कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने थामा भाजपा का दामन, कांग्रेस पार्टी पर लगाया दिशाहीन होने का आरोप 

कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने थामा भाजपा का दामन, कांग्रेस पार्टी पर लगाया दिशाहीन होने का आरोप 

लोकसभा चुनाव शुरू होने के बाद कांग्रेसी नेताओं द्वारा भाजपा में शामिल होने का सिलसिला जारी है। चौबीस घंटे में कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है।

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव शुरू होने के बाद कांग्रेसी नेताओं द्वारा भाजपा में शामिल होने का सिलसिला जारी है। चौबीस घंटे में कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है। बॉक्सर विजेंदर सिंह कल ही कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे, वहीं आज कांग्रेस के बड़े नेता गौरव वल्लभ भी भाजपा में शामिल हो गए। गौरव वल्लभ ने कांग्रेस पार्टी पर दिशाहीन होकर आगे बढने का आरोप लगाते हुए कहा कि मैं खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहा, मैं न तो सनातन विरोधी नारे लगा सकता हूं और न ही सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर्स को गाली दे सकता, इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों व प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने सुबह ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को खत लिखकर इस्तीफा दिया था। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में गौरव वल्लभ को उदयपुर सीट से मैदान में उतारा था, लेकिन वे भाजपा के ताराचंद जैन से 32 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए थे। वहीं उन्होंने 2019 में झारखंड के जमशेदपुर से अपनी किसमत अजमाई थी, जहां वो तत्कालीन सीएम रघुवर दास से हार गए थे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे पत्र में वल्लभ ने लिखा कि मैं वित्त का प्रोफेसर हूं, कांग्रेस पार्टी की सदस्यता हासिल करने के बाद पार्टी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया, कई मुद्दों पर पार्टी का पक्ष दमदार तरीके से देश की महान जनता के समक्ष रखा, लेकिन पिछले कुछ दिनों से बड़ेपार्टी के स्टैंड से असहज महसूस कर रहा हूं। जब मैंने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन किया तब मेरा मानना था कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है, जहां पर युवा, बौद्धिक लोगों की, उनके आइडिया की कद्र होती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मुझे यह महसूस हुआ कि पार्टी का मौजूदा स्वरूप नए आइडिया वाले युवाओं के साथ खुद को एडजस्ट नहीं कर पाता। पार्टी का ग्राउंड लेवल कनेक्ट पूरी तरह से टूट चुका है, जो नए भारत की आकांक्षा को बिल्कुल भी नहीं समझ पा रही है। जिसके कारण न तो पार्टी सत्ता में आ पा रही और न ही मजबूत विपक्ष की भूमिका ही निभा पा रही हैं, इससे मेरे जैसा कार्यकर्ता हतोत्साहित होता है।  

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