सपने पूरे कर रहा महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल

पांच साल में कोटा को मिली 52 सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की सौगात

सपने पूरे कर रहा महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल

शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार अंगे्रजी माध्यम से सरकारी स्कूलों में 30 से ज्यादा स्कूल जिले के ग्रामीण इलाकों में खोले गए हैं।

कोटा। बदलते दौर के साथ शिक्षा का माध्यम भी तेजी से बदलने लगा है। हिन्दी की जगह अंग्रेजी माध्यम अभिभावकों की प्राथमिकता में शुमार हो गई। लेकिन, बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाने का ख्वाब महंगी फीस के कारण पूरा नहीं कर पाने वाले अभिभावकों के सपने अब महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल पूरा कर रहा है। वहीं, बुनियादी शिक्षा से क्वालिटी एजुकेशन की नींव भी मजबूत हो रही है। समय की मांग को देखते हुए गहलोत सरकार ने प्रदेशभर में सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल खोल दिए। इससे गरीब तबके के विद्यार्थियों का अंग्रेजी माध्यम स्कूल में तालिम हासिल करने की राह आसान हो गई।

कोटा को मिले 52 इंग्लिश मीडियम स्कूल
कोटा जिले को पिछले पांच साल में 52 राजकीय महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की सौगात मिली है। जिले में सबसे पहला स्कूल वर्ष 2019 में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मल्टीपरपज गुमानपुरा को हिन्दी से अंग्रेजी माध्यम में तब्दील किया था। जिसके प्रति लोगों का जबरदस्त रुझान देखने को मिला। इससे उत्साहित सरकार ने अगले शैक्षणिक सत्र 2020-21 में 7 सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल खोल दिए। इस तरह जिले में 2019 से 2023 तक कुल 52 महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल खुल चुके हैं।

20 से ज्यादा स्कूलों में चल रही बाल वाटिकाएं
महात्मा गांधी स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए सरकार ने निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में भी प्री प्राइमरी कक्षाएं संचालित कर दी। जिसे बाल वाटिका का नाम दिया गया। यहां तीन वर्ष की उम्र से बच्चों को नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी में एडमिशन दिया जा रहा है। जिले में 20 से ज्यादा सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं चल रही हैं। तीनों कक्षाओं में 75-75 सीटें हैं, जो वर्तमान फुल हो चुकी हैं।

महंगी फीस से मिली निजात
निजी स्कूलों में मोटी फीस होने के कारण कई प्रतिभाएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती थी। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ा नहीं पाने से निराश रहते थे। ऐसे अभिभावकों के सपने पूरे करने के लिए सरकार ने जिलेभर में इंग्लिश मीडियम स्कूल खोल दिए। जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए वेल क्वालिफाई शिक्षक लगाए गए हैं। 

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30 से ज्यादा स्कूल ग्रामीण अंचल में
शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार अंगे्रजी माध्यम से सरकारी स्कूलों में 30 से ज्यादा स्कूल जिले के ग्रामीण इलाकों में खोले गए हैं। जहां लेवल-1 व लेवल-2 के शिक्षकों को तैनात किया गया है। इन स्कूलों में बच्चे नर्सरी से ही अंग्रेजी पढ़ रहे हैं। 

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अभिभावकों में खुशी, सपने हुए साकार
दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाने वाले संजय नगर निवासी शंभू लाल का कहना है, प्राइवेट स्कूल की फीस महंगी होने के कारण कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ सकेगी।  सरकार ने महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलकर उन्हें संबल दिया है। बिजली पार्ट्स की दुकान पर काम करने वाले बोरखेड़ा निवासी शकील कहते हैं, आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा पाने का मलाल रहता था, लेकिन सरकार ने इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलकर बच्चों के भविष्य की राह आसान कर दी। रामचंद्रपुरा निवासी राधेश्याम सेगर, कन्हैया लाल व नल का काम करने वाले रविंद्र कुमार, राजेंद्र नागर ने बताया कि हमारे बच्चे महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ रहे हैं। उनमें अंग्रेजी सीखने का उत्साह व ड्रेसअप सेंस भी बढ़ा है। बच्चों की एक्टिविटी में बदलाव आ रहा है। अंग्रेजी में कविता सुनाते हैं तो खुशी होती है। शिक्षा विभाग ने पांचवे चरण के शैक्षणिक सत्र 2023-24 में 15 स्कूल खोले।जिनमें गत 31 जुलाई को ही शिक्षक लगाकर अध्यापन कार्य शुरू करवा दिया। इन विद्यालयों में शुरूआती फेस में कक्षा एक से आठवीं तक अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाया जा रहा है। जिसके लिए लेवल-1 व लेवल-2 के शिक्षकों की नियुक्ती की गई है। 

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सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ा रुझान
शिक्षक माशूक अली व शिव प्रकाश ने बताया कि महात्मा गांधी स्कूल खुलने से गरीब तबके व मध्यम वर्ग के लोगों को निजी स्कूलों की मनमानी व मोटी फीस से निजात मिली है। 5 से 8 किमी दूर रहने वाले अभिभावक भी अपने बच्चों का यहां दाखिला करवा रहे हैं। क्वालिटी एजुकेशन के साथ किताबें तक मुफ्त में मिल रही है। ऐसे में विद्यार्थियों व अभिभावकों का रुझान सरकारी स्कूलों की ओर तेजी से बढ़ा है।  

गवर्नमेंट अंग्रेजी मीडियम स्कूलों की निश्चित तौर पर डिमांड बढ़ी है। हाड़ौती में पिछले पांच साल में कुल 183 स्कूल खुले हैं। इनमें से कई स्कूलों में तो बाल वाटिकाएं संचालित हो रही है। वहीं, शहर में कई ऐसे हिन्दी माध्यम स्कूल हैं, जिनमें बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छी स्थिति में है, उन्हें भी अंग्रेजी मीडियम में परिवर्तित किया जा सकता है। 
- अजीम पठान, रिटायर्ड शिक्षक

एक तरफ सरकारी स्कूलों में नामांकन के लिए प्रवेशोत्सव जैसे अभियान चलाने पड़ रहे, वहीं दूसरी ओर महात्मा गांधी अंग्रेजी स्कूल में बच्चों को एडमिशन दिलाने के लिए अभिभावक दौड़भाग कर रहे हैं। पिछले साल माहात्मा गांधी वोकेशनल व मल्टीपरपज इंग्लिश मीडियम स्कूलों में बच्चों के एडमिशन के लिए अभिभावक कतारों में नजर आए थे। अधिकतर स्कूलों में एडमिशन के लिए लॉटरी निकालनी पड़ी थी। महात्मा गांधी स्कूलों की संख्या में और बढ़ोतरी होनी चाहिए।  
- लियाकत अली खान, रिटायर्ड शिक्षक  

गत वर्ष मल्टीपरपज में नर्सरी से कक्षा 1 के लिए 25 सीटों पर 1800 आवेदन आए थे। 20 किमी दूर से भी अभिभावकों ने आवेदन किए थे। बम्पर आवेदन के चलते लॉटरी निकाल कर निर्धारित सीटों पर एडमिशन दिए थे। हालांकि बड़ी संख्या में बच्चे एडमिशन से महरूम रह गए थे।  सरकार के इस प्रयास से शिक्षा जगत में बड़ा बदलाव आया है। इसी का नतीजा है कि शहर के बड़े निजी स्कूलों के विद्यार्थी भी यहां एडमिशन ले रहे हैं और वर्तमान में पढ़ रहे हैं। 
- राहुल शर्मा, प्रिंसिपल, माहात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम मल्टीपरपज स्कूल

पहले पेपर फिर इंटरव्यू, पास होने के बाद शिक्षकों को दी पोस्टिंग
जिले में 52 माहात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल संचालित हो रहे हैं। जिनमें शिक्षक भी ऐसे लगाए हैं, जो खुद इंग्लिश मीडियम से पढ़े हंै। ऐसे में वे जिस टेक्निक से पढ़े उसी टेक्निक के साथ वे बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वहीं, सरकार ने शिक्षकोें के लिए अब रिटर्न पेपर और इंटरव्यू अनिवार्य कर दिया है। इसमें पास होने वाले लेवल-1 व लेवल-2 के शिक्षकों को महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पोस्टिंग दी गई है। इस योजना से उन अभिभावकों के सपने पूरे हो रहे हैं, जो महंगी फीस के कारण अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में नहीं पढ़ा पा रहे थे। अंग्रेजी माध्यम के स्कूल समय की डिमांड है। ऐसे में सरकार ने सैंकड़ों अभिभावकों को तोहफा देकर उनके बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन उपलब्ध करवा रही है। वहीं, बाल वाटिका खोलने का उद्देश्य बुनियादी ढांचा मजबूत करना है ताकि कम उम्र से ही बच्चे अंग्रेजी माध्यम से रूबरू हो सके और आगे की पढ़ाई इंग्लिश में करने के लिए तैयार हो सके।
- शशि मीणा, उप निदेशक, महात्मा गांधी प्रकोष्ठ, सहायक निदेशक कार्यालय शिक्षा विभाग 

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