ट्रॉली बैग खा रहा कुलियों की कमाई
20 साल में आमदनी घटकर आधी हो गई
40 वर्षों से नहीं हुई रेलवे में कुली की भर्ती, अशिक्षित ही कर रहे हैं काम।
कोटा । 20 साल पहले जो कुली के काम करने में मजदूरी कर लेते थे, अब तो उसकी आधी भी नहीं हो पाती है। किसी-किसी दिन तो खाली हाथ ही घर जाना पड़ता है। पहले पिताजी काम करते थे। फिर उनकी जगह पर हम काम करने लगे। अब तो 30 साल से ऊपर का समय हो गया है। पहले के दिनों में बहुत मजदूरी होती है, कभी-कभी तो 2 हजार रुपए तक बन जाते थे। बाकी 1 हजार रुपए तक तो रोजाना की कमाई होती ही थी। अब तो 400 से 500 रुपए की मजदूरी दिनभर में हो जाए तो बहुत मजे की बात है। नौ घंटे की मजदूरी में सुबह से लेकर दोपहर तक तो कई बार एक भी यात्री नहीं मिल पाता है। आधुनिकता की दौड़ में ज्यादातर लोगों के पास अब ट्रॉली बैग हो गए हैं जिनको उठाने का झंझट तो खत्म ही हो गया है। दूसरे जो ज्यादा सामान लेकर आते हैं तो उनकी मनमर्जी से मजदूरी देने की आदत रहती है। कोई कोई तो यह तक कहता है कि तुम मुझे जानते नहीं हो। ऐसे में उनसे जो भी मिल जाए वो ही ले लेते हैं ।
42 कुली कोटा रेलवे स्टेशन पर करते हैं काम
कोटा रेलवे स्टेशन पर वर्तमान में कुल 42 कुल काम करते हैं। जो दो शिफ्ट में यहां पर काम करते हैं। इनकी मजदूरी का समय सुबह 8 से शाम 6 बजे तक और दूसरी पारी शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक रहती है। इतना ही नहीं सभी कुली को आठ-आठ दिन में चेंज मिलता रहता है। ताकि सभी को बराबर-बराबर मजदूरी करने का मौका मिल जाए। 90 प्रतिशत कुली इनमें हिण्डौन सिटी के है। कोटा शहर या आसपास के तो मात्र 10 प्रतिशत है। इनमें से अधिकांश अशिक्षित है। इसलिए कुली का काम कर रहे हैं। ज्यादातर कुली अपने पिता या चाचा के स्थान पर लगे हुए हैं। कोटा रेलवे स्टेशन पर एक भी महिला कुली नहीं है।
35-40 साल हो गए अब कोई नहीं आता इस पेशे में
रेलवे स्टेशन पर कुली काम करने वालों की भर्ती रेलवे में पिछले 35 से 40 सालों में नहीं की है। इसका प्रमुख कारण आधुनिकता है। वर्तमान में जो भी कुली है वो कम से कम 30 से 35 सालों से यहां पर काम कर रहे है। कुली का काम में पहले तो खूब कमाई हुआ करती थी। वर्ष 2000 से पहले तक तो दिन के 2 हजार रुपए तक मजदूरी कर लेते थे। लेकिन अब तो 400 से 500 रुपए हो जाए तो भी गनीमत समझते हैं। क्योंकि ज्यादातर लोग कुली नहीं लेते हैं। सामान में कमी होने तथा आधुनिक बैग होने के कारण उठाने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है।
दो शिफ्टों में होता है काम
कुली की मजदूरी करने वालों को आठ-आठ दिन में शिफ्ट चेंज करनी होती है। जो आठ दिन तक सुबह 8 बजे की शिफ्ट में काम करते हैं। उनको आठ दिन बाद शाम 6 बजे की शिफ्ट में काम करना होती है। कोटा रेलवे स्टेशन पर वर्तमान में कुल 42 कुली है, इनमें से 21 कुली सुबह 8 से शाम 6 बजे तक की शिफ्ट में काम करते हैं। वहीं 21 कुली शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक की शिफ्ट में काम करते हैं।
पिताजी की जगह लगे हुए हैंं हम तो अनपढ़ हैं,
करीब 50 साल पहले हमारे पिताजी कुली का काम किया करत थे। बाद में उन्होंने मुझे अपनी जगह पर लगा दिया। मैं यहां पर करीब 30 साल से कुली का काम कर रहा हूं।
-हरकेष
10 सालों में मजदूरी बहुत घटी हैं
हम तो अशिक्षित हैं। वर्ष 1980 में भर्ती हुए थे। तब से यही काम कर रहे हैं। पहले तो 1-2 हजार रुपए की मजदूरी दिनभर में हो जाती थी। अब पिछले 10 सालों से तो 500 रुपए से ज्यादा कभी होती ही नहीं है। उसमें भी कभी तो खाली हाथ ही जाना पड़ता है।
- रफीक
घर की जिम्मेदारी पड़ गई सिर परमेरे पापा कुली का काम करते थे। कुछ साल पहले उनके पैरों में अचानक दर्द हुआ और उनका चलना-फिरना बंद हो गया। तब मैं कक्षा पढ़ाई कर रहा था। घर में बड़ा होने के कारण और पापा की ऐसी हालत देखकर उनकी जगह पर काम कर रहा हूं। ताकि परिवार की जिम्मेदारी उठा सकूं। मैंने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है।
- उपेंद्र

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