सिलेबस और परीक्षाएं कराना ही कॉलेजों के लिए होगी चुनौती

कोटा यूनिवर्सिटी संभाग के राजकीय महाविद्यालयों में लागू करेगी सेमेस्टर प्रणाली, कॉलेजों में पहली बार एमए व एमकॉम पाठ्यक्रम में होगा सेमेस्टर, विद्या परिषद की बैठक में मंजूरी मिलने का इंतजार

सिलेबस और परीक्षाएं कराना ही कॉलेजों के लिए होगी चुनौती

महाविद्यालयों में 40 तरह के विषयों की परीक्षाएं साल में एक बार ही सम्पन्न करवाई जाती है। जिसमें 3 माह का समय लगता है। सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के साथ हर 6 महीने में परीक्षाएं करवाने में एक से डेढ़ माह का समय अतिरिक्त लगेगा। ऐसे में कॉलेजों में परीक्षाएं करवाने में ही 5 माह बीत जाएंगे।

कोटा। कोटा विश्वविद्यालय संभाग के सभी राजकीय महाविद्यालयों  में नई शिक्षा पॉलिसी के तहत सेमेस्टर सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। एमए और एमकॉम पाठ्यक्रम में पहली बार सेमेस्टर प्रणाली अपनाई जाएगी। यह पॉलिसी महाविद्यालयों के नियमित विद्यार्थियों पर ही लागू होगी। हालांकि  विज्ञान संकाय में एमएससी में करीब दो साल पहले ही सेमेस्टर सिस्टम लागू कर दिया गया था। विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेजों में साधन-संसाधनों को परखे बिना ही नई शिक्षा पॉलसी लागू की जा रही है। जिसका खामियाजा विद्यार्थियों व शिक्षकों को भुगतना पड़ेगा। अब तक महाविद्यालयों में पीजी कोर्स 2 साल में पूरा हो जाता था लेकिन सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बाद यह कोर्स 4 साल में पूरा होगा, क्योंकि 6-6 महीने में 4 बार एग्जाम होंगे। साथ ही परीक्षाएं सम्पन्न करवाने में डेढ़ माह का अतिरिक्त समय लगेगा। 

कॉलेजों के लिए परीक्षाएं कराना चुनौतीपूर्ण
महाविद्यालयों में 40 तरह के विषयों की परीक्षाएं साल में एक बार ही सम्पन्न करवाई जाती है। जिसमें 3 माह का  समय लगता है। सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के साथ हर 6 महीने में परीक्षाएं करवाने में एक से डेढ़ माह का समय अतिरिक्त लगेगा। ऐसे में कॉलेजों में परीक्षाएं करवाने में ही 5 माह बीत जाएंगे। वहीं, परीक्षा में प्रोफेसरों की ड्यूटी लगने से बीए, बीकॉम व अन्य संकाय के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। कोटा शहर के मुकाबले ग्रामीण व संभाग के अन्य जिलों की हालत खराब है। बारां गर्ल्स कॉलेज में तो प्रिंसिपल को मिलाकर 2 ही नियमित प्रोफेसर हैं। हालांकि विद्या संबल और संविदा को मिलाकर 12 शिक्षक लगे हैं। महाविद्यालय में अन्य संसाधनों की भी कमी है। इस व्यवस्था से न तो समय पर परीक्षाएं होंगी और न ही सिलेबस पूरा होगा। जिसका दुष्प्रभाव परीक्षा परिणाम के रूप में विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा।  

सिलेबस पूरा कराएंगे या परीक्षाएं
शिक्षाविदों के अनुसार जिन महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है, वहां सेमेस्टर प्रणाली से हर 6-6 माह में परीक्षाएं करवाना चुनौतीपूर्ण होगा। क्योंकि, पढ़ाई का अधिकतर समय परीक्षाएं करवाने में ही बीत जाएगा। यूजीसी नियमों के अनुसार 40 स्टूडेंट्स पर एक प्रोफेसर होना चाहिए, जो प्रदेश के किसी भी महाविद्यालय में संभवत: नहीं है। कोटा संभाग के 33 राजकीय महाविद्यालय में वर्तमान में कुल 45 हजार से ज्यादा विद्यार्थी हैं। जिसके मुकाबले शिक्षकों की संख्या बहुत ही कम है। यदि, कोटा शहर की बात करें तो 8 कॉलेजों 391 शिक्षकों के पद स्वीकृत है, जिनमें से 169 प्रोफेसरों के पद रिक्त हैं। ऐसे में सेमेस्टर परीक्षाओं में शिक्षकों की ड्यूटी लगने से अन्य संकाय के स्टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित होगी। साथ ही समय पर सिलेबस पूरा करवाना चुनौती होगी। 

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कोटा को छोड़कर अन्य में संसाधनों की कमी
सूत्रों के अनुसार शहर के राजकीय कॉलेज संसाधनों की दृष्टि से संभाग के अन्य जिलों से बेहतर स्थिति में है। लेकिन ग्रामीण सहित संभाग के बूंदी, बारां और झालावाड़ के महाविद्यालयों में शिक्षकों व संसाधनों की कमी है। हायर एज्युकेशन में सरकार का स्टैंडर्ड रिक्वायरमेंट कहीं भी पूरा नहीं होता। संभाग के 33 कॉलेजों में से 13 कॉलेज ही ऐसे हैं जहां पीजी संकाय संचालित है। यहां 4 हजार 490 सीटें हैं। हर 6 महीने में पीजी विद्यार्थियों की परीक्षाएं करवाने में शिक्षकों की ड्यूटी लगेगी। जिससे बीए, बीएससी, बीकॉम के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी और सिलेबस भी समय पर पूरा नहीं होगा। 

अभी सेमेस्टर सिस्टम लागू नहीं हुआ
कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा इस वर्ष से आर्ट्स व कॉमर्स के पीजी संकाय में सेमेस्टर सिस्टम लागू करने की तैयारी में है, नियमित विद्यार्थी ही इसके दायरे में होंगे जबकि, स्वयंपाठी स्टूडेंट्स सेमेस्टर प्रणाली से मुक्त रहेंगे। लेकिन, अभी तक संभाग के किसी भी राजकीय कॉलेज में सेमेस्टर प्रणाली लागू नहीं हुई है। वर्तमान में केवल साइंस संकाय के पीजी कोर्स में ही सेमेस्टर सिस्टम चल रहा है। 
- रघुराज सिंह परिहार, सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय

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