सपा के नीले रंग अपनाने पर भाजपा का हमला, राकेश त्रिपाठी बोले- रंग बदलने से पुराने राजनीतिक दाग नहीं मिटेंगे
प्रतीकों व रंगों के सहारे दाग मिटाने की कोशिश को भाजपा ने बताया असफल
लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) ओर से पार्टी के नेताओं और फ्रंटल संगठनों के लिए नीले रंग को प्रमुखता दिए जाने को लेकर भाजपा ने सपा पर निशाना साधा है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि सपा दलितों को लुभाने के लिए रंग बदलने का ढोंग कर रही है। उन्होंने कहा कि रंग बदलने से दामन पर लगे पुराने दाग नहीं मिटेंगे और जनता सपा की असलियत जानती है। राकेश त्रिपाठी ने कहा कि सपा शासनकाल में दलितों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए। अब सपा मुखिया नीला गमछा डालकर और अपने फ्रंटल संगठनों के लिए नीली पोशाक तय कर दलित समाज को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने सपा को ‘‘रंगा सियार’’ बताते हुए कहा कि केवल रंग बदलने से पार्टी का चरित्र नहीं बदल सकता। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सपा नेताओं ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और उनके विचारों के प्रति हमेशा असम्मानजनक रवैया अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेता आजम खान ने बाबा साहब आंबेडकर को भूमाफिया तक बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि सपा की ओर से आंबेडकर स्मारक को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।
त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा सरकार ने दलितों, वंचितों और पिछड़े वर्गों के सम्मान और अधिकारों को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया है। उन्होंने कहा कि सपा अब अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलने के लिए प्रतीकों और रंगों का सहारा ले रही है, लेकिन जनता उसके राजनीतिक इतिहास को भूली नहीं है। उन्होंने कहा कि दलित समाज को केवल दिखावे और रंगों से प्रभावित नहीं किया जा सकता। जनता सपा के शासनकाल और उसके नेताओं के बयानों को याद रखती है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।

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