पाकिस्तान में कोई भी सरकार कभी 5 साल पूरे क्यों नहीं कर पाई, समझिए कारण

पाकिस्तान की सरकार में हमेशा से ही सेना का दखल रहा है।

पाकिस्तान में कोई भी सरकार कभी 5 साल पूरे क्यों नहीं कर पाई, समझिए कारण

पाकिस्तान की राजनीतिक हालत ये है कि वहां पर आज तक कोई भी सरकार अपने कार्यकाल के 5 साल पूरे नहीं कर पाई।

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान की आजादी एक साथ हुई। दोनों मुल्कों का पहले बंटवारा हुआ और फिर एक देश धर्म के नाम पर पाकिस्तान बन गया और एक धर्मनिरपेक्ष देश भारत बन गया। पाकिस्तान की राजनीतिक हालत ये है कि वहां पर आज तक कोई भी सरकार अपने कार्यकाल के 5 साल पूरे नहीं कर पाई। पाकिस्तान की सरकार में हमेशा से ही सेना का दखल रहा है। यहां पर भले ही अपनी सरकार का चुनाव आवाम करती हो मगर सत्ता में सेना का दखल हमेशा से रहा है।


आजादी के बाद क्या हाल रहा?
पाकिस्तान और भारत एक साथ आजाद हुए थे। पाकिस्तान में पहले 10 साल में 7 प्रधानमंत्री बन गए। इसमें सबसे ज्यादा समय तक पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की सरकार चली जिनके चौथे साल 1951 में हत्या कर दी गई।


सेना की क्या भूमिका रही है
जिस तरह पहले 10 साल के आखिरी 6 साल में छह प्रधानमंत्री बने उससे साफ  था कि जनता में नाराजगी बढ़ रही थी और लोगों का लोकतंत्र से भरोसा ही उठ रहा था। इसी का फायदा सेना प्रमुख अयूब खान ने उठाया। उन्होंने 1959 के आम चुनाव से पहले तत्कालीन राष्टÑपति इस्कंदर मिर्जा के साथ मिलकर सैनिक शासन लागू कर दिया। 1959 से 1969 तक पाकिस्तान में सैन्य शासन ही रहा।

भुट्टो का दौर और जिया उल हक का शासन
अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते अयूब खान को सत्ता से हटना पड़ा लेकिन बीच में 13 दिनों को छोड़कर सेना का ही शासन रहा। इसके बाद 1973 से 77 तक पाकिस्तान में जुल्फि कार अली भुट्टो का दौर 4 साल तक चला। जिन्हें 1977 में सेना प्रमुख मोहम्मद जिया उल हक ने हटाकर सेना का शासन लागू कर दिया। बाद में भुट्टो को फांसी दे दी गई इसके बाद जिया उल हक का सैनिक शासन 1985 तक चला।

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बेनजीर भुट्टो और नवाज शरीफ का दौर कैसा रहा
पाकिस्तान के लोकतंत्र के इतिहास में साल 1988 के चुनाव बेहद अहम रहा इन चुनाव में वोटों की बेटी बेनजीर भुट्टो प्रधानमंत्री बनीं। वह पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री भी बनी। 2 साल बाद 1990 में पाकिस्तान में फिर आम चुनाव हुए इस चुनाव में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) को सबसे ज्यादा सीटें मिली और नवाज शरीफ  प्रधानमंत्री चुने गए। इसके बाद 1999 तक नवाज और बेनजीर भुट्टो का दौरा 1999 में एक बार फिर मुशर्रफ  ने शासन लागू कर दिया। यूसुफ  रजा गिलानी और नवाज शरीफ  का 2017 में नवाज शरीफ  की नियुक्ति को कोर्ट द्वारा अयोग्य ठहरा दिया गया और 2018 में इमरान खान प्रधानमंत्री बने।

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