सत्यजीत रे ने दिलाई थी भारतीय सिनेमा को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

सत्यजीत रे ने दिलाई थी भारतीय सिनेमा को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

सत्यजीत रे ने अपने करियर की शुरूआत वर्ष 1943 में ब्रिटिश एडवरटाइजमेंट कंपनी से बतौर जूनियर विजुलायजर से की, जहां उन्हें 18 रुपए महीने बतौर पारिश्रमिक मिलते थे ।

मुंबई। भारतीय सिनेमा जगत में युगपुरूष सत्यजीत रे को एक ऐसे फिल्मकार के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने अपनी निर्मित फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा जगत को अंतराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई । सत्यजीत रे का जन्म कलकता में 02 मई 1921 को एक उच्च घराने में हुआ था। उनके दादा उपेन्द्र किशोर रे वैज्ञानिक थे, जबकि उनके पिता सुकुमार रे लेखक थे । सत्यजीत रे ने अपनी स्नातक की पढ़ाई कलकता के मशहूर प्रेसीडेंसी कॉलेज से पूरी की । इसके बाद अपनी मां के कहने पर उन्होंने रवीन्द्र नाथ टैगौर के शांति निकेतन में दाखिला ले लिया, जहां उन्हें प्रकृति के करीब आने का मौका मिला । शांति निकेतन में करीब दो वर्ष रहने के बाद सत्यजीत रे वापस कोलकता आ गए ।

   सत्यजीत रे ने अपने करियर की शुरूआत वर्ष 1943 में ब्रिटिश एडवरटाइजमेंट कंपनी से बतौर जूनियर विजुलायजर से की, जहां उन्हें 18 रुपए महीने बतौर पारिश्रमिक मिलते थे । इस बीच वह डी.के गुप्ता की पब्लिकेशन हाउस सिगनेट प्रेस से जुड़ गए और बतौर कवर डिजायनर काम करने लगे । बतौर डिजायनर उन्होंने कई पुस्तकों का डिजायन तैयार किया इसमें जवाहर लाल नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया प्रमुख है । वर्ष 1949 में सत्यजीत रे की मुलाकात फ्रांसीसी निर्देशक जीन रेनोइर से हुयी जो उन दिनों अपनी फिल्म द रिवर के लिए शूटिग लोकेशन की तलाश में कलकता आए थे। जीन रेनोर ने सत्यजीत रे की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें फिल्म निर्माण की सलाह दी ।

   वर्ष 1950 में सत्यजीत रे को अपनी कंपनी के काम के कारण लंदन जाने का मौका मिला जहां उन्होंने लगभग 99 अंग्रेजी फिल्में देख डाली । इसी दौरान उन्हें एक अंग्रेजी फिल्म बाइसाईकिल थीफस देखने का मौका मिला। फिल्म की कहानी से सत्यजीत रे काफी प्रभावित हुये और उन्होंने फिल्मकार बनने का निश्चय कर लिया । सत्यजीत रे बंग्ला साहित्यकार विभूति भूषण बंधोपाध्याय के उपन्यास विलडंगसरोमन से काफी प्रभावित थे और उन्होंने उनके इस उपन्यास पर पाथेर पांचाली नाम से फिल्म बनाने का निश्चय किया । फिल्म पाथेर पांचाली के निर्माण में लगभग तीन वर्ष लग गये । फिल्म निर्माण के क्रम में सत्यजीत रे की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गयी, जिससे फिल्म निर्माण की गति धीमी पड़ गयी । बाद में पश्चिम बंगाल की सरकार के सहयोग से फिल्म को पूरा किया जा सका ।

   वर्ष 1955 में प्रदर्शित फिल्म पाथेर पांचाली ने कोलकाता के सिनेमाघर में लगभग 13 सप्ताह हाउसपुल दिखाई गई इस फिल्म को फ्रांस में प्रत्येक वर्ष होने वाली प्रतिष्ठित कांस फिल्म फेस्टिबल में बेस्ट ह्यूमन डाक्यूमेंट का विशेष पुरस्कार भी दिया गया । फिल्म पथेर पांचाली के बाद सत्यजीत रे ने फिल्म अपराजितो का निर्माण किया । इस फिल्म में युवा अप्पू की महत्वाकांक्षा और उसे प्यार वाली एक मां की भावना को दिखाया गया है । फिल्म जब प्रदर्शित हुी तो इसे सभी ने पसंद किया लेकिन मशहूर समीक्षक मृणाल सेन और ऋतिविक घटक ने इसे पाथेर पांचाली से बेहतर माना । फिल्म वीनस फेस्टिबल में गोल्डेन लॉयन अवार्ड से सम्मानित की गयी ।

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