पीओपी मूर्तियों पर प्रतिबंध ने छीना मूर्तिकारों का रोजगार

कोरोना से पिछले दो साल से आर्थिक तंगी से गुजर रहे कलाकारों पर नियमों का बोझ पड़ रहा भारी

पीओपी मूर्तियों पर प्रतिबंध ने छीना मूर्तिकारों का रोजगार

पीओपी की मूर्तियों पर प्रतिबंध का बड़ा नुकसान मूर्तिकारों को हो रहा है। सरकार की ओर से पीओपी की मूर्तियों की बनाने और बिक्री पर रोक लगा दी साथ ही मूर्तियों की ऊंचाई को लेकर कलाकरों को नोटिस दिए जा रहे है। ऐसे में कुंभकारों का रोजगार छीनता जा रहा है।

कोटा । पिछले दो सालों से कोरोना संक्रमण ने मूर्तिकारों का व्यवसाय ठप पड़ा है। दो साल से बड़े आयोजन नहीं होने से पहले ही संकट गुजर रहे मूर्तिकारों पर नये नियमों का बोझ भारी पड़ रहा है। पीओपी की मूर्तियों पर प्रतिबंध का बड़ा नुकसान मूर्तिकारों को हो रहा है। सरकार की ओर से पीओपी की मूर्तियों की बनाने और बिक्री पर रोक लगा दी साथ ही मूर्तियों की ऊंचाई को लेकर कलाकरों को नोटिस दिए जा रहे है। ऐसे में कुंभकारों का रोजगार छीनता जा रहा है। मूर्तिकारों कहना कि कोरोना संक्रमण काल में पिछले दो साल से सारे धार्मिक समारोह पर पाबंदी के चलते मूर्तिकार बेरोजगार हो गए है। जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दीपावली होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों पर कोरोना के चलते प्रतिबंध सीधा असर मूर्तियां बनाने वाले कलाकारों पर पड़ा है। कृष्ण जन्मोत्सव व गणेशोत्सव में सजने वाले सावर्जनिक पांडाल पिछले दो साल से बंद होने से इन कलाकारों की कमर ही टूट चुकी है। अब सब ठीक होने लगा तो मूर्तियों की ऊंचाई तो कभी पीओपी की मूर्तियों के प्रतिबंध के नाम पर मूर्तिकारों को नोटिस दिए जा रहे है।

कोरोना पहले ही कई लोगों नेअपना धंधा बदल लिया है कुछ अपनी पुस्तैनी विरासत को बचाने में लगे हुए है। 25 साल पहले 50 से अधिक मूर्तिकार जोधपुर से कोटा आकर बसे तब से बना रहे मूर्तियां प्लास्टर आॅफ पेरिस की मूर्तियों पर बेन लगने के बाद कोटा के मूर्तिकारों ने पानी में घुलनशील वाली मिट्टी से मूर्तियां बनाना शुरू कर दिया। पिछले दो साल से कोरोना के चलते पहले ही मूर्तिकार आर्थिक तंगी से गुजर रहे है। उस पर अब मूर्तियों की ऊंचाई को लेकर नोटिस दिए जा रहे है। हालांकि प्रशासन ने अब 12 फीट की प्रतिमाओं छूट देकर राहत दी है। पिछले दो साल साल दशहरा मेला नहीं लगा, जिससे 50 से अधिक परिवारों का रोजगार छीन गया। दशहरा मेले में प्लास्टर आॅफ पेरिस की विभिन्न सजावटी मूर्तियां, गमले, सजावटी वॉल पेटिंग बिक जाती थी, लेकिन कोरोना से शहर के विभिन्न धार्मिक उत्सवों पर भरने वाले मेलों पर प्रतिबंध लगा दिया। जिससे इन कलाकारों को गली मोहल्लों में मूर्तिया बेचना पड़ रहा है। 25 साल पहले जोधपुर से 50 से अधिक परिवार यहां आकर बस गए पहले पत्थर की मूर्तियां बनाया करते थे। लेकिन उनकी मांग कम हुई तो अपने हुनर को जिंदा रखने के लिए मिट्टी व प्लास्टर आॅफ पेरिस की मूर्तिया बनाना शुरू किया।

अब प्लास्टर ऑफ पेरिस के साथ पानी में घुलनशील मिट्टी मिलाकर जोधपुर की बारीक कलाकारी को मिट्टी की मूर्तियों में उकेर रहे है। - सूरजमल, मूर्तिकार सरकार आर्थिक पैकेज दे तो बच सकेगा हुनर मूर्तिकार कालूमल ने बताया कि कोरोना संक्रमण से शहर में मूर्तिकार बेरोजगार हो गए है। सरकार नियमों से प्लास्टर ऑफ पेरिस का माल जब्त होने का खतरा बना रहता है। मिट्टी मूर्तियों बनाने में लागत ज्यादा आती है ऐसे में लोग महंगी मूर्तियों खरीदते नहीं है। जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां 51 रुपए से 250 रुपए में बिकती है। वही मिट्Þटी की छोटी प्रतिमाए भी 125 रुपए से शुरू होती है। एक व दो फीट की मूर्ति 300 से 1000 रुपए बिकती है। सरकार हम कलाकारों को आर्थिक पैकेज दे और हमारे माल को बेचने के लिए एक प्लेटफार्म तैयार करें तभी मूर्तिकारों का हुनर बच पाएगा। कोरोना काल में कई परिवारों ने अपना धंधा बदल लिया है। पहले शहर में तीज त्यौहारों पर आयोजित मेलों और सार्वजनिक उत्सवों में कलाकारों की कलाकृतियां बिक जाती जिससे घर चल जाता था। नये नये नियमों से मूर्तिकारों धंधा छीनता जा रहा है। मूर्तियों की बिक्री के लिए तैयार हो हाट बाजार शहर में मूर्तिकारों के माल बेचने के लिए एक हाट बाजार तैयार हो जाए तो सभी कलाकारों का माल एक जगह बिकेगा । दूसरी ओर बाहर से आने वाली पीयूपी की मूर्तियों की बिक्री पर रोक लग सकेंगी। सड़को पर बिकने पीयूपी मूर्तियों की बिक्री पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही स्थाई मूर्तिकारों को पूरे साल रोजगार मिलेगा। जिससे ग्राहकों को इधर उधर नहीं भटकना पड़ेगा। साथ रोड किनारे माल बेचने की समस्या से निजात मिल जाएंगी। अभी मूर्तियों के लिए सीएडी चौराहा, दशहरा मैदान रोड, घोडेवाले बाबा चौक, कुन्हाड़ी, तालाब रोड पर कलाकारों को फूटपाथ पर दुकाने लगानी पड़ती है। हाट बाजार तैयार हो जाए तो माल बेचने में आसानी होगी। साथ ही प्लाटर ऑफ पेरिस की बाहर से आकर बिकने वाली मूर्तियों धर पकड़ में भी निगम को आसानी हो जाएगी। -महेंद्र लुहार, मूर्तिकार प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों केविसर्जन के लिए बने स्थाई कुंड सरकार ने प्लास्टर आॅफ पेरिस की मूर्तियों की बिक्री पर रोक लगाने के बाद आजकल मूर्तिकार पानी में घुलने और कच्चे रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे विजर्सन के बाद मूर्ति पानी में गल जाए और उसके कलर से जलीय जीवों को नुकसान भी नहीं हो। बड़ी मूर्तियों में नारियल की जूट का प्रयोग किया जाता है जिससे मूर्तियां पानी में विसर्जन के बाद भी घुलती नहीं है। पिछले दो साल से कलाकारों ऐसी मूर्तियां बनाना बंद कर दिया है। अब पानी में घुलनशील मिट्टी की मूर्तिया तैयार कर रहे है। हालांकि प्लास्टर आॅफ पेरिस स्थानीय कलाकार ना भी बनाए तो बाहर से त्यौहारों पर ये बिकने आती ही है। सस्ती होने से लोगों में अभी इसका क्रेज कम नहीं हुआ ना ही मांग घटी है। नगर निगम की ओर गणेशोत्सव में प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के लिए भीतरिया कुंड, किशोर सागर तालाब में स्थाई पक्का गणेश कुंड तैयार करें जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का विसर्जन जा सके। जिससे मूर्तिकारों को रोजगार बना रहेगा। दूसरा शहर के नदी तालाब प्रदूषण होने से बच जाएंगे।

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