खतरे के बावजूद

खतरे के बावजूद

कोरोना के खतरे के बीच आम लोगों में लापरवाही देखी जा रही है।

दिवाली जैसे महापर्व की शुरूआत हो चुकी है। बाजारों में जमकर खरीदारी हो रही है और भीड़भाड़ काफी बढ़ गई है। लेकिन इस बीच कोरोना के खतरे के बीच आम लोगों में लापरवाही देखी जा रही है। ऐसा इसके बावजूद हो रहा है कि कोरोना महामारी का खतरा अभी बराबर बना हुआ है। यह सही है कि अधिकांश राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में काफी लोगों को टीके भी लगाए जा चुके हैं। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ समय के अंतराल के बाद कोरोना वायरस के नए स्वरूप के आने और उसके फैलने की खबरें भी लगातार सामने आ रही हैं। कोरोना वायरस और संक्रमण की प्रकृति को देखते हुए अभी यह मान लेना शायद यह एक बड़ी भूल होगी कि कोरोना का खतरा टल गया है। अभी भी खतरा बना हुआ है और हर स्तर पर सावधानी बरत कर इससे बचा जा सकता है। हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में बताया गया है कि लगभग सभी राज्यों में लोग आवश्यक बचाव के नियमों को लेकर लापरवाह बने हुए हैं। लोग मास्क लगाने व आपस में दूरी बना कर रहने के नियमों की पालना को जरूरी नहीं समझ रहे हैं। जबकि इन दिनों बाजारों, यातायात वाहनों व रेलों में भीड़ काफी बढ़ रही है। कुछ राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में घट-बढ़ की खबरें भी आने लगी हैं। कई राज्यों में लोग अभी भी लोग टीका लगवाने से बच रहे हैं। जबकि फिलहाल टीका ही आपातकालीन बचाव का उपाय मात्र है। कोरोना संक्रमण से बचाव का अभी तक कोई पुख्ता इलाज व दवा नहीं बनी है। अभी उत्तर भारत के कई राज्यों में डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियां सरकारों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। अस्पतालों में जगह कम पड़ रही है। इस बीच यदि दीपावली के बाद कोरोना संक्रमण के मामले अचानक सामने आते हैं तो स्थिति विकट होना निश्चित है। सवाल है कि लोगों की लापरवाही की वजह कोरोना वायरस का कोई नया स्वरूप फिर फैलता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? कोरोना की दूसरी लहर के दौरान की भयावहता को शायद सरकारों व लोगों ने भूला दिया है। कोई सबक नहीं लिया है। बार-बार चिकित्सा विशेषज्ञ चेता रहे हैं इस जान लेवा रोग का कोई इलाज नहीं है और लोगों को पूर्ण सावधानी बरत कर ही चलना होगा। कोरोना से बचाव का बेहतर उपाय सावधानी ही होगा।

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