मलखंभ में कोटा की बेटियां दिखा रही दम

खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान, अब प्रोत्साहन की दरकार

मलखंभ में कोटा की बेटियां दिखा रही दम

कोटा में आठ साल पहले रोपा गया मलखंभ का पौधा आज वटवृक्ष बन गया है। इस खेल में कोटा की बेटियां भी हाथ आजमा कर सफलता का परचम लहरा रही हैं। अब तक यहां की बेटियां मलखंभ में अपनी प्रतिभा के दम पर राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी हैं।

कोटा। प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती है, यदि सही समय पर सही मुकाम मिले तो खेल कोई भी हो सफलता जरूर मिलती है। ऐसा ही एक खेल है मलखंब। कोटा में आठ साल पहले रोपा गया मलखंभ का पौधा आज वटवृक्ष बन गया है। इस खेल में कोटा की बेटियां भी हाथ आजमा कर सफलता का परचम लहरा रही हैं। अब तक यहां की बेटियां मलखंभ में अपनी प्रतिभा के दम पर राज्य व राष्टÑीय स्तर पर पहचान बना चुकी हैं। कोटा शहर में छावनी स्थित श्री हरदोल मल्लखंब अकेडमी बेटियों को राज्य व राष्टÑीय स्तर पर खेलने के लिए तैयार कर रही हैं। यह व्यायामशाला महाभारत काल से चले आ रहे इस खेल को पुनर्जीवित करने में जुटी हुई है। इसमें कई लोगों का सहयोग भी मिल रहा है। राष्ट्रीय मल्लखंब कोच गोपाल सिसोदिया ने बताया कि आठ साल पहले कोटा में इस खेल की शुरुआत की गई थी। उसके बाद सुविधाओं की कमी के बावजूद खेल को उच्च स्तर पर ले जाने का निरन्तर प्रयास किया गया। इस कार्य में भूपेंद्र प्रजापति, लोकेश गुज्जर और भामाशाह ईश्वरलाल सैनी का भी निरन्तर सहयोग बना हुआ है।

सुविधाएं नहीं मिली फिर भी लहराया परचम
छावनी स्थित श्री हरदोल मल्लखंब अकेडमी में इस खेल के लिए पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है। इसके बावजूद कोटा की बेटियां सफलता के झंडे लहरा रही है। गत दिनों पंचकुला हरियाण में खेलो इंडिया खेलो प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसमें कोटा टीम बेस्ट आठ में जगह बनाने में सफल रही थी। प्रतियोगिता में सुनीता शाक्य और मृणाली प्रजापति खेल कर आई  थी। यदि अच्छी सुविधा उपलब्ध होती तो यह गोल्ड मैडल के साथ कोटा आती। कई बालिकाएं बिना आधुनिक सुविधाओं के राष्ट्रीय स्तर पर 4 स्वर्ण पदक, 10 रजत पदक व 1 कांस्य पदक प्राप्त कर चुकी हैं। यदि शहर के अन्य भामाशाह भी इनके सहयोग के लिए आगे आएं तो यह ओलंपिक तक जा सकती हैं। 

इन बेटियों को मिले पदक
खिलाड़ी कीर्ति शाक्य, मृणाली प्रजापति, पूर्वाहिनी योगी व कनक प्रजापति स्वर्ण पदक, हेम कंवर, सुनीता शाक्य, रोशनी सुमन, ऋषिका नागर, खुशबू नागर, दीपिका सुमन, कशिश प्रजापति, रौनक राठौर, इशिका नागर,  शगुन कंवर रजत पदक और रौनक राठौर कांस्य पदक व्यक्तिगत मैडल जीत कर कोटा का नाम रोशन कर चुकी हैं।

इनका कहना है......
मलखंभ खेल के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाओं की कमी खल रही है।  इसके बावजूद हमारा प्रयास होता है कि कम सुविधा के बावजूद खेल में बेहतर प्रयास किया जाए। वह राष्टÑीय स्तर पर खेल में रजत पदक ले चुकी हैं। अब वह स्वर्ण पदक लाकर कोटा का नाम रोशन करना चाहती है।
- खुशी नागर, खिलाड़ी

मलखंभ पुराना खेल है, इसके बावजूद इस खेल के विकास के लिए कभी प्रयास नहीं किया गया। अन्य खेलों की तरह ही इस खेल को भी प्रोत्साहन की जरूरत है। राज्य व राष्टÑीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसलिए सुविधाएं मिलने पर प्रतियोगिता में और बेहतर प्रदर्शन हो सकता है।
-किरण मीणा, खिलाड़ी

कोटा की बालिकाओं में बहुत टेलेंट है और इन्होंने कई बार पूरे भारत को अपने टैलेंट का मुरीद बनाया है। फिर भी जो अन्तरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी होती है वो हम नही कर पाते है। इस खेल को भी सरकारी प्रोत्साहन की दरकार है। यदि सरकार के स्तर पर मदद मिल जाए तो मलखंभ में कोटा का नाम खेल दूनिया में छा जाएगा।
-गोपाल सिसोदिया राष्ट्रीय कोच मल्लखंब

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