घटिया सिस्टम से जी का जंजाल बना सेमेस्टर

सरकार खुद ही उड़ा रही राष्ट्रीय शिक्षा नीति की धज्जियां: स्किल तो बढ़ी नहीं, पैसा हो रहा अनावश्यक खर्च

घटिया सिस्टम से जी का जंजाल बना सेमेस्टर

दैनिक नवज्योति ने शिक्षकों, विद्यार्थियों व अभिभावकों से सेमेस्टर स्कीम से बच्चों की शिक्षा में इम्पू्रमेंट को लेकर चर्चा की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।

कोटा। उच्च शिक्षा में जिस उद्देश्य के साथ राष्टÑीय शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई वो सरकारी मशीनरी की लचरता से पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा। विद्यार्थियों के सर्वागिण विकास की मंशा से न्यू एजुकेशन पॉलीसी लागू की गई, जो कॉलेज आयुक्तालय की लापरवाही के भंवर में ऐसी फंसी जिसके एक साल बाद भी सकारात्मक परिणाम नजर नहीं आए। हालात यह हैं, राजकीय  महाविद्यालयों में पढ़ाने को शिक्षक नहीं है तो यहां विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन कैसे मिलेगी। वहीं, राजसेस से संचालित कॉलेज 6 बाद सूने हो जाएंगे। ऐसे में सैकंड सेमेस्टर और स्टूडेंट्स मझधार में फंस जाएंगे। जबकि, एडमिशन से लेकर एग्जाम तक की फीस चुका रहा है। इसके बावजूद उन्हें न पढ़ाने वाला मिल रहा और न ही प्रैक्टिकल करवाने वाला? दरअसल, कोटा यूनिवर्सिटी ने सभी राजकीय महाविद्यालयों में पिछले वर्ष से पीजी में सेमेस्टर प्रणाली लागू की थी। उस वक्त शैक्षणिक स्तर में सुधार के दावे किए गए थे, यह प्रणाली जरूर छात्र हित में है लेकिन मानव संसाधनों के अभाव से सेमेस्टर स्कीम विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए जी-का जंजाल बनकर रह गया। दैनिक नवज्योति ने शिक्षकों, विद्यार्थियों व अभिभावकों से सेमेस्टर स्कीम से बच्चों की शिक्षा में इम्पू्रमेंट को लेकर चर्चा की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। पेश है रिपोर्ट के खास अंश... 

क्वालिटी एजुकेशन तो दूर पास होना भी मुश्किल
संभाग के राजकीय महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा का स्तर बदहाल है।  कोटा-बूंदी, बारां, झालावाड़ में कुल 47 राजकीय महाविद्यालय हैं। जिनमें से 32 कॉलेजों के 52 शिक्षक प्रदेश के अन्य जिलों के कॉलेजों में प्रतिनियुक्ति पर लगे हैं। जिसकी वजह से इन महाविद्यालयों में शिक्षकों का टोटा बन गया। इन शिक्षकों के विषय पढ़ाने वाला दूसरा कोई शिक्षक नहीं है। ऐसे में न तो सिलेबस पूरा हो रहा और न ही राष्टÑीय शिक्षा नीति के उद्देश्य।

अभिभावक बोले
खाली कक्षाएं कैसे बढ़े स्किल
अभिभावक अरविन्द मेहता, कैलाश जांगिड़, आरिफ हुसैन बताते हैं,  हाड़ौती के 7 राजकीय महाविद्यालय ऐसे हैं, जो इक्के-दुक्के शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। इनमें इटावा, अटरू व मांगरोल राजकीय महाविद्यालय में तो एक-एक ही शिक्षक हैं। इसके अलावा केलवाड़ा, चौमेहला, पिड़ावा और रामगंजमंडी महाविद्यालयों में 2-3 शिक्षक ही कार्यरत हैं। जबकि, प्रत्येक महाविद्यालय में 600 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और 7 से 8 विषय संचालित हैं। आर्ट्स व कॉमर्स के 6 से ज्यादा विषयों के शिक्षक नहीं है। ऐसे में अंग्रेजी, ज्योग्राफी, समाजशास्त्र, राजनेतिक विज्ञान सहित आधा दर्जन से अधिक प्रमुख विषयों की कक्षाएं ही नहीं लगती।

क्या कहते हैं विद्यार्थी
जहां विद्यार्थी की संख्या कम है वहां यह व्यवस्था लागू की जा सकती है। यूजी कक्षाओं में लागू होने वाला सेमेस्टर सिस्टम व्यवस्था पूरी तरह फेल है। यदि सरकार को यह लागू ही करना है तो बदलाव के साथ सुधार भी आवश्यक है। परीक्षाओं का रिजल्ट समय पर नहीं आता। इससे पहले अगले सेमेस्टर की परीक्षा की तारीख आ जाती है। जिसका असर परीक्षा परिणाम पर होता है।
- सोनम सोनी, राजकीय महाविद्यालय कोटा 

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सेमेस्टर प्रणाली तो लागू कर दी लेकिन हर छह माह में दो बार पेपर होने से फीस का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। इसके बावजूद बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन पढ़ाने वाला नहीं है। सिलेबस पूरे नहीं हो पा रहे। परीक्षाएं भी समय पर नहीं हो रही।
- मनीषा बजाज, राजकीय वाणिज्य कन्या महाविद्यालय

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सेमेस्टर प्रणाली में विद्यार्थियों के एग्जाम वर्ष में दो बार होंगे। लेकिन शैक्षणिक सत्र लेट होने की वजह से विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव डाला जाता है, उन्हें परीक्षा की तैयारी करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। जिसका नुकसान रिजल्ट के रूप में विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है।  
- मोनिका गुर्जर, जेडीबी कॉलेज 

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कोटा विश्वविद्यालय हर 6 महीने में परीक्षा फॉर्म भरवाती है, जिसकी डबल फीस जमा करवाना हर विद्यार्थियों के असान नहीं होता। पिछले वर्ष की तुलना में एक प्रैक्टिकल की फीस 300 ली जाती थी लेकिन अब 200 बढ़कर 500 ले जा रही है। फॉर्म भरने आए विद्यार्थियों को लंबी लाइन व कड़ी धूप में खड़े होने पर समस्या उत्पन्न हो रही है।
- आशीष मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा

नई शिक्षा नीति अच्छी है लेकिन मानव संसाधनों की कमी से अपने उद्देश्य पूर्ण नहीं कर पा रही। सेमेस्टर की परीक्षा समय पर नहीं होती। इस वर्ष एग्जाम फॉर्म आने में भी काफी समय लगा। यूजी का पहला सेमेस्टर ढाई माह लेट हो गया। जिसका असर रिजल्ट पर पड़ेगा। 
- दीप्ति मेवाड़ा, छात्रसंघ अध्यक्ष, राज. वाणिज्य. कन्या महाविद्यालय

एनईपी-2020 कहता है, सेमेस्टर से स्टूडेंट्स को क्वालिटी एजुकेशन मिलेगी, उपस्थिति बढ़ेगी, मिड टर्म से स्किल में निखार आएगा लेकिन, कॉलेज में 6 विषयों के शिक्षक ही नहीं है। क्लासें लगती नहीं है। कोर्स पूरा नहीं हुआ। परीक्षा सिर पर है। स्किल तो नहीं बढ़ी, पैसा अनावश्यक खर्च हो रहा। बिना सुविधा दो-दो बार फीस वसूल रहे।
- कीर्ति सिंह, छात्रा राजकीय महाविद्यालय, अटरू

क्या कहते हैं प्राचार्य
सेमेस्टर प्रणाली राष्टÑीय शिक्षा नीति के तहत शुरू की गई है। जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वागिण विकास करना है। लेकिन, यह तभी हो पाएगा जब पढ़ाने को शिक्षक होंगे। वर्तमान में यहां मेरे अलावा एक भी शिक्षक नहीं है। 7 विषयों में से 6 विषयों की कक्षाएं खाली रहती है। प्रेक्टिल करवाने वाले नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को कैसे क्वालिटी एजुकेशन मिलेगी। 
- बुद्धि प्रकाश मीणा, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय अटरू 

सेमेस्टर स्कीम वर्तमान युग की आवश्यकता है। इससे बच्चों पर अकादमिक भार कम हुआ है। विषय वस्तु समझने की समझ बढ़ी है। सिलेबस पढ़ने-समझने का अतिरिक्त समय मिला है। परीक्षा का भय दूर करने के लिए मिड टर्म में असाइनमेंट, फिल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट से आंतरिक मूल्यांकन बढ़ रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण नियमित कक्षाएं लगवाना चूनौति है।
- डॉ. संजय भार्गव, पूर्व प्राचार्य, जेडीबी साइंस कॉलेज 

सेमेस्टर स्कीम का फायदा तो कुछ नहीं हो रहा बल्कि नुकसान हो रहा है। राजसेस के अधीन संचालित कॉलेजों में लगे शिक्षक 6 दिन बाद 28 फरवरी को कार्यमुक्त हो जाएंगे। जबकि, पहले सेमेस्टर के एग्जाम मार्च तक होंगे। परीक्षा से पहले ही कॉलेज खाली हो जाएंगे। ऐसे में अगले सेमेस्टर कौन कराएगा। विद्यार्थियों का क्या होगा। कौन प्रेक्टिल करवाएगा। विद्यार्थियों के समक्ष चूनौतियों के साथ असमंजस  की स्थिति भी है।
- डॉ. राजेश चौहान, प्राचार्य, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा 

कोटा यूनिवर्सिटी में पहले से ही सेमेस्टर लागू है, जिसका विद्यार्थियों पर अच्छा इम्पेक्ट नजर आया है। विद्यार्थी नियमित कॉलेज आ रहे हैं। मिड टर्म कर रहे हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है। फिल्ड विजिट, इंडस्ट्री विजिट, सेमीनार, पर्सनाल्टी डवलपमेंट सहित कई मॉटिवेशनल एक्टिवीटी से जुड़ाव बढ़ा है। 
- डॉ. घनश्याम शर्मा, सहायक आचार्य एवं डीन पीजी, कोटा यूनिवर्सिटी

कॉलेज में कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से क्लासें नहीं लग पाती। मिर्ड टर्म ही मुश्किल से हो पाए। हालांकि, सेमेस्टर अच्छा है लेकिन इसका इम्पैक्ट तब ही आएगा जब पढ़ाने वाले विद्यार्थियों के बीच होंगे। 
- संजय लक्की, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय शाहबाद

इनका कहना है
आरपीएससी द्वारा जुलाई-अगस्त तक कॉलेजों में नए शिक्षक लगा दिए जाएंगे। 247 पुस्तकालय अध्यक्ष व पीटीआई व 2000 पदों पर सहायक आचार्यों की भर्ती परीक्षा हो चुकी है। अब साक्षात्कार के बाद सरकार द्वारा उन्हें पदस्थापन दिया जाएगा। जिससे कॉलेजों को शिक्षक मिलेंगे और शिक्षा का स्तर में सुधार होगा।
- डॉ. रघुराज सिंह परिहार, सहायक क्षेत्रिय निदेशक, आयुक्तालय कोटा

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