वेस्ट डी कम्पोजर से किसानों की आमदनी बढेगी, फसलों की भी करेगा सुरक्षा

किसानों का रसायनों पर होने वाला खर्च कम होगा

वेस्ट डी कम्पोजर से किसानों की आमदनी बढेगी, फसलों की भी करेगा सुरक्षा

जैविक खेती एक सदाबहार कृषि पद्धति है,जो रसायनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार कम से कम करते हुए किसानों के लिए कम लागत से दीर्घकालीन,स्थिर व अच्छी गुणवत्ता वाली पारम्परिक पद्धति है। वेस्ट डीकम्पोजर फसलों की कीट व बिमारियों से सुरक्षा करेगा तथा हर प्रकार से पोषण प्रदान करेगा। इससे किसानों का रसायनों पर होने वाला खर्च कम होगा व आमदनी बढेगी और साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

जजावर। जैविक खेती एक सदाबहार कृषि पद्धति है,जो रसायनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार कम से कम करते हुए किसानों के लिए कम लागत से दीर्घकालीन,स्थिर व अच्छी गुणवत्ता वाली पारम्परिक पद्धति है। वेस्ट डीकम्पोजर  फसलोेंं की कीट व बिमारियों से सुरक्षा करेगा तथा हर प्रकार से पोषण प्रदान करेगा। इससे किसानों का रसायनों पर होने वाला खर्च कम होगा व आमदनी बढेगी और साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। कृषि में रासायनिक उर्वरक, खरपतवार नाशी,कीटनाशी व रोगनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की विषाक्तता बढ़ गई जिससे बहूत से लाभदायक जीवाणु मर गए तथा भूमि अनुपजाऊ होती गई और अब वह समय दूर नहीं है। अगर कृषि रसायनों पर पाबन्दी नहीं लगाई गई या इनका उपयोग कम नहीं किया गया तो सम्पूर्ण भूमि बंजर हो जाएगी या अपनी उत्पादन क्षमता खो देगी।

मानव के स्वास्थ्य पर दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन के कारण भारी प्रभाव पड़ रहा है। बहूत सी बीमारियों को इंसानों ने खुद न्योता दिया है। इनके उपयोग से तथा पशुओं को दूषित चारा खिलाने इनके दूध उत्पादन में कमी के साथ बांझपन जैसी समस्या आ रही है। ये ऐसी समस्याएं है जो और भी गंभीर होती जा रही है ऐसी स्थिति में एक सवाल उभरता है की क्या इन समस्याओ से निजात पाने का कोई तरीका है जैविक खेती के माध्यम से,जैविक खेती एक बड़ा ही अच्छा विकल्प है जो भूमि स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य तथा मानव स्वास्थ्य को सुधारता है बिना पर्यावरण स्वास्थ्य को बिगाड़े, जैविक खेती के साथ कार्बनिक उत्पाद महंगे बिकने की वजह से किसानों की आर्थिक दशा सुधरती है।

वेस्ट डीकम्पोजर क्या है
वेस्ट डीकम्पोजर देसी गाय के गोबर से निकला गया सूक्ष्म जीवों का संघ है जिसमे सभी प्रकार के कार्बनिक पदार्थों के अपघटक सूक्ष्म जीव सम्मिलित होते है। इसकी 30 ग्राम की बोतल होती है व कीमत 20 रुपए प्रति बोतल है जिसे राष्टÑीय जैविक खेती केंद्र से सीधे या किसी क्षेत्रीय जैविक खेती केंद्र से आसानी प्राप्त किया जा सकता है। अपशिष्ट डीकम्पोजर को भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा भी मान्य किया गया है। डीकंपोजर घोल बनाने की विधि बहुत सरल है जिसको किसान अपने खेत पर आसानी से तैयार कर सकता है जो की बहुत कम लागत में तैयार हो जाता है।

क्या है लाभ
वेस्ट डीकंपोजर से बीजोपचार करके 98 प्रतिशत जल्दी और समान अंकुरण होता है और उगने से पहले रोग व बीमारियों से भी बीजों को सुरक्षा प्रदान करता है।
वेस्ट डीकंपोजर घोल का सिंचाई जल के साथ उपयोग करने से सिर्फ 21 दिनों के भीतर ही सभी प्रकार की मिट्टी,अम्लीय और क्षारीय के जैविक और भौतिक गुणों को परिवर्तित कर सुधार हो जाता है यह सिर्फ  छह महीने में ही एक एकड़ भूमि में 4 लाख तक केंचुओं की आबादी उत्पन्न करने में मदद करता है।

वेस्ट डीकम्पोजर के घोल को गोबर खाद,सड़ी गली पतियों,टहनियों,सुखा चारा आदि पर स्प्रे करने से इनका विघटन जल्दी होना शुरू हो जाता है। तीन माह बाद बनने वाला देसी खाद खेतों में उपयोग करने लायक हो जाता है।
नरेंद्र जैन, कृषि पर्यवेक्षक, जजावर





 

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