सावधान! कोरोना फिर फैल रहा है, तीसरी लहर की ओर राजस्थान

सावधान! कोरोना फिर फैल रहा है, तीसरी लहर की ओर राजस्थान

रविवार को 170 दिन बाद 62 नए रोगी आए, अकेले जयपुर में 46 मरीज, ओमिक्रॉन वेरिएंट से सर्वाधिक खतरा, 21 दिन में 43 रोगी मिल चुके हैं

जयपुर। राजस्थान में कोरोना की तीसरी लहर की आहट अब साफ दिखने लगी है। प्रदेश में रविवार को 170 दिन बाद एक दिन में 62 नए रोगी सामने आए हैं। इससे पहले 9 जुलाई को राजस्थान में एक दिन में 62 केस आए थे। इसके बाद एक दिन में इतने रोगी कभी नहीं आए। इनमें भी जयपुर में सबसे ज्यादा चिंता की स्थितियां दिख रही है। इन नए रोगियों में अकेले जयपुर में ही 22 अलग-अलग इलाकों में 46 नए संक्रमित हैं। इसके अलावा अन्य 7 जिलों में उदयपुर में 4, बीकानेर, गंगानगर में 3-3, प्रतापगढ़, अजमेर में 2-2, सीकर, जोधपुर में 1-1 नए केस आए हैं। राजस्थान में कोरोना की लहर का सबसे बड़ा खतरा इस बार ओमिक्रॉन वेरिएंट से हैं। प्रदेश में 5 दिसम्बर को पहली बार साऊथ अफ्रीका की फैमिली सहित उनके संपर्क में आए 9 लोग जयपुर में संक्रमित मिले थे। इसके बाद 21 दिन में राजस्थान में 43 ओमिक्रॉन संक्रमितों की पहचान हो चुकी है। इनमें जयपुर में 28, सीकर में 4, अजमेर में 7, उदयपुर में 3 और एक महाराष्टÑ से आया व्यक्ति संक्रमित मिल चुका है। जयपुर में सर्वाधिक ओमिक्रॉन केस हैं और यहीं सर्वाधिक कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं, ऐसे में जयपुर में सबसे पहले संक्रमण के तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है।  


इस बार बड़ी चुनौती: संक्रमित बढ़े तो ओमिक्रॉन मरीजों का पता लगाना भी मुश्किल होगा
प्रदेश में केसों की संख्या बढ़ी तो यह पता लगाना भी मुश्किल होगा कि इनमें ओमिक्रॉन वेरिएंट के संक्रमित केस कितने हैं। क्योंकि प्रदेश में अभी केवल जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में रोजाना मात्र 80 सैंपलों की जीनोम सिक्वेंसिंग की क्षमता है। कुछ सैंपलों की जांच महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में भी हो रही है। चूंकि ओमिक्रॉन के अधिकांशत: केस लक्षण विहीन है, ऐसे में रोगी को संक्रमित होने की जानकारी भी नहीं होगी। डेल्टा वेरिएंट से 7 गुना ज्यादा संक्रमण दर होने से तेजी से दूसरे लोगों में फैलेगा। ऐसे में इनकी पहचान करना ही सबसे बड़ी चुनौती इस बार प्रदेश के चिकित्सा विभाग के सामने होगी।

15 से 18 साल के किशोरों का कोरोना टीकाकरण 51 लाख को मिलेगा सुरक्षा कवच
अभी बच्चों के लिए कोवैक्सीन को ही मंजूरी, सेंटरों-स्कूलों में जाकर लगाने की तैयारी

कोरोना की तीसरी लहर में 15 से 18 साल के बच्चों को 3 जनवरी से कोरोना टीकाकरण से सुरक्षा कवच देने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी की घोषणा के बाद राजस्थान में इसकी तैयारियां शुरू हो गई है। प्रदेश में इस आयु वर्ग के करीब 51.12 लाख बच्चे हैं। चिकित्सा विभाग की कोविड टीकाकरण में जुटी सेल ने इनके आंकड़े जुटाकर इन्हें मौजूदा वैक्सीनेशन सेंटरों के साथ ही स्कूलों में जाकर डोज देने का प्रारम्भिक प्लान तैयार किया है। चूंकि देश में अभी तक भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को ही बच्चों के उपयोग के लिए मंजूरी दी है, ऐसे में  प्रदेश में इससे ही बच्चों के टीकाकरण की शुरुआत होगी। प्रदेश में फिलहाल इसकी करीब 5 लाख से अधिक डोज उपलब्ध है।


12.38  लाख से अधिक हेल्थ-फ्रंटलाइन वर्कर्स को तीसरी डोज मिलेगी:

कोविड की तीसरी लहर का खतरा साफ दिख रहा है। इनमें संक्रमितों के इलाज में जुटे हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को सर्वाधिक संक्रमण का खतरा है। तीसरी डोज के लिए 10 जनवरी से अभियान के तहत कुल 12 लाख 38 हजार हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को यह डोज दी जाएगी। इनमें 5.88 लाख हेल्थ वर्कर्स और 6.50 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल है। इन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लगे करीब ग्यारह माह बीत चुके हैं।

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68.33 लाख बुजुर्ग, प्रिकॉशन डोज बीमारी का सर्टिफिकेट-पर्ची देखकर:
प्रदेश में 60 पार के बुजुर्गों की संख्या 68.33 लाख है। इनमें से गंभीर बीमारियों से ग्रसित बुजुर्गों को तीसरी यानी प्रिकॉशन डोज लगेगी। अपनी बीमारी का डॉक्टर का बनाया सर्टिफिकेट या फिर पर्ची देखकर इन्हें डोज लगाई जाएगी। तीसरी डोज वहीं लगाई जाएगी जो दो डोज लगी हो।



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