रणथम्भौर की लिविंग लीजेंड बाघिन टी 39 : संघर्ष, साहस और लम्बी उम्र की अनोखी कहानी
18 साल की उम्र में भी जंगल की पहचान बनी बाघिन
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के घने जंगल में जहां हर दिन अस्तित्व की चुनौती होती है, वहीं बाघिन टी 39 ने अपने जीवन से एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की। लगभग 18 वर्ष की आयु में वह रणथम्भौर की सबसे दीर्घायु बाघिनों में शामिल हो चुकी।
जयपुर। रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के घने जंगल में जहां हर दिन अस्तित्व की चुनौती होती है, वहीं बाघिन टी 39 ने अपने जीवन से एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। लगभग 18 वर्ष की आयु में वह रणथम्भौर की सबसे दीर्घायु (अभी ने बाघिन जीवत है) बाघिनों में शामिल हो चुकी है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार आमतौर पर जंगल में बाघों का जीवनकाल सीमित होता है, लेकिन टी 39 ने बिना किसी मानवीय हस्तक्षेत्र या विशेष उपचार के इतना लम्बा जीवन जिया है। जो उसकी अद्भुत जीवटता को दर्शाती है।
अपने जीवनकाल में इस बाघिन ने तीन बार शावकों को जन्म दिया है। डीसीएफ मानस सिंह ने बताया कि टी 39 की तुलना अक्सर प्रसिद्ध बाघिन मछली से की जाती है। लेकिन टी 39 ने पूरी तरह प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवन बिताकर अपनी अलग पहचान बनाई है। अभी यहां जीवित बाघों में सबसे अधिक उम्र की बाघिन टी 39 ही बताई जा रही है। हाल के दिनों में वन विभाग ने उसके व्यवहार में बदलाव देखा है। अब वह जंगल के बाहरी क्षेत्रों में अधिक दिखाई दे रही है वन विभाग की टीम उसकी गतिविधियों में लगातार नजर बनाए हुए है।

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