डिमांड बढ़ने से शहरी इलाकों में 8 घंटे तक हो सकती है बिजली कटौती

कोयला मिलने में अभी एक महीने से ज्यादा का समय लगेगा

डिमांड बढ़ने से शहरी इलाकों में 8 घंटे तक हो सकती है बिजली कटौती

बिजली उत्पादन के लिए खदानों से कोयला मिलने में अभी एक महीने से ज्यादा का समय लगेगा। कई उत्पादन इकाइयां ठप रहने और बिजली डिमांड बढ़ने से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में सात से आठ घंटे तक बिजली कटौती हो सकती है।

जयपुर। बिजली उत्पादन के लिए खदानों से कोयला मिलने में अभी एक महीने से ज्यादा का समय लगेगा। कई उत्पादन इकाइयां ठप रहने और बिजली डिमांड बढ़ने से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में सात से आठ घंटे तक बिजली कटौती हो सकती है। ऊर्जा विभाग ने कटौती की देखरेख बढ़ाने के साथ ही बड़े शहरी इलाकों में भी बिजली कटौती के निर्देश दिए हैं। ऊर्जा विभाग ने कटौती के लिए कोयला संकट के बीच डिमांड बढ़ना प्रमुख कारण माना है। छह करोड़ 69 लाख यूनिट की डिमांड यानि 31 प्रतिशत बढ़ी है। इसके मुकाबले उत्पादन घट गया है। राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम ने देश के अन्य राज्यों में भी कटौती का तर्क देते हुए कहा है कि देश में इस साल तेज गर्मी के चलते बिजली मांग गत 38 वर्षों की तुलना में सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई है।

लंबे समय से नहीं मिला शटडाउन
निगम ने वर्ष 2020-21 में 29141 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन, वर्ष 2021-22 में 34287.28 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया। कोयला संकट बावजूद वर्ष 2022 में अब तक 8889.51 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो चुका है। मांग बढ़ोतरी के बीच उत्पादन इकाइयों को लम्बे समय से शटडाउन नहीं मिल पा रहा था। इसके चलते कालीसिंध 600 मेगावाट, सूरतगढ़. 250 मेगावाट क्षमता, कोटा की 210 मेगावाट क्षमता की इकाइयों को बंद करना पड़ा। मई में इनसे उत्पादन शुरू हो सकता है।

छबड़ा में उत्पादन शुरू
छबड़ा 250 मेगावाट इकाई से उत्पादन शुरू हो गया। सूरतगढ़ सुपरक्रिटिकल की 660 मेगावाट की इकाई जून तक शुरू हो सकती है। कोल इंडिया से अभी 10.5 रेक कोयले की आपूर्ति जारी है। उत्पादन निगम की कोल आधारित इकाइयों की स्थापित क्षमता 7580 मेगावाट की इकाइयों से विद्युत उत्पादन के लिए 27 कोयले की रेक प्रतिदिन की आपूर्ति जरूरी है।

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