असर खबर का - चन्द्रलोई नदी में मगरमच्छों के मामले में डीएफओ से मांगा जवाब

15 फरवरी को होगी सुनवाई

असर खबर का - चन्द्रलोई नदी में मगरमच्छों  के मामले में डीएफओ से मांगा जवाब

रायपुरा के गंदे नाले में कैमिकल युक्त पानी में उनके शरीर का रंग सफेद हो गया। शेडयूल-1 का एनीमल होने के बावजूद वन विभाग इनके संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं है। बेकद्री का शिकार हो रहे मगरमच्छों के हालात को लेकर दैनिक नवज्योति ने 6 जनवरी को खबर प्रकाशिक कर विभाग का ध्यान आकर्षित किया था।

कोटा। चन्द्रलोई नदी में मगरमच्छों  को लेकर पेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए  स्थाई लोक अदालत ने सोमवार को जिला वन अधिकारी वन मंडल कोटा को नोटिस जारी कर 15 फरवरी 2023 तक जवाब तलब किया है। मामले में एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी ने न्यायालय में एक जनहित याचिका पेश की थी।  जिसमें बताया  था कि चंद लोई नदी में अनेक मगरमच्छ हैं, जो कि यहां आने वाले पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को रोमांचित भी करते हैं और भय  में भी डालते हैं। कोटा शहर में आबादी के बीच निकले नदी नालों में सैकड़ों मगरमच्छ पल रहे हैं शेड्यूल एक  एनिमल होने के बावजूद इसके संरक्षण के प्रति जिला वन अधिकारी गंभीर नहीं हैं। कहीं केमिकल युक्त गंदे नाले में तो कहीं प्रदूषित होती नालियों में इनकी दुर्दशा हो रही है।  जबकि नदी नालों के आसपास वन विभाग की बेश कीमती जमीन है, जिस पर अतिक्रमण हो रहा है। जल जंगल जमीन बचाने के लिए नदी के किनारे क्रोकोडाइल पॉइंट विकसित किया जाना अति आवश्यक है। याचिका में बताया गया कि चंद्र लोई नदी मानस गांव के पास चंबल नदी में मिलती है जबकि इसमें पहले करीब 15 -16 किलोमीटर में मगरमच्छों की संख्या ज्यादा होती है।  रायपुरा, देवली अरब, राजपुरा, जगन्नाथपुरा , बोरखंडी हाथी खेड़ा, अर्जुनपुरा में यह बड़ी संख्या में मिलते हैं । इस  क्षेत्र में मगरमच्छों की गिनती कभी नहीं हुई है।  चंद्रसेल गांव में प्राचीन मठ है इसमें शिव मंदिर है, जहां पर नदी किनारे इन्हें देखा जा सकता है। हर वर्ष वन विभाग की  रेस्क्यू टीम द्वारा मगरमच्छों का आबादी क्षेत्रों से रेस्क्यू किया जाता है।   

लोगों ने नदी में नहाना छोड़ा 
नदी के आसपास बसे क्षेत्र के निवासियों में इनका डर रहता है लोगों ने नदी में नहाना एवं सब्जियां धोना भी बंद कर दिया है। नदी में पानी पीने के लिए आने वाले मवेशियों को भी यह मगरमच्छ शिकार बना लेते हैं । 45 किलोमीटर लंबी चंदलोई नदी में सैकड़ों मगरमच्छ हैं, जो जगह-जगह पानी के बीच चट्टानों पर झुंड के रूप में धूप सेकते नजर आ रहे हैं,  जिन्हें देखकर पर्यटक और स्थानीय निवासी रोमांचित होते हैं उन्हें अनहोनी का भयभीत भी रहता है। नदी किनारे खेतीवाड़ी है जहां पर किसानों को हादसे का डर लगा रहता है।  चंद्रलोई नदी किशोर सागर तालाब रायपुरा नाले में बड़ी संख्या में मगरमच्छ हैं। यहां भी भैंस रोड गढ़ अभयारण्य की तर्ज पर क्रोकोडाइल पॉइंट विकसित किया जाना जनहित में अत्यावश्यक है।  जिससे पर्यटकों को बढ़ावा मिलेगा और इसका संरक्षण भी होगा, साथ ही आबादी क्षेत्र में इनके आने की घटनाओं से भी निजात मिलेगी। क्रोकोडाइल डेस्टीनेशन बनाने से शहर की में पर्यटकों का भी रुझान बढ़ेगा।    वन विभाग की भी आय बढ़ेगी।इसके दोनों किनारों पर कई गांव बसे हैं नदी के किनारे पर तार फेसिंग नहीं होने से लोगों में इनका डर रहता है। डीएफओ की अनदेखी के कारण यह समस्याएं सामने आ रही है इस मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने डीएफओ को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 

नवज्योति ने उठाया था मामला
चन्द्रलोई नदी मगरमच्छों के लिए वरदान साबित हो रही है। यहां अनगिनत मगरमच्छ हैं, जिनकी संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। शहर में आबादी के बीच गुजरते नदी-नालों में सैंकड़ों मगरमच्छ पल रहे हैं। वहीं, रायपुरा के गंदे नाले में कैमिकल युक्त पानी में उनके शरीर का रंग सफेद हो गया। शेडयूल-1 का एनीमल होने के बावजूद वन विभाग इनके संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं है। बेकद्री का शिकार हो रहे मगरमच्छों के हालात को लेकर दैनिक नवज्योति ने 6 जनवरी को खबर प्रकाशिक कर विभाग का ध्यान आकर्षित किया था।

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