नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क: जीनपूल में बदलाव के लिए 16 साल बाद मैसूर चिड़ियाघर से भेड़िए लाए जाएंगे

2008-09 में गुजरात के चिड़ियाघर से मादा भेड़िया लेकर आए थे जयपुर जू

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क: जीनपूल में बदलाव के लिए 16 साल बाद मैसूर चिड़ियाघर से भेड़िए लाए जाएंगे

गौरतलब है कि साल 2012 में वन क्षेत्र (वाइल्ड) से भी एक घायल नर भेड़िया को रेस्क्यू कर लाया गया था। जिसके स्वस्थ होने पर सेंट्रल जू आफ अथॉरिटी (सीजेडए) से अनुमति मिलने के बाद पर्यटकों के अवलोकनार्थ जू में डिस्प्ले में रखा गया था। 

जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क आने पर पर्यटकों में सबसे ज्यादा कैट फैमिली के वन्यजीवों को देखने का क्रेज देखा जाता है। वहीं वन्यजीव एक्सचेंज कार्यक्रम के लिए गोल्ड कहे जाने वाले भेड़ियों की संख्या (मेल और फिमेल मिलाकर) करीब 12 बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार साल 2008-09 में गुजरात के चिड़ियाघर (कैप्टिविटी) से एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत मादा भेड़िया लाई गई थी। जिससे इनके जीनपूल में बदलाव हुआ। अब करीब 16 साल बाद फिर दूसरे जू (कैप्टिविटी) से भेड़िए लाए जा सकते हैं। गौरतलब है कि साल 2012 में वन क्षेत्र (वाइल्ड) से भी एक घायल नर भेड़िया को रेस्क्यू कर लाया गया था। जिसके स्वस्थ होने पर सेंट्रल जू आफ अथॉरिटी (सीजेडए) से अनुमति मिलने के बाद पर्यटकों के अवलोकनार्थ जू में डिस्प्ले में रखा गया था। 

अब सेंट्रल जू आफ अथॉरिटी को भेजा प्रस्ताव
वन विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार भेड़िए एक्सचेंज कार्यक्रम के लिए दिल्ली स्थित सेंट्रल जू आॅफ अथॉरिटी (सीजेडए) को प्रपोजल बनाकर भेजा गया है। अगर इसे स्वीकृति मिलती है तो मैसूर चिड़ियाघर से एक मादा और एक नर भेड़िया नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लाया जाएगा। वहीं एक नर और एक मादा भेड़िया मैसूर चिड़ियाघर को दिया जाएगा। ताकि दोनों जगह इनका जीनपूल चेंज किया जा सके। पहले भी इस संबंध में प्रपोजल बनाकर भेजे गए थे, लेकिन उस समय अधिकारियों ने इस ओर ज्यादा रूचि नहीं दिखाई थी, जिसके चलते ये एक्सचेंज कार्यक्रम अधरझूल में लटक गया था। 

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