, नरेगा, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, वाटरशेड, जल जीवन मिशन आदि योजनाओं के अधूरे कार्यो पूरा करेंगे। तैयार प्लान को मुख्यमंत्री के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।


    शहरी तर्ज पर विकास की बात कही, किस तरह से विकास करेंगे।
जवाब: पीडब्ल्यूडी से कन्वर्जेंस के माध्यम से एक दूसरे गांव को जोड़ने के लिए मॉडल सड़कें बनाएंगे। शहरी तर्ज पर सामुदायिक शौचालय बनाएंगे। गांवों में कचरे और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव कर मेकेनाइज्ड सिस्टम से खाद बनाएंगे। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के रोजगार को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इन महिलाओं के उत्पाद शहरों के बड़े नामी गिरामी मॉल्स में बेचे जाएंगे। वाटर रिसोर्स के कार्यों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि बारिश के पानी को सहेज कर ग्रामीणों को सालभर पानी उपलब्ध हो सके। नरेगा में रोजगार को बढ़ावा देने पर हमारा फोकस और ज्यादा रहेगा।

विभाग की प्रमुख उपलब्धियां
    राजीव गांधी जल संचय योजना के तहत हजारों गांव में जल संरक्षण के कार्य।
    प्रशासन गांव के संग अभियान में करीब नौ लाख पट्टे वितरित।
    पेयजल योजना में 16 हजार से ज्यादा काम।
    साढ़े तीन लाखे ज्यादा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी।
    78 हजार से ज्यादा शौचालय निर्माण का भुगतान किया।
    भूमिहीन परिवारों को 15,716 पट्टे जारी।
    25,297 बीपीएल परिवारों को निशुल्क भूखण्ड आवंटन, 16,348 पात्र व्यक्तियों को रियायती दर पर भूखंड मिला।
    जलग्रहण क्षेत्रों की 3580 हैक्टेयर बंजर भूमि में पौधारोपण।
    कोरोनाकाल में ग्रामीणों के पलायन के चलते 22 जिलों में गरीब कल्याण रोजगार
अभियान चलाया।

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