कश्मीर से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का पार्टी का था फैसला : आजाद

कश्मीर के लोगों की मदद करना चाहते हैं

कश्मीर से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का पार्टी का था फैसला : आजाद

संसद का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला पार्टी ने लिया है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव नहीं लड़ने के लिए किसी से आदेश नहीं लेते। उन्होंने कहा कि कमान गुलाम नबी आजाद के हाथ में है, किसी बाहरी ताकत के हाथ में नहीं।

श्रीनगर। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह किसी से आज्ञा नहीं लेते हैं और कश्मीर से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला उनकी पार्टी का फैसला था। आजाद ने डीपीएपी उम्मीदवार पार्रे द्वारा अनंतनाग में अनंतनाग संसदीय क्षेत्र के लिए नामांकन-पत्र दाखिल करने के बाद कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों की मदद करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब मैं दिल्ली से आया, तो मैंने लोगों से कहा था कि मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों की सेवा करूंगा। मेरे लोगों ने मुझसे कहा कि मैं संसद का चुनाव लड़कर फिर से दिल्ली जा रहा हूं और जो मैंने कहा था, उसका उलटा कर रहा हूं। इसलिए मैंने उनकी बात सुनी और यहीं उनकी सेवा करने का फैसला किया।

संसद का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला पार्टी ने लिया है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव नहीं लड़ने के लिए किसी से आदेश नहीं लेते। उन्होंने कहा कि कमान गुलाम नबी आजाद के हाथ में है, किसी बाहरी ताकत के हाथ में नहीं। डीपीएपी ने घोषणा की थी कि आजाद अनंतनाग सीट से चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद आजाद की पार्टी ने पार्रे को अपनी पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया। पार्रे एक सक्षम उम्मीदवार हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि पारे आराम से चुनाव जीतेंगे। पूर्व कांग्रेसी नेता ने कहा कि उधमपुर संसदीय क्षेत्र में डीपीएपी की स्थिति बहुत अच्छी है, जहां पहले चरण का मतदान हो रहा है।

 

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