नवज्योति स्पेशल स्टोरी : चोरी के माल के खरीदारों पर मेहरबान राजस्थान पुलिस

नवज्योति स्पेशल स्टोरी : चोरी के माल के खरीदारों पर मेहरबान राजस्थान पुलिस

चोरी के माल का झोल, पुलिस को मिल गई पोल : चोरी की सजा तीन साल, चोरी का माल आदतन खरीदने पर उम्रकैद : लेकिन प्रदेश में पांच साल में चोरी-नकबजनी के मामले 1,61,258 और चोरी का माल खरीदने के महज 67

जयपुर। कोई भी चोर किसी भी सामान की चोरी इसलिए नहीं करता कि वह उसे संभाल कर अपने घर में रखे, बल्कि चोरी में गया हर सामान आगे बिकता ही बिकता है।  किसी वस्तु की किसी ने चोरी, लूट या डकैती की है तो किसी ने आगे उसे खरीदा भी जरूर है। चोरी की हर घटना चोरी के सामान की बिक्री का सबब भी है। लेकिन यह जानना दिलचस्प है कि प्रदेश में पिछले पांच साल में चोरी और नकबजनी की 1,61,258 वारदात हुर्इं लेकिन इन के बदले ये सामान खरीदने के मामले सिर्फ 67 ही दर्ज हुए हैं।


आपको ये बता दें कि चोरी आईपीसी 379 का अपराध है जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है जबकि चोरी का सामान खरीदने के आदतन खरीदारों को उम्रकैद तक होती है। इसमें कम से कम सजा दस साल है।  आईपीसी की धारा-413। यह धारा चोरी, लूट, डकैती के सामान को खरीदने वाले के खिलाफ उपयोग में लेती है लेकिन प्रदेश में इस धारा के उपयोग की बात की जाए तो वर्ष 2017 से लेकर अगस्त 2021 तक सिर्फ 67 लोगों के खिलाफ पुलिस ने धारा 413 का उपयोग किया है।


अर्थात मात्र 67 लोगों ने ही चोरी, लूट और डकैती के सामान को एक से अधिक बार खरीदा है। बाकी माल को बदमाशों से ही बरामद किया है। यदि प्रदेश में चोरी, डकैती, लूट और नकबजनी की बात करें तो एक लाख 82621 वारदात हुई हैं। इन सभी में माल गया था और पुलिस ने बरामदगी भी दिखाई लेकिन खरीदार के खिलाफ मुकदमे दर्ज नहीं किए गए। ऐसे में पुलिस ने चोरी का माल खरीदने वालों पर पुलिस ने मेहरबानी दिखाई।

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क्या है आईपीसी: 413

भारतीय दंड संहिता की धारा 413 के अनुसार जो कोई व्यक्ति चोरी, लूटी हुई सम्पत्ति को दो या दो से अधिक बार खरीदता है तो उस आरोपित के खिलाफ पुलिस धारा 413 का उपयोग कर सकती है। इस धारा के तहत आजीवन कारावास या किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और साथ ही आर्थिक दण्ड से दण्डित किया जाता है। यह अपराध गैर जमानती और समझौता करने योग्य नहीं है।


सिर्फ 67 मुकदमे दर्ज
आईपीसी 413 के तहत जिला भिवाड़ी 5, अलवर 3, उदयपुर 2, जालौर 2, अजमेर 3, सवाई माधोपुर 1, बीकानेर 2, जोधपुर पश्चिम 5, पाली 1, जयपुर पूर्व 5, भरतपुर 4, जैसलमेर 2, झुंझुनूं 2, चित्तौड़गढ़ 3, जयपुर ग्रामीण 2, जयपुर पश्चिम 7, हनुमानगढ़ 2, करौली 5, कोटा ग्रामीण 1, राजसमंद 1, जोधपुर शहर पूर्व 1, जयपुर शहर दक्षिण 2, धौलपुर 1, झालावाड़ 2, नागौर 1, भीलवाड़ा 1 और डूंगरपुर में एक मुकदमा दर्ज हुआ है।


भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 379 में किसी व्यक्ति को चोरी का अपराध करने के लिए दण्डित किया जाता है। इस धारा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी भी  चल या अचल वस्तु की चोरी करने का अपराध करता है तो ऐसी स्थिति में यह धारा लागू होती है, चोरी का अपराध एक संज्ञेय अपराध है, इस लिए पुलिस चोरी के मामले में रिपोर्ट के रूप में एफआईआर दर्ज करती है। आईपीसी की धारा 379 के तहत अपराध किया है, उसे इस संहिता के तहत तीन वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।

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धारा 380 के अनुसार जो भी कोई ऐसे किसी इमारत, तम्बू या जलयान जो मानव निवास या सम्पत्ति की अभिरक्षा के लिए उपयोग में आता हो, में चोरी करता है, तो  उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें राजीनाम नहीं किया जाता है।

 

आईपीसी की धारा 392 लूट के लिए उपयोग में आती है। लूट करने वाले के खिलाफ एक अवधि के लिए कठिन कारावास की सजा जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही वह आर्थिक दंड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

घीया को हुई थी धारा 413 में उम्रकैद

शहर के फास्टट्रैक अदालत ने चोरी की मूर्ति खरीदने के आदतन अपराधी वामननारायण घीया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने घीया की सजा को रद्द कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने घीया को चोरी का सामान खरीदने का आदतन अपराधी माना था।

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लोग चोरी का माल खरीदते हैं, तो धारा 413 ऐड होती है। भविष्य में फील्ड आॅफिसरों को निर्देश देंगे कि चोरी के माल को खरीदने के अभ्यस्तों के खिलाफ धारा 413 में सख्त कार्रवाई करें।
-रवि प्रकाश मेहरड़ा, एडीजी, क्राइम, राजस्थान 


चोरी के सामान के क्रेता कम होते हैं। इनके खिलाफ धारा 413 में कार्रवाई हो तो चोरी के माल का आउटलेट समाप्त हो जाएगा। पर ऐसा नहीं होता। इससे आदतन खरीदारों की प्रवृति पर अंकुश नहीं लगता।
-हेमंत नाहटा, अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय


धारा 411- जो किसी चुराई हुई संपत्ति को रखेगा, उसे तीन साल तक की सजा या जुर्माने से अथवा दोनों से दंडित किया जाएगा।
धारा 412 - जो किसी डकैती में चुराई हुई संपत्ति को रखेगा, उसे आजीवन कारावास से या दस साल के कठोर कारावास से और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

वर्ष 2017    वारदात 
चोरी    27573
लूट    972
नकबजनी    5022
डकैती    47
कुल    33614

वर्ष 2018    वारदात
चोरी    28875
लूट    1022
नकबजनी    5196
डकैती    75
कुल    35168

वर्ष 2019    वारदात
चोरी    40815
लूट    1421
नकबजनी    7182
डकैती    107
कुल    49525

वर्ष 2020    वारदात
चोरी    28695
लूट    1155
नकबजनी    5828
डकैती    76
कुल    35754

वर्ष 2021    वारदात
चोरी    22928
लूट    984
नकबजनी    4587
डकैती    61
कुल    28560



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