राजसमंद: जिसे मृत समझकर किया अंतिम संस्कार, वह 10 दिन बाद घर लौटा, बोला- अभी में जिंदा हूं

राजसमंद: जिसे मृत समझकर किया अंतिम संस्कार, वह 10 दिन बाद घर लौटा, बोला- अभी में जिंदा हूं

प्रदेश के राजसमंद शहर में पुलिस और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां बिना पोस्टमार्टम करवाए ही पंचनामा बनाकर शव दे दिया गया और परिजनों ने औंकारलाल गाडोलिया लौहार समझकर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। पिछले 10 दिनों से परिवार में गम का माहौल था। रविवार शाम अचानक औंकारलाल घर लौट आया तो परिजन और रिश्तेदारों के साथ पड़ोसी भी चौंक गए।

राजसमंद। प्रदेश के राजसमंद शहर में पुलिस और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां बिना पोस्टमार्टम करवाए ही पंचनामा बनाकर शव दे दिया गया और परिजनों ने औंकारलाल गाडोलिया लौहार समझकर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। पिछले 10 दिनों से परिवार में गम का माहौल था। रविवार शाम अचानक औंकारलाल घर लौट आया तो परिजन और रिश्तेदारों के साथ पड़ोसी भी चौंक गए। यहां पहुंची खबरों के अनुसार यह घटना औंकारलाल गाडोलिया लौहार से जुड़ी हुई है। परिजनों ने जिसे मृत समझकर अंतिम संस्कार कर दिया था, उसको देखने के बाद बच्चे और पत्नी डर गए। इस पर उसने कहा कि मैं जिन्दा हूं। भूत नहीं हूं। जानकारी के अनुसार गत 11 मई को राजसमंद के मोही रोड पर एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। उसे 108 एम्बुलेंस से आरके जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया, फिर अस्पताल प्रशासन ने कांकरोली पुलिस को पत्र भेजकर उसकी पहचान के लिए कहा।

पुलिस ने पहचान के प्रयास किए, लेकिन पता नहीं चल सका। इसके बाद गत 15 मई को हेड कांस्टेबल मोहनलाल अस्पताल पहुंचे, जहां सोशल मीडिया पर वायरल फोटो के आधार पर पुलिस ने विवेकानंद चौराहा कांकरोली निवासी ओंकारलाल गाडोलिया लौहार के भाई नानालाल और परिजनों को बुला लिया। नानालाल ने पुलिस को बताया था कि उसके भाई ओंकारलाल के दाएं हाथ में कलाई से लेकर कोहनी तक लम्बा चोट का निशान है। वहीं बाएं हाथ की दो अंगुलियां भी मुड़ी हुई हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन और पुलिस ने शव तीन दिन पुराना और डी फ्रिज में होने का हवाला देकर हाथ के निशान मिटने की बात कहकर परिवार को शव दे दिया।

बिना पोस्टमार्टम कराए ही दे दिया शव
ओंकारलाल गाडोलिया लौहार के भाई के अनुसार पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने बिना पोस्टमार्टम करवाए ही पंचनामा बनाकर शव दे दिया और परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। पिछले 10 दिनों से परिवार में गमी का माहौल था। रविवार शाम औंकारलाल घर लौट आया तो परिजन चौंक गए। औंकारलाल ने बताया कि 11 मई को परिजनों को बताए बगैर ही वह उदयपुर गया था। तबीयत खराब होने पर उदयपुर अस्पताल में भर्ती हो गया, जहां 4 दिन बाद छुट्टी मिली। रविवार को वह राजसमंद लौटा तो देखा की उसकी तस्वीर पर माला चढ़ी थी और भाई तथा बच्चों ने सिर मुंडवा रखे थे। उसने बताया कि औंकारलाल उसके परिवार के साथ काफी समय से उदयपुर में ही प्रवासरत है, लेकिन लॉकडाउन के चलते उसका परिवार राजसमंद में भाई के पास लौट आया। इसी बीच 11 मई को औंकार बिना बताए अकेला उदयपुर चला गया और बीमार होने से खुद ही अस्पताल भर्ती हो गया और घर पर परिजनों को बताया ही नहीं। 

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