कोटा में खाली डिब्बे बन सड़कों पर दौड़ रही एम्बुलेंस

कोटा शहर में चिकित्सा विभाग की अनदेखी के चलते मरीजों की जान सांसत में है। स्थिति यह है कि अधिकांश एंबुलेंस में जरूरी उपकरण भी नहीं है।

 कोटा में खाली डिब्बे बन सड़कों पर दौड़ रही एम्बुलेंस

न ईसीजी मॉनीटर, न ऑक्सीजन की सुविधा, जिम्मेदारी किसकी किसी को पता नहीं, सांसत में मरीजों की जान

कोटा। कोटा शहर में चिकित्सा विभाग की अनदेखी के चलते मरीजों की जान सांसत में है। क्योंकि, एंबुलेंस संचालक उनकी जान संकट में डाल रहे हैं। स्थिति यह है कि अधिकांश एंबुलेंस में तो जरूरी उपकरण भी नहीं है। एंबुलेंस में ऑक्सीजन, ईसीजी मॉनीटर, स्पाइनल बोर्ड, ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर होने चाहिए, लेकिन ऐसे गिनती की एंबुलेंस में है। सरकारी में तो फिर भी जरूरी उपकरण हैं। निजी में आधे से अधिक उपकरण नहीं है। जिसके चलते मरीजों की जान संकट में डाली जा रही है। ऐसा भी नहीं है कि एंबुलेंस संचालकों द्वारा मरीजों को फ्री सेवाएं दी जा रही हो। मरीजों के परिजनों से पूरा किराया वसूला जा रहा है। इसके बावजूद भी एंबुलेंस में जरूरी उपकरण नहीं रखते। ऐसे में मरीज को इन उपकरणों की जरुरत पड़ जाए तो अनहोनी से इनकार नहीं कर सकते हैं। ऐसा पूर्व में हो भी चुका है। पिछले साल बोरखेड़ा पुलिया पर एक एंबुलेंस  खराब हो गई थी। जिसके चलते गर्भवती महिला को दिक्कत हुई थी। ऐसे मामलों पर भी चिकित्सा विभाग ने सबक नहीं लिया है।

मॉनीटरिंग की प्रॉपर नहीं व्यवस्था
बड़ी संख्या में इस तरह की एंबुलेंस कोटा शहर में संचालित हो रही है, लेकिन इनकी मॉनीटरिंग की व्यवस्था नहीं है। क्योंकि, अधिकांश एंबुलेंस निजी और सरकारी अस्पतालों के बाहर खड़ी होती है। नियमानुसार इनकी मॉनीटरिंग अस्पताल प्रशासन को करनी होती है, लेकिन ये सीएमएचओ  के अधिकार क्षेत्र में होने की बात कह कर पल्ला झाड़ देते हैं।  उधर, सीएमएचओ भी अपने अधिकार क्षेत्र में होने की बात से इनकार करते हैं।  बताया जाता है कि  सीएमएचओ के नियंत्रण में 31 एंबुलेंस है। इनमें 108 एंबुलेंस की संख्या 17 है। जबकि, 104 एंबुलेंस 14 है।

ये उपकरण अनिवार्य
. स्पाइनल बोर्ड: यह एम्बुलेंस उपकरण की एक प्रणाली प्रदान करता है। इमरजेंसी की स्थिति में संदिग्ध रीढ़ आघात के साथ रोगी को परिवहन करने के काम आता है।

. ईसीजी मॉनीटर और एक डीफिब्रिलेटर: ईसीजी मॉनीटर रोगी के महत्वपूर्ण संकेतों पर नजर रखता है। हृदय को स्थिर करने या दुर्घटनाग्रस्त रोगी को पुनर्जीवित करने के लिए किया जाता है।
. ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर: ये स्वचालित परिवहन मैकेनिकल वेंटिलेटर का एक पार्ट है, जो बैगिंग (मैनुअल वेंटिलेशन) की जगह लेने के लिए होता है जब एक मरीज जो स्वतंत्र रूप से सांस नहीं ले सकता तो इसको उपयोग में लेते हैं।
. सक्शन यूनिट: इसका उपयोग जब रोगी आंतरिक रूप से खून बह रहा है तो महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव डाला जा सकता है। इसका उपयोग उन तरल पदार्थों को हटाने के लिए भी किया जाता है जो शरीर या मुंह के अंदर एकत्र होते हैं।
. सिरिंज पंप: सिरिंज पंप वह उपकरण है जो नियंत्रित लक्ष्य संस्करणों के साथ एक निर्धारित प्रवाह दर पर रोगी के शरीर में या तो तरल को संक्रमित या वापस ले सकता है।
.  ऑक्सीजन आपूर्ति इकाइयां: एंबुलेंस उपकरणों के सबसे महत्वपूर्ण  है। क्योंकि, उनका उपयोग अग्नि से बचे लोगों में किया जा सकता है। सांस लेने में कठिनाई वाले रोगियों जैसे अस्थमा या अन्य रोगियों के लिए जरूरी है। इसके अलावा स्फिग्मोमैनोमीटर तथा अन्य उपकरण भी जरूरी है।

इनका कहना है
इनकी मॉनीटरिंग संबंधित अस्पताल द्वारा की जाती है। सीएमएचओ स्तर पर तो केवल सरकारी एम्बुलेंस की मॉनीटरिंग की जाती है। फिटनेस की जांच परिवहन विभाग करता है।
- डॉ. बीएस तंवर, सीएमएचओ, कोटा

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