स्मार्ट सिटी में अब तक नहीं मिल रही स्मार्ट आरसी

ठेका लेट होने के बाद भी ठेकेदार भुगत रहा पेनल्टी, लगभग 5 हजार से अधिक वाहन चालकों को हैं इंतजार

स्मार्ट सिटी में अब तक नहीं मिल रही स्मार्ट आरसी

विभागीय सूत्र बताते हैं कि गत वर्ष के आखिरी महीनों तक तो आरसी स्मार्ट कार्ड छापने वाली फर्म को टेंडर ही नहीं दिया गया था। इस वर्ष भी अभी हाल ही में ठेका दे दिया गया तो भी स्मार्ट कार्ड आरसी नहीं आ रही है। बताया जाता है कि ठेकेदार अपनी मनमर्जी का मालिक है।

कोटा। प्रादेशिक परिवहन कार्यालय की ओर से वाहनों के स्मार्ट कार्ड का ठेका भले ही हो चुका हैं लेकिन अभी तक हजारों लोगों को स्मार्ट कार्ड का इंतजार ही करना पड़ रहा है। ये स्थिति आज या कल की नहीं है बल्कि महीनों से चली आ रही है लेकिन ठेकेदार की मनमर्जी के आगे विभाग भी बेबस नजर आ रहा है। नतीजा ये हैं कि जिले के लगभग 5 हजार से अधिक वाहन चालक स्मार्ट कार्ड आरसी लेने की कतार हैं। विभाग में इस कार्य की पेंडेंसी करीब 3 माह से चल रही है। दरअसल स्मार्ट आरसी पारंपरिक आरसी बुक का एक अपग्रेड है। जिसे अपने बटुए में रखकर आसानी के साथ कही भी ले जाया जा सकता है। ये ड्राइविंग लाइसेंस की तरह एक छोटा सा कार्ड होता है पारंपरिक आरसी बुक और स्मार्ट कार्ड आरसी दोनों ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत वैध दस्तावेज हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरटीओ आॅफिस में आरसी स्मार्ट कार्ड की पेंडेंसी महीनों से चल रही है। बताया जाता है कि आगे से स्मार्ट कार्ड नहीं आने के कारण ये पेंडेंसी चल रही है।  विभागीय सूत्र बताते हैं कि गत वर्ष के आखिरी महीनों तक तो आरसी स्मार्ट कार्ड छापने वाली फर्म को टेंडर ही नहीं दिया गया था। इस वर्ष भी अभी हाल ही में ठेका दे दिया गया तो भी स्मार्ट कार्ड आरसी नहीं आ रही है। बताया जाता है कि ठेकेदार अपनी मनमर्जी का मालिक है। उसे ना तो विभाग के नियमों से कोई मतलब हैं और ना ही लोगों की परेशानी से। वहीं विभाग के ही कुछ सूत्र से कहते हैं कि ठेकेदार को जब पैसे ही नहीं दिए जा रहे तो आरसी स्मार्ट कार्ड कैसे छपेंगे। ज्ञातव्य है कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अनुसार, सभी वाहनों को सार्वजनिक स्थान और किसी भी जगह चलाने के लिए, पंजीकरण प्रमाणपत्र होने के साथ साथ वाहन पर ही पंजीकरण का निशान होना आवश्यक है। अधिनियम के इस अनुच्छेद का पालन करने में विफलता के परिणामस्वरूप मालिक को उसी कानून के तहत दंडित किया जा सकता है। प्रमाणपत्र शुरू में 15 साल की अवधि के लिए वैध होता है, जिसके बाद इसे हर 5 साल में समय-समय पर नवीनीकृत किया जाना चाहिए. कई वर्षों तक, पंजीकरण प्रमाणपत्र या आरसी पुस्तक दस्तावेजों का एक सेट होता था।  जिसमें या तो अंतर्निहित चिप्स (कार्ड के अंदर डाली गई चिप) या एक कोड होता है जिसे वाहन और उसके मालिक की की जानकारी तक पहुंचने के लिए स्कैन किया जा सकता है।

इनका कहना है
स्मार्ट कार्ड का ठेका भी लेट हुआ है। पेनेल्टी भी लग रही है। फिलहाल स्मार्ट कार्ड की उपलब्धता नहीं है। 
-अरविन्द सिंह राठौड़, जिला परिवहन अधिकारी। 

मैं कई महीनों से स्मार्ट कार्ड आरसी के लिए चक्कर लगा रहा हंू। शहर के कई चौराहों पर यातायात कर्मी आरसी मांगते हैं। उनको दिखाने के लिए पूरी आरसी बुक को साथ लेकर चनला पड़ता है। 
-मधुसुदन शर्मा

जब भी आॅफिस में आरसी स्मार्ट कार्ड लेने के लिए आता हंू। यहीं जवाब मिलता है कि अभी नहीं आ रही है, टाइम लगेगा। बीते कुछ महीनों में आॅफिस के कई चक्कर लगा चुका हंू। 
-भूपेन्द्र सिंह

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