आमागढ़ 18 से अधिक बघेरों की है पनाहगाह

यह वन क्षेत्र विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों की पनाहगाह है

आमागढ़ 18 से अधिक बघेरों की है पनाहगाह

पर्यटक किले, स्मारक, संग्रहालय और महल देखने के साथ ही वाइल्ड लाइफ में भी अपनी रूचि दिखाने लगे हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, लॉयन सफारी, एगजोटिक पार्क, हाथी गांव, झालाना लेपर्ड रिजर्व के बाद अब जल्द ही नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन आमागढ़ में लेपर्ड सफारी के दीदार कर सकेंगे।

जयपुर। पर्यटक किले, स्मारक, संग्रहालय और महल देखने के साथ ही वाइल्ड लाइफ में भी अपनी रूचि दिखाने लगे हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, लॉयन सफारी, एगजोटिक पार्क, हाथी गांव, झालाना लेपर्ड रिजर्व के बाद अब जल्द ही नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन आमागढ़ में लेपर्ड सफारी के दीदार कर सकेंगे। 16.36 वर्ग किलोमीटर में फैला यह वन क्षेत्र विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों की पनाहगाह है। यहां बघेरा, हाइना, चांदाघाटी सहित 4 वाटर प्वाइंट बनाने के साथ ही देव और नारायण तलाई बनाई गई हैं। जलमहल और रघुनाथगढ़ प्वाइंट पर्यटकों के खास आकर्षण का केन्द्र रहेंगे। गौरतलब है कि झालाना लेपर्ड रिजर्व में तकरीबन 40 लेपर्ड का मूवमेंट बताया जाता है।

आमागढ़ बना शरणस्थली
पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए झालाना लेपर्ड सफारी एक अच्छा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। यहां बघेरों की संख्या बढ़ने लगी, तो वे टेरेटरी की तलाश करते हुए आमागढ़ की ओर आए। जानकारी के अनुसार झालाना में दिखने वाले लेपर्ड पारो, डिस्कवरी, प्रिंस, ब्लूथंडर, क्लिओपेट्रा अब आमागढ़ वन क्षेत्र में देखे गए हैं। 9 मादा और 6 मेल बघेरों सहित शावक भी वन विभाग के अनुसार इस वन क्षेत्र में 18 से अधिक बघेरों का मूवमेंट है। इनमें 9 मादा और 6 मेल बघेरों सहित शावक हैं। हाइना की संख्या भी तकरीबन 10 से अधिक बताई जा रही है। साथ ही जेकॉल, फॉक्स, हनीबेजर, नीलगाय, सांभर, खरगोश, सेही और मंगूज की भी उपस्थिति है। इसके अतिरिक्त माइग्रेटिव पक्षियों में इंडियन रोलर, गोल्डन ओरियल, पिट्टा, किंगफिशर एवं लोकल पक्षियों में सेंड गाउज, मोर, प्लाम हैडिड पैरेट सहित 200 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां हैं। जानकारी के अनुसार यहां सफारी के लिए 14 किमी का ट्रेक बनाया गया है।

सफारी के साथ देखें शहर का नजारा
आमागढ़ लेपर्ड सफारी से पर्यटक वन्यजीवों के दीदार के साथ ही जयपुर शहर के विहंगम दृश्य का नजारा भी देख सकेंगे। इसके अतिरिक्त खूबसूरत जलमहल को भी इस प्वाइंट से निहार सकेंगे। दूसरा खास प्वाइंट रघुनाथगढ़ रहेगा, जहां से पर्यटक गलता भी देख सकेंगे। इसी जगह एक खंडहरनुमा बिल्डिंग है, जिसका जीर्णोद्धार कर इसे पर्यटकों की सुविधा के लिहाज से तैयार किया जा सकता है।

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आमागढ़ लेपर्ड सफारी में 18 किमी के ट्रेक को आपस में जोड़ा गया है। यहां 17 से अधिक बघेरों की फोटो कैमरा ट्रेप में आई है।
- जनेश्वर चौधरी, क्षेत्रीय वन अधिकारी (रेंजर)

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