शॉर्ट सर्किट से शहर में लग रही ‘आग’

ग्रामीण की तुलना में शहर में 9 गुना अधिक हुई आग जनित घटनाएं

शॉर्ट सर्किट से शहर में लग रही ‘आग’

नगर निगम के अग्निशमन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2019-20 में आग लगने की कुल 506 घटनाएं हुई थी। जिनमें से शहर में 468 व ग्रामीण में 38 घटनाएं हई। वर्ष 2020-21 में कुल 387 घटनाएं हुई। जिनमें 330 शहरी क्षेत्र में और 57 ग्रामीण क्षेत्र में हुई। वहीं वर्ष 2021-22 में कुल 382 घटनाएं हुई जिनमें से शहरी क्षेत्र में 363 व ग्रामीण क्षेत्र में 29 घटनाएं हुई हैं।

कोटा। गर्मी में तो आग लगने की घटनाएं अधिक होती ही हैं। लेकिन इन दिनों शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सर्दी के मौसम में भी आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। हालांकि कोटा जिले में पिछले तीन साल में आग जनित जितनी घटनाएं हुई हैं उनमें से ग्रामीण की तुलना में 9 गुना अधिक घटनाएं शहर में हुई हैं। शहर में गत दिनों एक के बाद एक लगातार आग लगने की कई घटनाएं हुई हैं। जिनमें दुकान से लेकर मकान में रखे गैस सिलेंडर में और वाहनों तक में आग की घटनाएं हुई हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में खेत के पराल में आग लगने की घटनाएं अधिक हुई हैं। कोटा जिले में वर्ष 2019 से 2022 तक में आग लगने की कुल 1275 घटनाएं हुई हैं। जिनमें से 124 घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में हुई हैं। जिनमें नुकसान तो लाखों रुपए का हुआ है लेकिन गनीमत रही कि समय रहते आग पर काबू पाने से कोई जन हानि नहीं हुई है। 

यह है तीन साल की स्थिति
नगर निगम के अग्निशमन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2019-20 में आग लगने की कुल 506 घटनाएं हुई थी। जिनमें से शहर में 468 व ग्रामीण में 38 घटनाएं हई। वर्ष 2020-21 में कुल 387 घटनाएं हुई। जिनमें 330 शहरी क्षेत्र में और 57 ग्रामीण क्षेत्र में हुई। वहीं वर्ष 2021-22  में कुल 382 घटनाएं हुई जिनमें से शहरी क्षेत्र में 363 व ग्रामीण क्षेत्र में 29 घटनाएं हुई हैं। 

अधिकतर शॉर्टसर्किट से लगी
शहर में आग लगने की अधिकतर घटनाओं का कारण शार्ट सर्किट ही सामने आया है। मकान में आग लगी तब भी अचानक शॉर्ट सर्किट से लगी। वाहन में आग लगने की घटनाएं स्पार्किंग से लगना सामने आया है। शहर में हॉस्टलों में भी आग लगने की जो घटनाएं हुई हैं उनमें भी शॉर्ट सर्किट से ही आग लगना बताया गया है। गत दिनों गुमानपुरा स्थित ब्रेकरी की दुकान में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। गुमानपुरा स्थित एक मॉल में पांचवी मंजिल पर भी आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट ही आया था। 

घरों व इमारतों में आग बुझाने के संसाधन नहीं
कोटा शहर में जहां आबादी बढ़ने के साथ ही शहर का विकास व विस्तार हो रहा है। ऐसे में अधिकतर बहुमंजिला इमारतें बनाई जा रही हैं। हालांकि ये इमारतें शहर व उसके आस-पास के क्षेत्रों में हैं। जिनमें से आवासीय से अधिक व्यवसायिक इमारतें हैं। जिनमें मॉल, हॉस्टल व होटल भी शामिल हैं। निगम सूत्रों के अनुसार अधिकतर मकानों व इमारतों में आग बुझाने के संसाधन नहीं होने से घटनाओं में अधिक नुकसान होता है। 

निगम के पास पर्याप्त संसाधन
हमेशा से संसाधनों की कमी से जूझते रहे नगर निगम के अग् िनशमन बेड़े में वर्तमान में संसाधन पर्याप्त हैं। जिनमें फायरमैन से लेकर दमकल तक की कोई कमी नहीं है।  नगर निगम कोटा उत्तर  व कोटा दक्षिण में कुल 70 फायरमेन हैं। इनके अलावा सिविल डिफेंस के सवयं सेवक भी लिए गए हैं। निगम में वर्तमान में 4 फायर स्टेशन हैं। जिनमें से एक कोटा उत्तर में सब्जीमंडी और तीन कोटा दक्षिण में श्रीनाथपुरम्, भामाशाह मंडी व रानपुर में। दोनों निगमों में कुल 36 छोटी बड़ी दमकलें हैं। साथ ही दो बड़ी हाईड्रोलिक लेडर दमकलें भी हैं। 

सूचना मिलते ही तुरंत रवाना की जाती है दमकल
 शहर के विस्तार को देखते हुए कोटा में उत्तर-दक्षिण निगम बनाए गए हैं। लेकिन फायर में यह नहीं देखा जाता। आग लगने की सूचना मिलते ही तुरंत नजदीकी फायर स्टेशन से दमकल रवाना कर दी जाती है। उसकी पुष्टि तक नहीं करते। आग अधिक बड़ी होने पर संबंधित क्षेत्र कीदमकलें भी बुला ली जाती हैं। वर्तमान में फायर अनुभाग में फायरमैन से लेकर दमकल तक सभी पर्याप्त संख्या में हैं। शहर में आग लगने का अधिकतर कारण शार्ट सर्किट व ओवर हीटिंग ही सामने आए हैं। जबकि ग्रामीण में खेत खलिहानों में रखे पराल में ही आग लगने की घटनाएं अधिक हुई हैं। आग लगने पर जितनी जल्दी उस पर काबू पाने का प्रयास होगा उतना नुकसान कम होगा। निगम के फायर अनुभाग के साथ ही लोगों को स्वयं भी जागरूक रहकर अपने यहां आग बुझाने की संसाधन रखने चाहिए। 
- राकेश व्यास, सीएफओ, नगर निगम कोटा उत्तर

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