मध्य यूरोप के प्रवासी परिंदों को भी रास आई बून्दी की आबोहवा

सर्दी के साथ जिले के जलाशयों पर बढ़ी विदेशी पक्षियों की तादात

मध्य यूरोप के प्रवासी परिंदों को भी रास आई बून्दी की आबोहवा

जिले के प्रमुख वेटलैंड तालेड़ा क्षेत्र के बरधा बांध, बून्दी की जैतसगर झील, गुढ़ानाथावतान क्षेत्र में भीमलत-अभयपुरा बांध, रामनगर वेटलैंड, हिंडोली के रामसागर,गुढ़ा बांध, दुगारी के कनक सागर सहित मेज, कुरेल, व चम्बल नदियों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों की जलक्रीड़ा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

बून्दी। प्रकृति की अनुपम छटा के बीच बसें छोटी काशी में सर्दी की दस्तक के साथ ही जलस्रोतों पर  देशी-विदेशी पक्षियों की तादात  बढ़ने लगी हैं। इस साल अच्छे मानसून के चलते परिंदों के कलरव से जिले के सभी जलाशयों पर रौनक लौट आई है। हजारों किलोमीटर सुदूर यात्राएं कर मध्य यूरोप व हिमालयन क्षेत्र से विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी बून्दी पहुंच चुके हैं। यहां जलाशयों पर बड़े आकार के पेलिकन सहित अन्य प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा लगा हुआ है। जिले के प्रमुख वेटलैंड तालेड़ा क्षेत्र के बरधा बांध, बून्दी की जैतसगर झील, गुढ़ानाथावतान क्षेत्र में भीमलत-अभयपुरा बांध, रामनगर वेटलैंड, हिंडोली के रामसागर,गुढ़ा बांध, दुगारी के कनक सागर सहित मेज, कुरेल, व चम्बल नदियों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों की जलक्रीड़ा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

गुढ़ा बांध व कनक सागर में इंडियन स्किम्मर व रामनगर में कुरजां का इंतजार
जिले के गुढ़ा बांध व कनक सागर दुगारी में हर साल दुर्लभ इंडियन स्किम्मर पक्षी आते है। अभी तक जिले में इन पक्षियों की साइटिंग नहीं हुई है।  जिले के  प्रमुख वेटलैंड रामनगर तालाब पर भी हर साल आने वाले कुरजां पक्षी भी अभी तक नहीं आए है। वर्तमान में जिले के जलाशयों पर पेलिकन, बार हेडेड गूज, ग्रे लेग गूज, सुरखाब, कोमन पोचार्ड, लाल सर पोचार्ड, यूरोपियन पिनटेल, नोर्थन शोवलर आदि प्रवासी परिंदे बड़ी संख्या में पंहुचे है । बरधा बांध में सारस पक्षियों की उपस्थिति लंबे समय से बनी हुई है जो पर्यावरण व पक्षी प्रेमियों के लिए खुशी का विषय है।

बून्दी में बर्ड वाचिंग की हैं प्रबल संभावनाएं
बून्दी में बर्ड वाचिंग के क्षेत्र में ईको टूरिज्म की विपुल संभावनाएं हैं। जिले के बरधा, व अभयपुरा बांधों व रामसागर झील को मत्स्य ठेके से मुक्त कर पक्षी संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
- पृथ्वी सिंह राजावत, पक्षी विशेषज्ञ, बून्दी

अरावली की गोद में बसा बूंदी जिला जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत धनी है। सघन पर्णपाती वनों एवं आर्द्र  भूमियों से युक्त बूंदी जिले की भौगोलिक दशाएं न केवल स्थानीय अपितु प्रवासी पक्षियों हेतु भी आदर्श शरणस्थलीयों का निर्माण करती है। बूंदी जिला शीतकाल में लगभग 200 से अधिक प्रजातियों के स्थानीय व प्रवासी पक्षियों का निवास स्थान रहता है। यहां के प्राकृतिक जल स्रोत व बांध प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग है।
- डॉ भारतेंदु गौतम ,वन्यजीव प्रेमी व असिस्टेंट प्रोफे. भूगोल, राजकीय महाविद्यालय बून्दी

 

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