अस्पतालों में हर माह 30 हजार एजीथ्रोमाइसिन की हो रही खपत

संक्रमण कम होने के बाद भी बदस्तूर जारी

अस्पतालों में हर माह 30 हजार एजीथ्रोमाइसिन की हो रही खपत

महामारी के दौर में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल सामान्य से बहुत अधिक हुआ है। जिसके दुष्परिणाम अब आ रहे है। कई लोगों के एजीथ्रोमासिन अब असदार नहीं रही है। जबकि अस्पताल में डॉक्टर सर्दी जुकाम और खांसी के मरीजों को भी एजीथ्रोमासिन ले रहे है।

 कोटा। कोरोना काल के दौरान मनमर्जी से अंधाधुंध दवाइयां लेने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह संक्रमण कम होने के बाद भी बदस्तूर जारी है। डॉक्टर से लेकर दवा विक्रेता तक कोरोना के दौरान दी गई एंटीबायोटिक दवाएं अभी धड़ल्ले से लिख रहे हैं जिससे लोगों की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होने लगी है। कोरोना काल में सबसे ज्यादा एजीथ्रोमाइसिन टेबलेट मरीजों को दी गई वो संक्रमण कम होने के बाद भी लगातार दी जा रही है। जहां कोरोना काल में कोविड की शुरुआत से अब तक के दो साल में कोटा जिला एजीथ्रोमाइसिन की करीब 20 लाख टैबलेट खा चुके हैं। लोगों ने बिना डॉक्टर की सलाह पर भी यह दवा खूब ले रहे हैं मौसमी बीमारियों के सीजन में डॉक्टरों ने ऐसा आॅब्जर्व किया है कि 30 से 35 प्रतिशत मरीजों में एजीथ्रोमाइसिन बेअसर हो रही है। आम तौर पर तीन दिन यह दवा देने पर आराम मिल जाता था, लेकिन अब दूसरे सपोर्टिंग एंटीबायोटिक देने पड़ रहे हैं। कोरोना संक्रमण के मरीज कम होने के बाद भी  हर माह 30 हजार एजीथ्रोमाइसिन खपत हो रही है।  

इन बीमारियों के इलाज पर पड़ रहा असर
डॉ. जगदीश कुमार सोनी ने बताया कि  एंटीबायोटिक के अत्यधिक इस्तेमाल से रेजिस्टेंट के कारण सामान्य चोट और आमतौर पर होने वाले संक्रमण जैसे निमोनिया आदि को ठीक करना भी मुश्किल हो लगा है। ऐसे में ये बीमारियां भी गंभीर और जानलेवा रूप ले सकती हैं। महामारी के दौर में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल सामान्य से बहुत अधिक हुआ है। जिसके दुष्परिणाम अब आ रहे है। कई लोगों के एजीथ्रोमासिन अब असदार नहीं रही है। जबकि अस्पताल में डॉक्टर सर्दी जुकाम और खांसी के मरीजों को भी एजीथ्रोमासिन ले रहे है। जिससे लोगों अब रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगी और इस दवा का असर कम हो रहा है। इसके साथ अब दूसरी एंटीबायोटिक दवा देने पड़ रही है। 

दवा प्रतिरोधी संक्रमण बढ़ने का खतरा 
डॉ. अभिमन्यु शर्मा ने बताया कि कोविड-19 के दौरान एजिथ्रोमाइसिन, डॉक्सीसाइक्लिन, फेरोपेन जैसी एंटीबायोटिक दवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल से लोगों में एंटीबायोटिक रजिस्टेंस इंफेक्शन दवा प्रतिरोधी संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। कोविड से लेकर मौसमी बीमारी में एजीथ्रोमाइसिन का अंधाधुंध यूज किया जा रहा है। अब तो हालात यह हो गए हैं कि  लोग  बिना डॉक्टर की सलाह पर भी यह दवा  लेने लगे हंै। शहर के विभिन्न मेडिकल स्टोर पर भी बिना पर्चे ये दवा आसानी से उपलब्ध हो रही है। जबकि किसी भी एंटीबायोटिक का बहुत ज्यादा प्रयोग करना अगले कुछ सालों में उस दवा को खत्म करने जैसा है। एजीथ्रोमाइसिन का एसिम्प्टोमेटिक और माइल्ड कैटेगिरी के कोविड मरीजों में अच्छा रेस्पोंस रहा था, ऐसे में सामान्य खांसी, जुकाम व गले में खराश पर भी लोगों ने यही दवा ली। मेडिकल स्टोर से लोग लक्षण बताकर इस दवा का धड़ल्ले से यूज कर रहे हंै। 

कोरोना काल में हर माह 70 हजार एजीथ्रोमाइसिन टैबलेट की खपत होती थी। वहीं अभी 30 हजार गोली की खपत हो रही है। 50 हजार पेरासिटामोल गोली, एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलनेट 10 हजार गोली हर माह खपत हो रही है। इसके अलावा सर्दी जुकाम, खांसी, एसीडिटी, गैस की गोलियों की अच्छी खपत होती है।
-डॉ. सुनील सोनी, प्रभारी औषधि भंडार मेडिकल कॉलेज कोटा

कोरोना में खायी 70 हजार, अब खा रहे 30 हजार हर माह
कोरोना काल में ड्रग वेयर हाउस से हर 70-80 हजार एजीथ्रोमाइसिन टैबलेट की खपत हो रही थी। संक्रमण कम होने के बावजूद अभी  भी एंटीबायोटिक दवाओं खपत 30 हजार टेबलेट ही कम हुई है। अभी 30 हजार गोली हर माह एजीथ्रोमाइसिन की खपत हो रही है। एजीथ्रोमाइसिन का देश में टाइफाइड बुखार और दस्त के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण दवा रूप में इस्तेमाल होता था लेकिन कोविड के बाद इसका प्रयोग संक्रमण की रोकथाम में किया जा रहा है। एजीÞथ्रोमाइसिन के अनावश्यक उपयोग से इन दोनों बीमारियों का कारण बनने वाले जीवाणुओं में प्रतिरोध पैदा होगा। नतीजतन, ऐसे रोगियों को संभालने के लिए हमेशा अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होगी। काबार्पेनम एंटीबायोटिक्स को अंतिम उपाय एंटीबायोटिक माना जाता है जो अस्पतालों में गंभीर संक्रमण के इलाज के लिए आवश्यक हैं।
-डॉ. शिव चरण जेलिया, प्राचार्य व विभागाध्यक्ष मेडिसन विभाग न्यू मेडिकल अस्पताल कोटा

एजीथ्रोमाइसिन का कोविड के बाद से यूज बढ़ा
कोरोना काल के बाद से एजीथ्रोमाइसिन का उपयोग बढ़ा है। यह बहुत लॉजिकल और स्वाभाविक है कि जब भी कोई एंटीबायोटिक का धड़ल्ले से यूज होता है तो उसका रेजिस्टेंस डवलप होने लगता है। एजीथ्रोमाइसिन के मामले में भी ऐसा ही हो रहा है।  एंटीबायोटिक के दुरुपयोग को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए। एंटीबायोटिक्स को मेडिकल प्रिसक्रिप्शन होने पर ही दिया जाना चाहिए। इसके अधिक और बेवजह इस्तेमाल पर नियंत्रण की आवश्यकता है। इसको लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने की आवश्यकता है। इसके गलत इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को बताना होगा। डॉक्टरों के लिए भी कम से कम एंटी बायोटिक लिखने की गाइड लाइन आ चुकी उसकी पालना सख्ती से होने की आवश्यकता है। वायरल और समान्य बुखार में 90 प्रतिशत एंटीबायोटिक आवश्यकता नहीं होती फिर डॉक्टर लिख रहे है। 
-डॉ. ओपी मीणा, एमडी मेडिसन एमबीएस अस्पताल कोटा

सभी डॉक्टरों को निर्देश दिए है आवश्यक होने पर ही एंटीबायोटिक वो भी तय समय सीमा दे। लोगों को भी बिना डॉक्टर सलाह के कैमिस्ट से सीधे दवा नहीं लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है। अस्पताल दिखाकर पर्ची में लिखी दवा की मात्रा और अवधि निर्देशानुसार औषिधियों का सेवन करने शीघ्र स्वस्थ्य तो होते ही रोगप्रतिरोधक क्षमता भी खत्म नहीं होती है। 
-डॉ. जगदीश सोनी, सीएमएचओ कोटा 

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