जर्जर भवन में हर पल मौत का खतरा, जोखिम में कर रहे पढ़ाई

1935 से रियासतकालीन भवन में चल रहा पाटनपोल हाई स्कूल : पीडब्ल्यूडी ने सर्वे में माना असुरक्षित, स्कूल अन्यत्र शिफ्ट करने की दी हिदायत

जर्जर भवन में हर पल मौत का खतरा, जोखिम में कर रहे पढ़ाई

शहर का पाटनपोल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय 87 साल से जर्जर रियासतकालीन भवन में चल रहा है। भवन इतना जर्जर हो चुका कि पीडब्ल्यूडी ने इसे असुरक्षित घोषित कर दिया।

कोटा। शहर का पाटनपोल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय 87 साल से जर्जर रियासतकालीन भवन में चल रहा है। भवन इतना जर्जर हो चुका कि पीडब्ल्यूडी ने इसे असुरक्षित घोषित कर दिया। यहां कभी बड़ा हादसा हो सकता है। स्कूल में 130 बच्चे व स्टाफ की जान हमेशा खतरे में रहती है। स्कूल सन् 1935 से दो मंजिला रियासतकालीन भवन संचालित हो रहा है। बरसों से मरम्मत नहीं होने से भवन जर्जर होकर खंडर में तब्दील होता जा रहा है। भवन की टूटती छतों की पट्टियां, जगह- जगह से गिरता प्लाटर, तिबारियों में सीलन की दुर्गंध, दीवारों में गहरे गडढेÞ़, जंग लगे लोहे के पिल्लर पर टिकी छत कभी भी टूट सकती है। बारिश में बरसों पुरानी वायरिंग से हर समय करंट का खतरा रहता है। करीब दो शताब्दी पुराने इस भवन में  बरसों से सीनियर सैकंडरी स्कूल संचालित हो रहा यहां 130 बच्चों का नामांकन और कक्षा-कक्ष के नाम पर छोटी-छोटी 7 तिबारियां है, जिनमें बैठने की जगह तक नहीं है। पीडब्ल्यूडी ने हाल ही में सर्वे कर इस भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया। साथ ही स्कूल के प्रधानाचार्य को जर्जर भवन की मरम्मत करवाने या स्कूल को अन्य भवन में शिफ्ट करने की सख्त हिदायत दी है। उधर सरकार ने  26 जुलाई को स्कूल को हिंदी मीडियम से इंग्लिश मीडियम में बदल दिया। ऐसे असुरक्षित भवन में क्वालिटी एजुकेशन मिलना तो दूर बच्चों की जान संकट में आ गई।

तिबारियों में एग्जास नहीं, सीलन की बदबू से परेशान
यहां 10 फीट लंबी और 8 फीट चौड़ी तिबारी में एक साथ 10वीं-11वीं की कक्षाएं चलती है। दोनों कक्षाओं को मिलाकर करीब 20 स्टूडेंट्स हैं। एक बैंच पर तीन बच्चों को बिठाया जाता है। स्कूल तो इंग्लिश मीडियम है लेकिन पढ़ाई हिन्दी मीडियम में हो रही है। वहीं, खिड़कियां व रोशनदान नहीं होने से सीलनभरी दीवारों से उठती दुर्गंध से बच्चों व शिक्षकों का बुरा हाल है।

एक साथ 5 कक्षाएं, खतरे में बच्चों की जान
कक्षा-कक्ष नाम की कोई जगह नहीं है। यहां छोटी-छोटी तिबारियां है, जिनमें 11वीं तक की क्लासें चलती हैं। 16 फीट लंबी और 8 फीट चौड़ी तिबारी में 1 से 5वीं तक की कक्षाएं एक साथ लगती है, जबकि बच्चों की संख्या 35 है। इस जगह में एक साथ इतने बच्चों को बिठाना संभव नहीं है। वहीं, दीवारों पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। छतों की पट्टियां बीच-बीच में से तड़क रही है।

कभी भी हो सकता हादसा
पिछले सप्ताह पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने पाटनपोल स्कूल का सर्वे किया था। बिल्डिंग के एक-एक हिस्से की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करवाई। जिसकी तीन दिन पहले ही सर्वे रिपोर्ट यूसीईई आॅफिसर व शाला प्रधान को सौंप भवन को असुरक्षित घोषित किया। अधिकारियों ने रिपोर्ट में बताया कि यह भवन स्कूल चलाने लायक नहीं है। रियासतकालीन भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। छतों की पट्टियां टूटी हुई है। दीवारों में गहरे गडढेÞ हो रहे हैं। बरसात में कभी भी हादसा हो सकता है।

ऊपरी मंजिल पर दो आंगनबाड़ी, सांप का खतरा
स्कूल की दूसरी मंजिल पर क्षतिग्रस्त तिबारियां हैं। जिनमें दो आंगनबाड़ी चलती है। ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां है, जिसके पत्थर हिल रहे हैं। दोनों आंगनबाड़ी को मिलाकर 15 से 18 बच्चे हैं। बारिश में दीवारें ढहने का खतरा है। तिबारियों में एक फीट तक पानी भर जाता है। छतों की पट्टियां व छज्जे टूटे हैं। दीवारों में सीलन व गडढ़े हो रहे, जिन्हें पोस्टरों से ढका है। आंगनबाड़ी कार्यकताओं ने बताया कि यहां कई बार सांप आ चुके हैं। जिन्हें भगाने पर वे दीवारों में हो रहे गडढ़ों में छिप जाते हैं। यहां हर पल जान का जोखिम रहता है।

विज्ञान-एबीएल किट व लाइब्रेरी नहीं
कक्षा 6 से 10वीं के छात्रों को साइंस के टॉपिक चित्रों व उपकरणों के माध्यम से पढ़ाने व समझाने के लिए विज्ञान किट अनिवार्य है। समग्र शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को यह किट उपलब्ध कराने के दावे किए। लेकिन, शहर के कई स्कूलों में यह किट नहीं है। इसी तरह प्राइमरी बच्चों को बेहतर बुनियादी शिक्षा देने के लिए एबीएल किट दिया जाता है, जो इस यहां नहीं मिला। इस किट में नंबर, अक्षर व एबीसीडी के खिलौने होते हैं, जिन्हें दिखाकर बच्चों को आखर ज्ञान दिया जाता है।

कक्षा-कक्षों में सीलन, टपकी छतें
दादाबाड़ी स्कूल में कक्षा-कक्ष क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। बरसात में छतें टपक रही है। दीवारों में सीलन है। बच्चों को बिठाने के लिए पर्याप्त क्लासरूम नहीं है। ऐसे में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ा पड़ा है।

तिरपाल से ढकी लैब
स्कूल में सीनियर सैकंडरी है। यहां 12वीं विज्ञान के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी लैब है। फिजिक्स लैब की छतें टपक रही है। ऐसे में वहां रखे उपकरणों को तिरपाल से ढक रखा है। वहीं, परखनली, जार, स्लाइड सहित अन्य उपकरणों का उपयोग नहीं होने से धूल खा रहे हैं।

1935 से चल रहा स्कूल
 यह स्कूल सन 1935 से चल रहा है। जबकि, बिल्डिंग इससे भी कई वर्षों पुरानी है। हाल ही में पीडब्ल्यूडी ने जर्जर स्कूल भवन का सर्वे कर जांच रिपोर्ट में स्कूल भवन को असुरक्षित घोषित किया है। हमने यूसीईईओ, बीसीईईओ, डीईओ सहित ज्वाइंट डायरेक्टर को लिखित में सूचना देकर मार्गदर्शन मांगा है। वहां से मिले निदेर्शों के अनुसार काम करेंगे।
-मंदाकिनी शर्मा, प्रिंसिपल पाटनपोल उ. मा.विद्यालय

बारिश के मौसम में हादसे की आंशका
 पाटनपोल स्कूल का भवन जर्जर अवस्था में है, बारिश के दिनों में हादसे की आशंका रहती है। इसकी सूचना मिली है, जल्द ही इस संबंध में निर्णय लेकर स्कूल को अन्य भवन में शिफ्ट करने की वैकल्पिक व्यवस्था करेंगे, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। साथ ही इंग्लिश मीडियम की सुविधाएं विकसित की जाएगी ताकि सरकार का उद्देश्य सफल हो सके।
-प्रदीप चौधरी, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक

जमीन के लिए नहीं करते कोशिश
 रमसा द्वारा शहर में कई जगह नए विद्यालय भवन बनाए जा रहे हैं। सरकार स्कूलों में बेहतर सुविधाएं दे रही है। असल में समस्या, शाला प्रधानों में दृढ़ इच्छा शक्ति का अभाव है। जिनके पास खुद का भवन नहीं है, वहां के प्रिसिंपल जमीन अलॉटमेंट के लिए प्रयास ही नहीं करते। वे यूआईटी, नगर निगम, शिक्षा विभाग व जिला कलक्टर के पास तक नहीं जाते। केवल, उच्चाधिकारियों के नाम पत्र लिखते हैं। सरकारी काम व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत होते हैं। स्कूल की जमीन प्रिंसिपल के नाम ही अलॉट होती है, उन्हें बच्चों के भविष्य के लिए थोड़ी तो मेहनत करनी ही चाहिए। जमीन अलॉटमेंट पत्र मिलते ही हम बजट व भवन निर्माण स्वीकृति के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे और स्वीकृति मिलते ही नया विद्यालय भवन बनवाने के लिए काम शुरू करवा देंगे। 
-शंभूदयाल गुप्ता, सहायक अभियंता रमसा कोटा

असुरक्षित है भवन
 सप्ताहभर पहले ही पाटनपोल स्कूल का सर्वे किया था। दो मंजिला भवन का निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट प्रधानाचार्य को सौंपी है। यह रियासतकालीन भवन पूरी तरह से जर्जर है। दीवारों में गहरे गड्ढेÞ व छतों की पट्टियां टूटी है। यह भवन स्कूल के लिए पूरी तरह से असुरक्षित है। रिपोर्ट के माध्यम से प्रधानाचार्य को चेताया कि वे या तो भवन की मरम्मत करवाएं या विद्यालय को अन्य भवन में शिफ्ट करें। बरसात में कभी भी हादसा हो सकता है।
-सीपी अग्रवाल, एईएन पीडब्ल्यूडी

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