RBI ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, चालू वित्त वर्ष में 9.5 फीसदी GDP ग्रोथ का जताया अनुमान

RBI ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, चालू वित्त वर्ष में 9.5 फीसदी GDP ग्रोथ का जताया अनुमान

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति की शुक्रवार को समाप्त 3 दिवसीय बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया गया। रेपो दर को 4 प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।

मुंबई। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लगातार छठी द्विमासिक बैठक में रेपो दर 4 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है, साथ ही अन्य नीतिगत दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 3 दिवसीय बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास ने बताया कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर 4 प्रतिशत पर यथावत बनाए रखने का फैसला किया है। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी दर तथा बैंक दर 4-4 प्रतिशत पर और रिवर्स रेपो दर 3.35 प्रतिशत पर पूर्ववत रहेंगे। कोविड-19 का संक्रमण ग्रामीण इलाकों में फैलने से चिंतित समिति ने चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान में 1 प्रतिशत की कटौती की है। दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तवकि जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर 9.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। इससे पहले अप्रैल में जारी बयान में विकास दर अनुमान 10.5 प्रतिशत रखा गया था। साथ ही पेट्रोल-डीजल, दालों और खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर महंगाई अनुमान बढ़ाया गया है।

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से यह भी तय किया है कि केंद्रीय बैंक अपना रुख ब्याज दरों में कटौती के लिए अनुकूल बनाए रखेगा यानी जब भी जरूरत होगी वह रेपो दर में कटौती के लिए तैयार रहेगा। दास ने कहा कि एमपीसी की अप्रैल की बैठक के बाद से कोविड-19 की दूसरी लहर कई राज्यों में फैल चुकी है। संक्रमण छोटे शहरों और गांवों में भी फैल चुका है। वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में 7.3 प्रतिशत की गिरावट रही है। गांवों में संक्रमण फैलने और शहरी मांग कम होने से गिरावट का जोखिम है। दूसरी ओर, सामान्य मानसून का पूर्वानुमान, कारोबारियों के मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालने और वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में सुधार से घरेलू अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि महामारी के परिप्रेक्ष्य में इस बात का सही-सही अनुमान लगाना कठिन है कि अर्थव्यवस्था कब गति पकड़ेगी और मजबूत होगी। इन अनिश्चितताओं के बीच रिजर्व बैंक दीर्घावधि विकास के सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव उपाय करेगा। महामारी से लड़ाई में वित्तीय तंत्र की मजबूती काफी महत्त्वपूर्ण है। आरबीआई वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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