सनातन धर्म के संरक्षण में साधु-संतों का विशेष योगदान, यज्ञ से होती है आत्मा की शुद्धि: भजनलाल शर्मा

सनातन धर्म के संरक्षण में साधु-संतों का विशेष योगदान, यज्ञ से होती है आत्मा की शुद्धि: भजनलाल शर्मा

भजनलाल शर्मा ने कहा कि यज्ञ का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है। यह पर्यावरण को संरक्षित करने का प्रमुख माध्यम है। यज्ञ करने वाले और उसमें शामिल होने वाले व्यक्तियों की आत्मा शुद्ध हो जाती है और उनका सर्वांगीण विकास होता है।

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि साधु-संतों के कारण भारतीय संस्कृति का संवर्द्धन एवं संरक्षण हुआ है। उनके विशेष योगदान से आज भारतीय संस्कृति के मूल्य विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं। शर्मा रविवार को गोविंद देव जी मंदिर परिसर में बाबा बालकनाथ आश्रम द्वारा महामृत्युजंय महायज्ञ के उपलक्ष्य पर आयोजित कलश यात्रा को सम्बोधित कर रहे थे।

शर्मा ने कहा कि यज्ञ का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है। यह पर्यावरण को संरक्षित करने का प्रमुख माध्यम है। यज्ञ करने वाले और उसमें शामिल होने वाले व्यक्तियों की आत्मा शुद्ध हो जाती है और उनका सर्वांगीण विकास होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएं धार्मिक कार्यक्रमों में अग्रणी रूप से भाग लेती रही हैं और उनसे समाज के सभी वर्गों को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। इससे पहले शर्मा ने बाबा बालकनाथ की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनका स्मरण किया। उन्होंने बस्तीनाथ जी महाराज का शॉल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया। मुख्यमंत्री ने एक महिला के सिर पर कलश रखकर और पूजन कर यात्रा की विधिवत शुरुआत भी की।

मुख्यमंत्री ने गोविंद देव जी मंदिर में की पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री ने गोविंद देव जी मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। उन्होंने यहां छप्पन भोग झांकी के दर्शन भी किए। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आत्मीयता से मुलाकात की। मुख्यमंत्री को अपने साथ पाकर कई श्रद्धालुओं ने उनके साथ सेल्फी भी ली। इस अवसर पर गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम, विधायक कुलदीप धनकड़ और कैलाश वर्मा, पूर्व विधायक रामहेत यादव सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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