300 करोड़ से होगा जर्जर स्कूलों का कायाकल्प

सरकारी स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन का बढ़ रहा दायरा

300 करोड़ से होगा जर्जर स्कूलों का कायाकल्प

सरकारी स्कूलों में बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी व कोचिंग करवाना शामिल हैं। इसके अलावा नि:पाठयपुस्तक, साइकिल, स्कूटी, यूनिफॉर्म, मिड-डे मील, मींस स्कोलर शिप, गार्गी पुरस्कार व काली बाई योजना के तहत छात्राओं को नि:शुल्क स्कूटियां वितरित की जाती है।

कोटा। राजस्थान सरकार सरकारी स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए गंभीर है। सरकार का पूरा फोकस चहुंओर शिक्षा का उजियारा करने को है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसके लिए बड़े स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही नए-नए नवाचार भी किए जा रहे हैं। जिसकी झलक बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में सामने आए हैं। सरकारी स्कूलों का रिजल्ट अन्य स्कूलों के मुकाबले बेहतर रहा है। वहीं, जर्जर हो रहे स्कूलों का कायाकल्प करने के लिए 250-300 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। जिसके तहत प्रदेशभर में खस्ताहाल स्कूलों को चिन्हित कर उनका इंस्फ्रास्ट्रेक्चर मजबूत किया जाएगा।  इसके लिए सभी जिलों से सूचनाएं मांगी जा रही है। जहां भी जर्जर स्कूल भवन हैं, उनका पहली प्राथमिकता से काया कल्प किया जाएगा। यह जानकारी गुरूवार को यूआईटी आॅडिटोरियम में सीएफसीएल की ओर से आयोजित समवर्तिका कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पवन कुमार गोयल  ने दैनिक नवज्योति से साझा की। अतिरिक्त मुख्य सचिव गोयल ने कहा, सरकारी स्कूलों में बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी व कोचिंग करवाना शामिल हैं। इसके अलावा नि:पाठयपुस्तक, साइकिल, स्कूटी, यूनिफॉर्म, मिड-डे मील, मींस स्कोलर शिप, गार्गी पुरस्कार व काली बाई योजना के तहत छात्राओं को नि:शुल्क स्कूटियां वितरित की जाती है।  

खत्म होगा लाखों बच्चों का यूनिफॉर्म का इंतजार
शिक्षा विभाग का नया सत्र शुरू हुए करीब तीन माह का समय हो गया है। प्रदेशभर के सैंकड़ों विद्यार्थियों का स्कूल यूनिफॉर्म का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। अतिरिक्त मुख्य सचिव गोयल ने कहा कि अक्टूबर माह में सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों को यूनिफॉर्म मिल जाएगी। सरकार ने इसके लिए बजट जारी कर दिया है। गौरतलब है कि कोटा जिले के 1 हजार 374 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8वीं तक के 1 लाख 18 हजार 905 बच्चों को तीन माह से स्कूल ड्रेस नहीं मिल पाई है। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को दो-दो स्कूल ड्रेस देने की घोषणा की गई थी, जो इस सत्र से देनी थी। सरकार के स्तर पर विद्यार्थियों की ड्रेस के लिए कपड़ा प्रदान किया जाना था, जबकि सिलाने की जिम्मेदारी स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की तय की गई थी। इसके लिए 30 जुलाई तक राजकीय स्कूलों में नामांकन करवाने वाले बच्चों का रिकॉर्ड भी शिक्षा विभाग से मांगा था। विभाग ने रिकॉर्ड तो भिजवा दिया, लेकिन सरकार अब तक ड्रेस के लिए कपड़ा नहीं भिजवा पाई है। सरकार की इस घोषणा के चलते अभिभावक भी असमंजस में है और बच्चों की स्कूल ड्रेस तक नहीं सिलवा पा रहे हैं।

6ठी से 8वीं तक की छात्राओं को मिलेगा दुपट्टा
राजस्थान स्कूल शिक्षा अभियान के तहत मिलने वाली दो ड्रेस के लिए प्रत्येक विद्यार्थी पर 600 रुपए के बजट का प्रावधान किया गया था। छात्रों को हल्की नीले शर्ट व गहरी भूरी नेकर या पेंट दी जानी है। छात्राओं को हल्की नीली शर्ट या कुर्ता, गहरी भूरी सलवार या स्कर्ट दी जाएगी। कक्षा पांच तक छात्राओं को दुपटटा नहीं दिया जाएगा। जबकि कक्षा छह से आठ तक की छात्राओं को गहरी भूरा दुपट्टा (चुन्नी) दिया जाना है। पांचवीं तक के छात्रों को शर्ट व नेकर, छह से आठ तक शर्ट और पेंट देने की योजना थी। प्रति विद्यार्थी सरकार अधिकतम 600 रु. खर्च करेगी, इसमें दो यूनिफार्म के कपड़े की कीमत 425 रुपए तय की गई है, जबकि स्कूल कमेटी को सिलाई के लिए 175 रुपए दिए जाने हैं।

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