भाजपा के लिए एकतरफा जीत इस बार आसान लड्डू नहीं

दोनों ही उम्मीदवार क्षेत्र में जोर शोर से प्रचार में जुटे हैं

भाजपा के लिए एकतरफा जीत इस बार आसान लड्डू नहीं

कांग्रेस ने बारां जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया को अपना उम्मीदवार बनाया है। दोनों ही उम्मीदवार क्षेत्र में जोर शोर से प्रचार में जुटे हैं। 

जयपुर। आजादी के ठीक बाद कोटा- झालावाड़ के नाम से बनाई गई संसदीय सीट परिसीमन के बाद झालावाड़ -बारां संसदीय क्षेत्र कहलाने लगा। जनसंघ और भाजपा का गढ़ माना जाने वाले इस संसदीय क्षेत्र में 13 बार भाजपा का कब्जा रहा जब कि मात्र चार बार ही इस सीट को कांग्रेस भाजपा से छीन पाई है। वर्ष 1984 -1989 के चुनाव में अंतिम बार जूझार सिंह ने इस सीट को कांग्रेस के खाते में डाला था। उसके बाद 35 वर्ष से पहले वसुंधरा राजे सिंधिया औैर उसके बाद उनके पुत्र दुष्यंत सिंह इस सीट से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। दुष्यंत सिंह ने 2019 के चुनाव में तो साढ़े चार लाख से ज्यादा वोटों से जीत कर रिकार्ड बनाया था। इस बार फिर इस सीट पर भाजपा ने जहां दुष्यंत सिंह को ही अपना उम्मीदवार बनाया है तो कांग्रेस ने बारां जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया को अपना उम्मीदवार बनाया है। दोनों ही उम्मीदवार क्षेत्र में जोर शोर से प्रचार में जुटे हैं। 

आसान नहीं इस बार पार पाना
भाजपा के लिए इस बार यह चुनाव जीत का आसान लड्डू भी नहीं रहेगा। क्योंकि इस बार परिस्थितियां बदल गई है। इस सीट को वास्तव में भाजपा नैत्री और कद्दावर नेता वसुंधरा राजे का गढ़ माना जाता रहा है। दूसरी तरफ उर्मिला जैन भाया पहली शिकस्त के बाद इस बार पूरे अनुभव के साथ मैदान में खेल रही हैं। वह लोगों से सवाल करती हैं। 35 वर्ष में भाजपा ने क्षेत्र को क्या दिया। बारां झालावाड़ संसदीय क्षेत्र से 14 नदियां निकलती हैं। पार्वती, परवन ,घोड़ा पछाड़ उजाड़ जैसी विध्वंसक नदियां हर बार बाढ़ से रूबरू होती हैं। फिर इन नदियों से नहरें निकालने पर क्यों ध्यान नहीं दिया। रामगंजमंड़ी में निकलने वाले कोटा स्टोन की प्रोसेसिंग यूनिट ज्यादातर झालरापाटन में थी वह क्यों बंद हो गई। भवानी मंडी का संतरा अब तक क्यों बिना ब्राँडिंग के हैं। अफीम के पट्टे क्यों खत्म हो गए। उर्मिला जैन विकास के नाम पर भाजपा को घेर रही हैं तो भाजपा के पास  कुछ ट्रेनें चलाना और केन्द्र की योजनाएं ही बताने को हैं। भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही मैदान में खेल रही है। राम मंदिर निर्माण उनके लिए तुरूप का इक्का है।

दोनों तरफ ऊर्जा की कमी
चुनाव प्रचार की बात करें तो दोनों प्रत्याशी 16-16 घंटे प्रचार में जुटे हैं। लेकिन कार्यकर्ताओं में जोश नहीं है। भाजपा  कार्यकर्ता शिवराज सिंह कहते हैं। कार्यकर्ता अपनी जीत तय मानकर निश्चिंत बैठा है। अब तो डोर टू डोर कार्यक्रम भी बंद है। सामान्य बैठकें हो रही हैं। किसी बड़े नेता को भी नहीं बुलाया जा रहा। यह निश्चििंतता कहीं भारी नहीं पड़ जाए। यही हाल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का है। वह भी इस चुनाव में 100 फीसदी जीत का प्रण लेकर नहीं उतर रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता दामोदर दाधीच कहते हैं संसदीय क्षेत्र की आठ विधान सभा में से सात में भाजपा का कब्जा है। हमारे पास खोने को क्या है। लेकिन पाने को बहुत कुछ है। कार्यकर्ता इस बात को समझ नहीं रहा है। 

दूसरी बार है आमना सामना
भाजपा प्रत्याशी दुष्यंत सिंह और कांग्रेस उम्मीदवार उर्मिला जैन भाया दूसरी बार आमने सामने हैं। इससे पहले 2009 के चुनाव में  दोनों प्रत्याशियों में  भिडंत हुई थी। उस समय दुष्यंत सिह ने 52841 वोटों से विजयी श्री का वरण किया था। इस सीट पर सर्वाधिक पांच बार लगातार वसुंधरा राजे सिंधिया सांसद चुनी गई। उसके बाद से लगातार चार बार दुष्यंत सिंह चार बार से सांसद हैं। इस बार यदि वह चुनाव जीतते हैं तो वह अपनी मां के रिकार्ड की बराबरी कर लेंगे। 

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