आजादी के लिए किसी ने अज्ञातवास भुगता तो कोई अविवाहित रहा

स्वतंत्रता सेनानी मोतीलाल जैन ने संभाली थी हाड़ौती के आंदोलन की कमान

आजादी के लिए किसी ने अज्ञातवास भुगता तो कोई अविवाहित रहा

आजादी के स्वतंत्रता संग्राम में बारां क्षेत्र भी पीछे नहीं रहा। यहां के स्वतंत्रता सेनानी कंधे से कंधा मिलाकर लड़े थे। इनमें प्रमुख शख्सियतों में स्व. मोतीलाल जैन, पंडित अभिन्न हरि शर्मा ,गोपाललाल भंडारी,गणपतलाल शर्मा सहित अनेक लोगों ने आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया।

नाहरगढ़। आजादी के स्वतंत्रता संग्राम में बारां क्षेत्र भी पीछे नहीं रहा। यहां के स्वतंत्रता सेनानी कंधे से कंधा मिलाकर लड़े थे। इनमें प्रमुख शख्सियतों में स्व. मोतीलाल जैन, पंडित अभिन्न हरि शर्मा ,गोपाललाल भंडारी,गणपतलाल शर्मा सहित अनेक लोगों ने आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया। आजादी के लिए एक स्वतंत्रता सेनानी ने विवाह नहीं किया तो दूसरे ने अज्ञातवास भुगता। नाहरगढ़ निवासी इतिहासविद् हंसराज नागर बताते हैं कि पंडित नयनुराम शर्मा के सम्पर्क में आने से इस क्षेत्र के सेनानी प्रजामण्डल से जुड़े और किसान आन्दोलन सहित अनेक आंदोलनों में प्रजामण्डल के बैनर तले भाग लिया। इनमें से इनको कई बार जेल जाना पड़ा । जेल की परवाह नहीं करते हुए महात्मा गांधी के आह्वान पर सत्याग्रह आंदोलनों में भाग लिया । वहीं 1955 को गोवा को आजाद कराने के लिए 42 लोगों का जत्था हाड़ौती से गया था । गांधी टोपी उतारने से मना करने पर पंडित अभिन्न हरि शर्मा को जाना पड़ा गुगोर जेल पंडित अभिन्न हरि का जन्म मांगरोल के पास सीधन्या गांव में 27 सितंबर1905 को हुआ था । इनके बचपन का नाम बद्रीलाल था । अटरू निवासी पंडित मनुहरि शर्मा बताते हैं कि बचपन से ही उनके पिता में देशभक्ति का जज्बा था । 1934 से स्वाधीनता आन्दोलन में भाग लेना शुरू किया और पंडित नयनुराम शर्मा के साथ मिलकर हाड़ौती प्रजामंडल की स्थापना की । 1938 में कोटा राज्य प्रजामंडल के सदस्य बने और 1941 में कोटा राज्य प्रजामंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया 1942 में राष्टÑव्यापी अगस्त क्रांति में कोटा मंडल से महत्वपूर्ण भुमिका अदा की । 1942 के ग्वालियर में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में भाग लेने वाले कोटा के एक मात्र प्रतिनिधि थे। छबड़ा स्टेशन पर गांधी टोपी को उतारने से मना करने पर इनको तीन दिनों तक गुगोर हवालात में रखा । इन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा गठित फ ारर्वड ब्लॉक संगठन में काम किया । 18अप्रेल 1948 को तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित नेहरू ने राजस्थान के मंत्रिमंडल में सूचना तथा वन विभाग का मंत्री बनाया था। आजादी के लिए गणपतलाल शर्मा ने विवाह नहीं किया गणपतलाल शर्मा का जन्म 1917 में बांरा में हुआ था । इनके परिवार के सदस्य रघुवीर प्रसाद नन्दवाना बताते हैं कि 1932 में अंता से मिडिल तक की शिक्षा प्राप्त की और कम उम्र में ही प्रजामंडल में भर्ती होने के लिए घर से निकल गए 1933 से 1936 तक प्रजामंडल में सक्रिय भुमिका निभाई । प्रजामंडल की गतिविधियों में भाग लेने के कारण मामा ने घर से निकाल दिया । विदेशी कपड़ों की दूकानें व शराब की दुकानों की पिकेंटिग करते समय अन्य नेताओं के साथ इनको भी मार खानी पड़ी और गिरफ्तारी में बहुत सारी यातनायें सहनी पड़ी। विवाह को आजादी की लड़ाई में बाधक माना और विवाह नहीं किया । और देश की आजादी के लिए आंदोलनों में भाग लेते रहे । अगस्त क्रांति आंदोलन में उड़ीसा में अज्ञातवास भुगता था गोपाललाल भंडारी ने गोपाललाल भंडारी के पौत्र सतीश गौतम बताते हैं कि उनके दादाजी का जन्म संवत् 1962 में अंता में हुआ था । इनको गुजराती,उर्दु,संस्कृत तथा अंग्रेजी भाषा का ज्ञान था । यह कोटा प्रजामंडल के सक्रिय सदस्य थे और बाद में कांग्रेस से जुड़ गए। इन्होंने अभिन्न हरि,भैरूलाल काला बादल सहित अनेक सेनानियों के साथ काम किया। मांगरोल किसान सम्मेलन में भाग लिया तथा स्वाधिनता के खातिर अनेक यातनाएं सही अगस्त क्रांति आंदोलन में इन्होंने उड़ीसा में अज्ञातवास में समय बिताया । आजादी के बाद अंता के प्रथम सरपंच होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । कोटा कोतवाली के सामने प्रदर्शन करते जेल गए थे मोतीलाल जैन मोतीलाल जैन का जन्म 5 दिसंबर 1908 को जोधपुर में हुआ था। मांगरोल के सेठ धनराज के यहां मोतीलाल गोद आए थे । मांगरोल नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन अशोक जैन बताते हैं कि उनके पिता 1938 में कोटा राज्य प्रजामंडल का सदस्य मनोनित किया था । इसमें पंडित नयनुराम शर्मा का विशेष योगदान रहा। 1942 में इनको कोटा राज्य प्रजामंडल का अध्यक्ष चुना गया था ।1939 में हुए मांगरोल अधिवेशन में यह स्वयं स्वागत कर्ता थे। इनको सेठ साहब के उपनाम से पुकारा जाता था। अगस्त क्रांति के तहत 13 अगस्त तक जोरदार प्रदर्शनों का सिलसिला चलता रहा । 14 अगस्त का प्रदर्शन स्थगित करने का अधिकारियों ने अनुरोध किया लेकिन लोग नहीं माने कोटा में 14 से 16 अगस्त तिरंगा फ हराया गया और जनता का राज कायम रहा। 24अगस्त को कोटा कोतवाली के सामने प्रदर्शन कर कानुन तोड़ने का सत्याग्रह किया और प्रथम सत्याग्रही बने 1942 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए।

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