नामीबिया से चीते आ सकते हैं, तो रणथम्भौर से बाघ क्यों नहीं

मुकुंदरा रिजर्व राजनीति षड़यंत्र का शिकार

नामीबिया से चीते आ सकते हैं, तो रणथम्भौर से बाघ क्यों नहीं

मुकुंदरा बाघों की बसावट व आबादी के लिए प्राकृतिक व मुफीद वन्यक्षेत्र हैं। बाघों का कुनबा बढ़ाने व उन्हें सुरक्षित माहौल देने के लिहाज से मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व किसी जन्नत से कम नहीं। इसके बावजूद यहां टाइगर नहीं है।

कोटा। 9 हजार किमी दूर अफ्रीका महाद्वीप के नामीबिया से 8 चीते रातोंरात भारत लाए जा सकते हैं, तो फिर 134 किमी दूर रणथम्भौर से टाइगर मुकुंदरा में क्यों नहीं ला सकते। मुकुंदरा रिजर्व राजनीति षड़यंत्र का शिकार है, दिग्गज राजनेताओं में इच्छा शक्ति का आभाव वन विभाग के टॉप मैनेजमेंट में बैठे आला अफसरों की निष्क्रियता इसके लिए जिम्मेदार है। ऐसे तमाम सवाल कोटावासियों व वन्यजीव प्रेमियों के मन में कौंध रहे हैं। 2 साल से रिजर्व अधिकारी बाघ बसाने को लेकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। कभी एनटीसीए की आपत्ती, स्टाफ की कमी तो कभी पर्याप्त प्री-बेस न होने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी इतने उस्ताद हैं, कि जब बहाना पुराना होने लगे और बाघ लाने का दबाव बढ़ने लगे तो एनटीसी की मौखिक व लिखित स्वीकृति का हवाला देकर एक और नया बहाना जनता को चेप देते हैं। हर सूरत में एनटीसी के माथे पर ही दोष मढ़ अपनी जान छुड़ाते हैं। जबकि, मुकुंदरा बाघों की बसावट व आबादी के लिए प्राकृतिक व मुफीद वन्यक्षेत्र हैं। बाघों का कुनबा बढ़ाने व उन्हें सुरक्षित माहौल देने के लिहाज से मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व किसी जन्नत से कम नहीं। इसके बावजूद यहां टाइगर नहीं है।  

वनकर्मियों का टोटा
-112 में से 77 वन रक्षकों के पद रिक्त 
मुकुंदरा में कुल 164 वनकर्मियों के पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 90 कर्मचारियों के पद रिक्त हैं। वहीं, 112 में से 77 वनरक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में मात्र 35 वनरक्षक ही कार्यरत हैं, जिनसे रिजर्व की सुरक्षा करवाई जा रही है, जो किसी भी सूरत में संभव नहीं है। कई रेंज ऐसी हैं जो वन्यजीवों की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वहां नजर रखने के लिए पर्याप्त गार्ड ही नहीं है। ऐसे में शिकारियों व संदिग्धों की घुसपैठ होने से इंकार नहीं किया जा सकता।  

मुकुंदरा को बर्बाद करने पर तुले अफसर
-4 रेंजों में एक भी रेंजर नहीं
टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में रेंजर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। जंगल में अवैध गतिविधियां, अतिक्रमण, संदिग्धों व शिकारियों की घुसपैठ रोकना, वन्यजीवों की निगरानी, मॉनिटरिंग व ट्रैकिंग सहित अन्य कार्य रेंजर के जिम्मे होता है। लेकिन मुकुंदरा की 6 में से 4 रेंज दरा, राउठां, गागरोन व बोराबांस में एक भी रेंजर नहीं है। यहां लंबे समय से 4 रेंजरों के पद रिक्त पड़े हैं। जबकि, एक रेंज ही हजारों हैक्टेयर के दायरे में होती है। रेंजर के अभाव में वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में रहती है। वन विभाग की खामियों का फायदा अवैध गतिविधियों में लिप्त लोग उठा रहे हैं। हालांकि, कोलीपुरा व जवाहर सागर में ही एक-एक रेंजर है। 

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15 हजार हैक्टेयर में 4 गार्ड तैनात 
वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग कितना गंभीर है, इसका अंदाजा 6 रेंजों में से सबसे बड़ी  दरा और जवाहर सागर रेंजों में फोरेस्ट गार्डों की तैनाती से लगाया जा सकता है। दरा रेंज 15 हजार 764 हैक्टेयर में फैली है। जबकि, इसकी सुरक्षा के लिए यहां मात्र 4 वनरक्षक ही तैनात हैं। जबकि, प्रत्येक रेंज में 20-20 वनरक्षक होना चाहिए। इसी वजह से पेड़ों की अवैध कटाई, अतिक्रमण सहित मानवीय दखल बढ़ रहा है। जवाहर सागर रेंज भी यही कहानी है। 

वन विभाग की कार्यशैली पर उठते सवाल
जीपीएस बेस्ड कॉलर से चीतों की नामीबिया तक मॉनिटरिंग तो मुकुंदरा में एमटी-1 की क्यों नहीं ?
मध्यप्रदेश के पीसीसीएफ प्रधान मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान का कहना है चीतों के गले पर सैटेलाइट कॉलर लगाया है, जिससे चीतों की पल-पल की गतिविधियों की जानकारी नामीबिया में बैठे एक्सपर्ट को मिलती रहेगी। वहां के अधिकारी लगातार चीतों की मॉनिटरिंग कर सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि 9 हजार किमी दूर बैठे अधिकारी चीतों पर निगरानी कर सकते हैं तो फिर मुकुंदरा में बाघ एमटी-1 की निगरानी क्यों नहीं की गई।  जबकि, उसके गले पर भी जीपीएस बेस्ड रेडियो कॉलर लगा था। इतना ही नहीं, रेडियो कॉलर की बैट्री खराब होने की जानकारी होते हुए भी डीएफओ व तत्कालीन सीसीएफ ने बैट्री बदलने तक के प्रयास नहीं किए। नतीजन, एमटी-1 रातोंरात कहां गायब हो गया, जिसका आज तक सुराग नहीं लग सका। 

3 करोड़ का सर्विलांस, लाखों के 16 कैमरा टावर , फिर क्यों नहीं लगा सुराग ?
मुकुंदरा टाइगर रिर्जव 760 वर्ग किमी में फैला हुआ है। पूरे रिजर्व को कवर करने के लिए 6 रेंजों में बांटा गया है। जिसमें दरा, जवाहर सागर, कोलीपुरा, रावंठा, बोराबांस व गागरोन रेंज शामिल है। टाइगर रिजर्व पर निगरानी के लिए 3 करोड़ की लागत से एक ई-सर्विलांस एंड एंटी पोचिंग सिस्टम और 16 कमैरा टावर लगे हैं। दरा रेंज में ही सर्विलांस लगा है, जिससे सभी रेंजों में लगे कैमरा टावर जुड़े हैं। इसकी मॉनीटरिंग डीओआईटी डिपार्टमेंट करता है। इसके लिए यहां सेंटलाइज कमाण्ड सेंटर बना हुआ है। जिससे 24 घंटे जंगल की एक-एक गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। सभी कैमरे टावर नाइट विजन होने के साथ थर्मल स्क्रीनिंग हैं। अत्याघुनिक तकनीक से लेस होने बावजूद टाइगर व शावक गायब हो गए।

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एक्सपर्ट व्यू
राजनीति इच्छाशक्ति हो तो रणथम्भौर क्या दुनिया के किसी भी कौने से टाइगर ला सकते हैं। नामीबिया से चीतों का लाना इसका श्रेष्ठ उदारहण है। मुकुंदरा अधिकारियों की तैयारियां अधूरी है। एनटीसीए की दो शर्त है, पहली-500 चीतल लाए जाए और दूसरी- मुकुंदरा में बसे 12 गांवों में से एक गांव का पूरी तरह से विस्थापन कर दें तो टाइगर ला सकते हैं। दोनों ही शर्त मुकुंदरा प्रशासन पूरी नहीं कर पा रहा। 
-तपेश्वर सिंह भाटी, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट

एनटीसीए की आड़ में मुकुंदरा अधिकारी जनता को गुमराह कर रहे हैं। लगातार दो साल से बाघ लाने की तैयारियां की जा रही है जो अभी तक पूरी नहीं हो सकी। हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर टाल रहे हैं, असल में बाघ की 24 घंटे मॉनिटरिंग करनी होती है, जिसके लिए पर्याप्त स्टाफ ही नहीं है। जिसके कारण अधिकारी बाघ लाने से बच रहे हैं, ऐसा प्रतीत होता है। 
- डॉ. सुघीर गुप्ता, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट

मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व राजनीति षड़यंत्र का शिकार है। कोटा के दिग्गज राजनेताओं व वन विभाग के आला अफसरों की उपेक्षा के चलते मुकुंदरा में टाइगर नहीं आ पा रहा। जबकि, रणथम्भौर की परिधी से बाहर कई टाइगर घूम रहे हैं। करौली व गंगापुर के पास टाइगर की मौजूदगी बनी हुई है। दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी के चलते बाघ लाने में देरी हो रही है। 
- धर्मेंद्र, खांडल, रिसर्च बायोलोजिस्ट

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एनटीसीए ने स्पष्ट किया है कि रणथम्भौर की परिधि क्षेत्र से बाहर घूम रहे टाइगरों को किसी अन्य रिजर्व में शिफ्ट कर सकते हैं। मुकुंदरा प्रशासन भी टाइगर लाने की तैयारी में है लेकिन सबसे बड़ी बाघा गांवों का विस्थापन न होना है। जंगल में लगातार मानव दखल बढ़ रहा है। स्टाफ की कमी से पोचिंग का खतरा रहता है। जब तब गांवों का विस्थापन नहीं होगा तब तक बाघ लाने में परेशानी होगी। 
- कृष्णेंद्र सिंह नामा, रिसर्च सुपर वाइजर

मुकुंदरा में बाघ लाने की कोशिश लगातार जारी है। हाल ही में एनटीसीए की तकनीकी टीम से टाइगर लाने की मौखिक स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन लिखित स्वीकृति का इंतजार है। हालांकि बाघ लाने की तैयारियां पूरी कर ली गई है। जैसे ही लिखित परमिशन मिलती है,वैसे ही रणथम्भौर से बाघ ले आएंगे।  
- एसपी सिंह, सीसीएफ मुकुंदरा टाइगर रिजर्व कोटा

 

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