अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले किले में तब्दील हुआ इस्लामाबाद : ब्‍लू बुक प्रोटोकॉल लागू, C-130 विमान सहित 10,000 जवान तैनात

शांति वार्ता: इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की ऐतिहासिक बैठक

अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले किले में तब्दील हुआ इस्लामाबाद : ब्‍लू बुक प्रोटोकॉल लागू, C-130 विमान सहित 10,000 जवान तैनात

पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच होने वाली इस वार्ता का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और युद्धविराम को स्थायी बनाना है। डोनाल्ड ट्रंप की यह कूटनीतिक पहल वैश्विक तेल बाजार और शांति के लिए निर्णायक साबित होगी।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत को लेकर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। यह बातचीत पश्चिम एशिया में छह हफ़्ते तक चले युद्ध के बाद पहली बार हो रही है। इस युद्ध में हज़ारों लोग मारे गए हैं और वैश्विक तेल बाज़ार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पूरे इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, खासकर उन सड़कों पर जो 'रेड ज़ोन' की ओर जाती हैं, जहाँ सरकार की अहम इमारतें स्थित हैं। अधिकारियों ने दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर दी है। साथ ही, भारी संख्या में सेना तैनात की गयी है और जगह-जगह तलाशी केंद्र बनाए गए हैं। विदेश मंत्रालय से सटा हुआ 'सेरेना होटल' बातचीत के स्थल के तौर पर पूरी तरह सील कर दिया गया है।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ़ भी शामिल हैं। इन सभी के शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुँचने की उम्मीद है। ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपनी टीम की पुष्टि नहीं की है, हालाँकि रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ईरानी पक्ष का नेतृत्व करेंगे। दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत का मकसद एक नाज़ुक युद्ध विराम को मज़बूत करना, लेबनान को शामिल करने को लेकर मतभेदों को सुलझाना और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल की आपूर्ति के लिए एक अहम समुद्री रास्ता है। लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर इज़रायल के हालिया हमलों ने तनाव बढ़ा दिया है और बातचीत को और मुश्किल बना दिया है।

व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद दोनों पक्षों के एक-दूसरे से अलग प्रस्तावों के बीच कोई बीच का रास्ता निकालना है। ईरान ने 10-सूत्रीय योजना पेश की है, जिसमें उसके क्षेत्रीय प्रभाव और परमाणु संवर्धन के अधिकारों को मान्यता देने की बात शामिल है। वहीं, ख़बरों के मुताबिक, अमेरिका के पास 15-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव है, जिसमें परमाणु हथियार न रखने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की गयी है। इस बातचीत का नतीजा न सिर्फ़ पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की दिशा तय करेगा, बल्कि दुनिया भर के ऊर्जा बाज़ारों की स्थिरता पर भी इसका असर पड़ेगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी सूझ-बूझ से श्री वेंस को बातचीत की अगुवाई करने के लिए आगे किया है। ऐसा करने का पहला मकसद यह संदेश देना है कि यह कूटनीतिक कोशिश पूरी तरह से गंभीर है। इसके ज़रिए उन्होंने अपने सहयोगी देशों, विरोधी ताकतों और आम जनता को यह साफ़ संकेत दिया है कि उनका प्रशासन इस संघर्ष को खत्म करने के लिए पूरी तरह से जुटा हुआ है, न कि सिर्फ़ खानापूर्ति के लिए बातचीत कर रहा है। दूसरा मकसद यह है कि अगर ये बातचीत नाकाम रहती है या युद्ध विराम खत्म हो जाता है, तो श्री ट्रंप यह दावा कर सकते हैं कि उन्होंने अपने प्रशासन के सबसे ज़्यादा एहतियात बरतने वाले वरिष्ठ अधिकारी को ही इस संघर्ष का शांतिपूर्ण हल निकालने का मौका दिया था।

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