नदी में बढ़ा प्रदूषण का स्तर, जलीय जीवों को खतरा

नदी में उफान व प्रतिमाओं के विसर्जन ने बढ़ाया प्रदूषण

नदी में बढ़ा प्रदूषण का स्तर, जलीय जीवों को खतरा

शहर का आधा गंदा पानी नालों के माध्यम से चंबल नदी में गिर रहा है। इससे जलीय जीवों के जीवन पर संकट के बादल छाए हैं। इसके बावजूद गंदे पानी को चंबल नदी में जाने से रोकने के लिए किसी ने पहल नहीं की है। इससे चंबल दूषित होती जा रही है। शहर से निकलने वाला गंदा पानी डेÑनों के माध्यम से चंबल नदी में समाहित हो रहा है। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है।

कोटा। बारिश के लम्बे दौर और गत दिनों मूर्तियों के विसर्जन के चलते चंबल नदी  प्रदूषण की चपेट में आ गई है। पूर्व में चंबल नदी का पानी स्वच्छता की श्रेणी में आ गया था। अब फिर से नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। नदी में स्वच्छ पानी होने के कारण ही इससे जुड़े कुछ क्षेत्र को घड़ियाल अभयारण्य संरक्षित क्षेत्र घोषित किया हुआ है। घड़ियाल स्वच्छ पानी में ही निवास करते हैं। चंबल नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से घड़ियाल सहित अन्य जलीय जीवों के जीवन पर संकट हो जाता है। कोटा जिले से होकर गुजर रही देश की सबसे साफ नदी में शुमार चंबल नदी में शहर का लाखों लीटर गंदा पानी घुल रहा है। जानकारी के मुताबिक शहर का आधा गंदा पानी नालों के माध्यम से चंबल नदी में गिर रहा है। इससे जलीय जीवों के जीवन पर संकट के बादल छाए हैं। इसके बावजूद गंदे पानी को चंबल नदी में जाने से रोकने के लिए किसी ने पहल नहीं की है। इससे चंबल दूषित होती जा रही है। शहर से निकलने वाला गंदा पानी डेÑनों के माध्यम से चंबल नदी में समाहित हो रहा है। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। 

प्रतिमा विसर्जन से बढ़ा प्रदूषण
दस दिवसीय गणेश महोत्सव के समापन पर गत दिनों चंबल नदी में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया था। महोत्सव से पूर्व ही प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने नगर निगम को पत्र लिखकर प्रदूषित श्रेणी में शामिल प्रतिमाओं के चंबल में विसर्जन रोकने को कहा था, लेकिन शहर में अन्य कोई जलस्रोत नहीं होने से प्रतिमाओं को चंबल में ही विसर्जित किया गया था। इस कारण नदी का प्रदूषण और बढ़ गया है। इस बार मानसून की सक्रियता से लगातार बारिश का दौर चला था। ऐसे में बांधों से पानी छोड़ा गया था। इस कारण भी चंबल नदी के प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। 

ऐसे नापा जाता है जल प्रदूषण
जल प्रदूषण की मात्रा को बॉयोलाजिकल आॅक्सीजन डिमांड यानि बीओडी के माध्यम से मापा जाता है। आॅक्सीजन की वह मात्रा जो जल में कार्बनिक पदार्थो के जैव रासायनिक अपघटन के लिए आवश्यक होती वह बीओडी कहलाती है। पानी की शुद्धता के लिए बीओडी का मानक स्तर 3 मिलीग्राम है, जबकि चंबल नदी में बीओडी की मात्रा 5 मिलीग्राम पर पहुंच गई है। इससे चंबल नदी में प्रदूषण बढ़ा है। 

इनका कहना है
 चंबल को बचाने के लिए सभी वर्गो को सहयोग करना होगा। नदी में गंदा पानी छोड़ना काफी गंभीर विषय है। इस नदी में यदि इसी तरह गंदा पानी मिलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब इस नदी में रहने वाले जलीय जीवों का तो नामोनिशान मिट ही जाएगा। साथ ही लोगों को मिल रहा पीने का स्वच्छ पानी का स्रोत भी समाप्त हो जाएगा। चंबल नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ अच्छी संख्या में हैं और उनकी संख्या में और वृद्धि करने के प्रयास चल रहे हैं। ऐसे में चंबल को शुद्ध रखना बेहद जरूरी है।
-राकेश कुमार, पर्यावरणविद्

 पूर्व में चंंबल नदी का पानी स्वच्छता के मानक पर खरा उतर रहा था। इस बार लगातार बारिश से नदी में आए उफान के कारण नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। वहीं प्रतिमाओं के विसर्जन ने भी प्रदूषण में बढ़ोतरी की गई। प्रदूषण नियंत्रण मंडल समय-समय पर लोगों को इस सम्बंध में जागरुक करता रहता है। जल प्रदूषण का बढ़ता स्तर जलीय जीवों के लिए भी खतरा है।
-अमित सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण मंडल

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