अस्पताल परिसर की उधड़ी सड़कें बरसात में बनेगी समस्या

एमबीएस व जेके लोन अस्पताल का मामला: चारों तरफ कीचड़ से होकर गुजरने की मजबूरी

 अस्पताल परिसर की उधड़ी सड़कें बरसात में बनेगी समस्या

एमबीएस व जेके लोन दोनों ही कोटा संभाग के सबसे बड़े अस्पताल हैं। दोनों ही अस्पताल के परिसरों की हालत वर्तमान में इतनी अधिक खराब हो रही है कि उनकी सड़क पर चलना मुश्किल हो रहा है।

कोटा । एमबीएस व जेके लोन अस्पताल परिसर में नए ओपीडी ब्लॉक का काम चलने से उनके अंदर कीे दशा तो सुधर जाएगी। लेकिन बाहर परिसर  में जिस तरह की हालत अभी है, वह बरसात में अधिक समस्या बनकर सामने आएगी। परिसर की उधड़ी सड़कों पर कीचड़ होने से मरीजों व रोगी वाहनों को उनसे गुजरना मजबूरी होगी। एमबीएस व जेके लोन दोनों ही कोटा संभाग के सबसे बड़े अस्पताल हैं। जहां रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। उन दोनों ही अस्पताल के परिसरों की हालत वर्तमान में इतनी अधिक खराब हो रही है कि उनकी सड़क पर चलना मुश्किल हो रहा है।

एमबीएस अस्पताल के मुख्य द्वार से प्रवेश करने के साथ ही समस्या का सामना शुरू हो रहा है। प्रवेश द्वार के पास से ही सड़क उखड़ी हुई है। वह आउटडोर के बाहर तक, उपभोक्ता भंडार दवा काउंटर तक, इंदिरा रसोई, केन्द्रीय प्रयोगशाला से लेकर पीछे अधीक्षक व प्राचार्य कार्यालय के बाहर, कॉटेज वार्ड के सामने से लेकर फिजियोथैरेपी सेंटर और पोस्ट कोविड वार्ड से लॉनरी तक व एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी की तरफ जाने वाला रास्ता कोई भी सड़क व रास्ता ऐसा नहीं है जिस पर बिना किसी परेशानी के आसानी से चला जा सके। हालत यह है कि कार व एम्बूलेंस को ही चलने में परेशानी हो रही है तो पैदल व दो पहिया वाहनों का निकलना तो और भी अधिक खतरनाक हो रहा है। पूरे परिसर की सड़कें उधड़ी हुई हैं। कहीं गड्ढ़े हो रहे हैं तो कहीं कीचड़। कहीं सीवरेज के लिए सड़क को खोदा हुआ है तो कहीं पाइप लाइन के लिए। 

जेके लोन की तरफ भी यही हाल
सिर्फ एमबीएस ही नहीं जेके लोन अस्पताल परिसर की हालत तो इससे भी अधिक बुरी हो रही है। यहां भी मुख्य प्रवेश द्वार से ही सड़क पर वाहनों के हिचकोले शुरू हो रहे हैं जो अस्पताल के सामने तक और बदतर होते जा रहे हैं। आईएमए व कैंटीन के पास से अस्पताल के मुख्य गेट तक जाने में एम्बुलेंस के ही पलटने का खतरा बना हुआ है। यहां दिनभर गर्भवती महिलाओं व बच्चों को लेकर एम्बुलेंस आती रहती हैं। साथ ही प्रसूताओं को लेकर अस्पताल से जाती हैं। इन सड़क से वाहन ऐसे निकल रहे हैं जैसे किसी दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र की सड़क से गुजर रहे हैं। अस्पताल परिसर में चल रहे निर्माण व विकास कार्य के कारण सड़कों को खोदकर पटक तो दिया लेकिन उसे दोाबार से किसी ने भी सही करने का प्रयास नहीं किया। जिससे परेशानी या तो मरीजोन व उनके तीमारदारों को हो रही है या उन सड़कों से गुजरने वाले आमजन को।

बरसात में पानी भरने पर अधिक समस्या
दोनों ही अस्पतालों की वर्तमान में ही ऐसी बुरी स्थिति हो रही है। जबकि कुछ समय बाद बरसात शुरू हो जाएगी। उस समय तो यहां इतना अधिक कीचड़ हो जाएगा कि उससे निकलना ही दूभर हो जाएगा। कीचड़ के गंदे पैर अस्पताल में जाने से वहां संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाएगा।

इनका कहना है
 एमबीएस व जेके लोन अस्पताल परिसर में संयुक्त रूप से करीब 7 करोड़ रुपए की लागत से काम चल रहे हैं। जिनमें सीवरेज लाइन डालने, पाइप लाइन डालने व ब्लड बैंक के पास एसटीपी प्लांट डाला जाएगा। वर्तमान में जिस तरह से काम चल रहे हैं। उससे पूरे परिसर की सड़कों की हालत खराब हो रही है। बरसात तक काम पूरा होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसे में उस समय अधिक परेशानी होने वाली है। कीचड़ अधिक होने से अस्पताल में संक्रमण का खतरा बना रहेगा। हालांकि संबंधित एजेंसी से काम जल्दी पूरा करने व मॉनीटरिंग के लिए टीम लगी हुई है। अलग-अलग एजेंसी होने से समंवय की कमी के चलते परेशानी अस्पताल प्रबंधन व मरीजों को होने वाली है।
-डॉ नवीन सक्सेना, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल

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