लॉ कॉलेज की सीटों पर लटकी तलवार

बार काउंसिल ऑफ इंडिया निर्धारित मापदंड के अनुसार विधि कॉलेजों को देती है मान्यता

लॉ कॉलेज की सीटों पर लटकी तलवार

कोरोना के बाद से ही बीसीआई द्वारा भौतिक की जगह ऑनलाइन निरीक्षण किया जा रहा है।

कोटा। बार काउंसिल ऑफ इंडिया भौतिक निरीक्षण के लिए कोटा आ जाए तो संभाग के सबसे बड़े राजकीय विधि महाविद्यालय की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। वहीं, सीटें 120 से घटकर आधी रह सकती है। दोनों ही स्थिति में विद्यार्थियों के भविष्य पर तलवार लटक सकती है। क्योंकि, कॉलेज बिल्डिंग से लेकर क्लासरूम तक की सम्पूर्ण व्यवस्था सुव्यवस्थित होने के साथ बीसीआई के निर्धारित मापदंड के अनुरूप होनी चाहिए, जो कोटा गवर्नमेंट लॉ कॉलेज की नहीं है। वर्तमान में महाविद्यालय दुर्दशा का शिकार है। चारों तरफ अवैध खनन के बड़े-बड़े गहरे गडढ़े हो रहे हैं और चारों तरफ गंदगी का ढेर लगा हैं। इतना ही नहीं, यह कॉलेज दो कमरों में ही संचालित हो रहा है, जो नियमों के विपरीत है। दरअसल, लीगल एजुकेशन का स्टैण्डर्ड मेंटेन रखने के लिए लॉ कॉलेजों को बीसीआई की मान्यता चाहिए होती है। जिसके लिए महाविद्यालयों द्वारा हर वर्ष आवेदन किया जाता है। इस पर बीसीआई की टीम मौके पर पहुंचकर कॉलेजों के साधन-संसाधनों की वास्तविकता परखती है। इसके बाद ही मान्यता व सीटों का फैसला होता है। लेकिन, कोरोना के बाद से ही बीसीआई द्वारा भौतिक की जगह आॅनलाइन निरीक्षण किया जा रहा है। जिससे कॉलेजों की वास्तविकता उजागर नहीं हो पाती।

यूं खतरे में पड़ सकती है मान्यता या सेशन
राजकीय विधि महाविद्यालय कोटा के प्रोफेसर डॉ. महेंद्र सिंह मीणा का कहना है कि लीगल एजुकेशन का स्टैंण्डर्ड मेंटेन करने के लिए बीसीआई रूल्स बनाती है और उन्हीं नियमों के आधार पर इंडिया में कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता नियंत्रित करती है। इसके लिए पॉलीसी व गाइड लाइन बनाई गई है। जिसके तहत कॉलेजों में 7 से 10 कक्षा-कक्ष, खेल मैदान, शारीरिक शिक्षक, स्मार्ट क्लास व स्मार्ट लाइब्रेरी, मूट कोर्ट, शैक्षणिक व अशैक्षणिक स्टाफ सहित अन्य साधन-संसाधनों का नियमों के अनुरूप होना जरूरी है। इन सुविधाओं की वास्तविकता को बीसीआई की टीम भौतिक निरीक्षण कर परखती है। जिसमें खामियां मिलने पर बीसीआई संबंधित कॉलेज की मान्यता रदद या सीटों की संख्या कम कर सकती है।

बीसीआई की मान्यता क्यों जरूरी?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से तय किया जाता है कि कितने छात्र लॉ की पढ़ाई करेंगे। मान्यता देने से पहले शिक्षकों की योग्यता से लेकर कोर्स और तमाम जरूरी संसाधनों की जांच के बाद ही कॉलेजों को दाखिले की अनुमति दी जाती हैै। जितने छात्रों को दाखिले की अनुमति मिलती है वही अदालतों में अपना पंजीकरण कर प्रैक्टिस कर पाते हैं। बिना अनुमति के अगर किसी कॉलेज ने दाखिले कर लिए तो उनको प्रैक्टिस करने की अनुमति भी नहीं मिल पाती। इसलिए एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने के लिए बीसीआई की परमिशन जरूरी होती है।

क्या है बीसीआई की गाडइ लाइन
- 60 विद्यार्थियों का एक सेशन होता है, जिस पर 5 शिक्षक होना चाहिए। वहीं, 120 स्टूडेंटस का दो सेशन होता है। जिस पर 10 शिक्षक होना चाहिए।
- महाविद्यालय में आधुनिक लाइब्रेरी और पुस्कालय अध्यक्ष होना चाहिए। लाइब्रेरी में कम से कम 10 हजार किताबें होना अनिवार्य है और प्रतिवर्ष न्यूनतम 1 लाख रूपए की किताबें खरीदना आवश्यक है।
- विधि महाविद्यालय में अशैक्षणिक कर्मचारियों का पदस्थापन जरूरी है। साथ ही कॉलेज में सेमीनार हॉल, आईसीटी रूम यानी कम्प्यूटर लैब होना जरूरी है।
- बीसीआई के नियमानुसार कॉलेज में विद्यार्थियों की प्रक्टिस के लिए 50 गुना 60 साइज में मूट कोर्ट बना होना चाहिए। काल्पनिक न्यायलय का पूरा स्ट्रेक्चर जैसे जज की कुर्सी, टेबल यानी डाइज, दोनों तरफ कटघरे, रीडर की टेबल, क्लाइंट व पक्षकारों के बैठने के लिए 80 कुर्सियां और सॉफट फाइल वीडियो, आॅडियो के रूप में उपलब्ध सबूतों को सुनने व देखने के लिए कम्प्यूटर व प्रोजेक्टर होना चाहिए।  
- कॉलेज परिसर में करीब 100 गुणा 100 साइज का खेल मैदान होना जरूरी है। वहीं, बास्केट बॉल, टेबल टेनिस, वॉलीबॉल सहित अन्य सुविधाएं होने के साथ शारीरिक शिक्षक होना चाहिए।

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उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविकता
- राजकीय विधि महाविद्यालय कोटा में वर्तमान में 60-60 के दो सेशन चल रहे हैं। 120 सीटों पर 8 ही शिक्षक नियुक्त हैं, जबकि 2 शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर हैं। इनमें से एक शिक्षक कोटा विश्वविद्यालय व दूसरे उच्चा शिक्षा ग्रुप-4 शासन सचिवालय जयपुर में कार्यरत हैं।
- यहां न तो आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी है और न ही पुस्तकालय अध्यक्ष है। प्रतिवर्ष 20 हजार रूपए की ही किताबें खरीदी जा रही है, वह  भी बजट उपलब्ध होने पर। कई बार ऐसी स्थिति भी आती है जब बजट के अभाव में किताबों की खरीद नहीं हो पाती।
- कॉलेज में नियमों के अनुरूप मूट कोर्ट नहीं है। हालांकि, क्लासरूम में
- विधि महाविद्यालय में खेल मैदान ही नहीं है। परिसर में 10 से 20 फीट गहरे गडढ़े हो रहे हैं। चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। 
- कॉलेज में अशैक्षणिक कर्मचारियों के 10 पद स्वीकृत हैं जबकि एक भी कर्मचारी नियुक्त नहीं है। हालांकि, यहां एक ही अशैक्षणिक कर्मचारी है जो 2021 से ही जयपुर के बगरू कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत है।

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240 से घटकर रह गई 120 सीट
कोटा लॉ कॉलेज मई 2005 से अक्टूबर 2016 तक गवर्नमेंट कॉलेज कोटा में अलग से अस्थाई कॉलेज के रूप में संचालित रहा। इस दरमियान प्रथम वर्ष की सीट 240 थी। जिसकी वजह कैम्पस बड़ा होना, खेल मैदान, पर्याप्त कक्षा कक्ष होना था। लेकिन, फरवरी 2017 में जैसे ही विधि महाविद्यालय रावतभाटा रोड स्थित टैगोर नगर में खुद की बिल्डिंग में शिफट होते ही सीटें 240 से घटकर 120 ही रह गई। क्योंकि, इस समय 390 स्टूडेंटस पर 2 ही शिक्षक कार्यरत थे।

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राजकीय विधि महाविद्यालय कोटा वर्तमान में दुर्दशा का शिकार है। यदि, बीसीआई की टीम कोटा पहुंचकर कॉलेज का भौतिक निरीक्षण करे तो मान्यता या सेशन खतरे में पड़ सकते हैं। सीटें 120 से घटकर 60 ही रह सकती है। क्योंकि, कॉलेज की स्थिति बीसीआई की गाइड लाइन के अनुरूप नहीं है। इससे पहले बीसीआई वर्ष 2017 में एक सेशन घटा चुकी है। जिसकी वजह से सीटें 240 से घटकर 120 ही रह गई है। जिससे कई विद्यार्थी दाखिले से वंचित रह गए।
- गौरव मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष, विधि महाविद्यालय कोटा

पिछले 7 साल से सेशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, बीसीआई के नियमों के अनुसार कॉलेज में करीब 8 कक्षा कक्ष होना चाहिए, जो वर्तमान में 2 ही हैं। खेल मैदान, अशैक्षिणक स्टाफ, पुस्तकालय अध्यक्ष सहित अन्य साधन संसाधनों का अभाव होने से सेशन यानी सीटें नहीं बढ़ पा रहे। सुविधाएं विकसित करने के लिए कॉलेज प्रशासन द्वारा आयुक्तालय को पत्र लिख स्थिति से अवगत कराया। इसके बावजूद सुधार नहीं हुआ।
- बुद्धराज मेरोठा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, लॉ कॉलेज

संभाग का सबसे बड़ा कॉलेज होने के नाते यहां 240 सीटें होनी चाहिए। वहीं, पीजी संचालित करने की स्वीकृति मिलनी चाहिए। हर साल प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए 600 से ज्यादा आवेदन आते हैं, जबकि, सीटें 120 ही हैं। ऐसे में कई विद्यार्थी दाखिले से वंचित रह जाते हैं और निजी कॉलेजों में कानून की पढ़ाई के लिए महंगी फीस चुकानी पड़ती है। 
- हरिओम मीणा, छात्रनेता, लॉ कॉलेज  

महाविद्यालय के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में भामाशाहों के सहयोग से मूट कोर्ट भी लगवाए हैं। कॉलेज के लिए समूचित विकास के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। 
- डॉ. चंद्रजीत सिंह, प्राचार्य, विधि महाविद्यालय

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