महिलाओं के प्रति अपराध रोकने की गारंटी कोई नहीं दे पाया

बारह चुनावी उम्मीदवारों से की नवज्योति ने बातचीत

महिलाओं के प्रति अपराध रोकने की गारंटी कोई नहीं दे पाया

महिलाओं के प्रति हिंसा और अपराध के मामलों में दुनिया भर में भारत का स्थान 126 वें स्थान पर आता है।

कोटा। महिलाओं की संख्या कुल आबादी की लगभग आधी है। इसका मतलब लोकतंत्र के विकास में भी वे आधी भागीदार है। इसके बावजूद उनके प्रति हिंसात्मक घटनाओं का होना हमारी संस्कृति को शर्मसार करता है।  देश भर में महिलाओं के प्रति अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। जब आधी आबादी चुनाव में राजनेताओं के लिए मतदान करती है तो जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाएं। ऐसे में नवज्योति ने यह जानना चाहा कि विधान सभा चुनाव में  प्रत्याशी अगर जन प्रतिनिधि बनते हैं तो क्या वह अपने विधानसभा क्षेत्र की महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी देंगे।  यदि गारंटी देते हैं तो किस तरह वह महिला अत्याचार को रोकने की पहल करेंगे। नवज्योति की इस सिरीज में हाडौती के चार जिलों से चुनाव लड़ रहे भाजपा और कांग्रेस के 12  प्रत्याशियों से इस मुद्दे पर हमने बात की, लेकिन विडंबना है कि कोई भी प्रत्याशी केवल और केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र तक में भी महिला सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पाया। उनसे विधानसभा क्षेत्र की महिलाओं के प्रति गारंटी मांगी गई थी लेकिन उन्होंने फौरी बातें कर केवल मदद करने तक अपने को सीमित कर लिया। कोई भी इस विषय पर गंभीरता से यह नहीं कह पाया कि मेरे क्षेत्र में महिलाओं के प्रति अपराध बंद करवाने की मैं गारंटी लेता हूं। जब कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां चुनाव प्रचार में महिलाओं के प्रति अपराधों का तो गुणगान करते रहे लेकिन अपराध रोक पाने  की गारंटी नहीं दे रहे। 

महिला सुरक्षा में भारत 126 वें पायदान पर, नार्वे पहले स्थान पर
महिलाओं के प्रति हिंसा और अपराध के मामलों में दुनिया भर में भारत का स्थान 126 वें स्थान पर आता है। जब कि हमसे काफी छोटा देश  नार्वे पहले स्थान पर है। विश्व में नार्वे, फिन लेन्ड, आइस लेन्ड, डेन्मार्क, लक्समबर्ग, स्विटरलेन्ड, स्वीडन, आॅस्ट्रिया नीदरलेन्ड जैसे देश महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित देश माने जाते हैं। इन देशों में कभी कभार ही ऐसी कोई घटना होती है। जब यह देश महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं तो फिर भारत देश में हालात खराब क्यों? यह एक बड़ा सवाल उभर कर आता है। 

नहीं दे पाए अपने क्षेत्र में महिला सुरक्षा की गारंटी
नवज्योति ने विधानसभा चुनाव में हाड़ौती से चुनाव लड़ रहे भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के 12 प्रत्याशियों से  महिलाओं को अपने क्षेत्र में सुरक्षित रखने संबंधी सवाल किया था लेकिन वह कोई गारंटी नहीं दे पाए।  दोनों दलों के विधायकों के पास महिला अपराधों को रोकने का कोई मजबूत विकल्प फिलहाल दिखता नहीं है। इस  लिहाज से महिला अपराधों की स्थिति में बदलाव की उम्मीद कम है।

इसलिए जरूरी है महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी
हमारे यहां कहा जाता है यत्र नारियस्तु पूज्यन्ते, तत्र रमन्ते देवता। अर्थात जहां जहां नारी का सम्मान होता है। वहां देवता निवास करते है, सुख समृद्धि बनी रहती है। महिला अपने आप में उन्नति का नाम होती है। यदि वह सुरक्षित और निर्विघ्न रहे, उसे किसी का डर नहीं हो तो वह शारीरिक, सामाजिक, मानसिक, आर्थिक रुप से मजबूत होगी। वह ना केवल परिवार अपितु देश की उन्नति में भी अपनी मजबूत भागीदारी निभा सकती है। यदि महिला बिना किसी डर के घर से निकलेगी तो वह शिक्षित होगी, मानसिक और आर्थिक रूप से अपने आपको मजबूत बनाएगी। फिर वह कहने को नहीं बल्कि वास्तव में कंधे से कंधा मिलाकर आसमान की ऊंचाइयों पर उड़ान भरेगी। 

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कोटा डिवीजन में अपराध का स्थिति
पुलिस से मिले आंकड़ो के अनुसार कोटा डिवीजन में महिलाओं के प्रति अपराध की स्थिति का आकलन करें तो वर्ष 2021 में 3911 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2022 में यह बढ़ कर 4061 पर पहुंच गए। वर्ष 2023 में  जनवरी से अक्टूबर माह तक दस माह में ही 4085 मामले दर्ज हो गए। 

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