उद्योगों के लिए संसाधन पर्याप्त, राजनीतिक इच्छा शक्ति नहीं

दैनिक नवज्योति का आयोजन: परिचर्चा में उद्योगपतियों व युवा उद्यमियों ने दिए सुझाव

उद्योगों के लिए संसाधन पर्याप्त,  राजनीतिक इच्छा शक्ति नहीं

सरकारी पेचीदगियां बन रही नए उद्योग लगाने में बाधक।

कोटा। चर्मण्यवती  के पावन  तट पर बसा कोटा, कभी राज्य की इंडस्ट्रियल राजधानी रहा कोटा, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में लाखों को रोजगार देने वाला कोटा आज क्यों औधोगिक परिदृश्य से औझल हो रहा है। कोटा अपनी पहचान क्यों खो रहा है। पानी, बिजली, ट्रांसपोर्ट  समेत हर तरह की सुविधा, पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, लेबर, कनक्टिविटी, संचार, केपिटल, सबकुछ होने के बावजूद भी कोटा अपनी औद्योगिक नगरी की पहचान क्यों खोता जा रहा है।  नए उद्योग क्यों नहीं लग रहे हैं। इन्ही सब मुद्दों को लेकर दैनिक नवज्योति ने मंगलवार को अपने कार्यालय में परिचर्चा का आयोजन किया। परिचर्चा में शहर के उद्योगपतियों, युवा उद्यमियों और स्टार्टअप और जिला उद्योग केन्द्र के अधिकारियों ने उद्योग लगाने में आने वाली समस्याओं व परेशानियों को नवज्योति के साथ साझा किया। वहीं नए उद्योग लगाने व शहर की पहचान को फिर से बनाने के लिए अच्छे सुझाव भी दिए। परिचर्चा में अधिकतर उद्यमियों ने  सरकारी  पेचीदगियों के साथ राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव को इसका प्रमुख कारण माना।  

एयरपोर्ट सबसे बड़ी बाधा
- युवाओं में स्किल डवलपमेंट के लिए कोई साधन नहीं। 
- नरेगा के कारण यहां लेबर की सबसे बड़ी समस्या। 
- उद्यमियों के तैयार माल को बेचने के लिए बाजार नहीं।
- पर्यावरण विभाग से उद्योग लगाने के लिए स्वीकृति लेने में आती परेशानी।
- उद्योग लगाने के लिए गारंटर नहीं  मिलने से बैंक से लोन नहीं  मिलता। 
- उद्योग लगाने के लिए विभागों में आपसी तालमेल का अभाव।
- सस्ती दर पर जमीन नहीं मिलने से उद्योग नहीं लग पा रहे है। 
- कोटा में बिजली का उत्पादन होते हुए बिजली महंगी है। 
- सीएनजी और एलपीजी प्लांट नहीं होने से यहां उद्योग नहीं पनप रहे।
- उद्योगों को विकसित करने के लिए कॉमन प्लेटफार्म नहीं है।
- कोटा में उद्योगिक विकास का कोई डेटा और रोडमेप नहीं है।
- राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी। 
- उद्योग लगाने में सरकारी खामियां अधिक है। 
- लघु उद्योग के लिए ग्रामीण हाट बाजार नहीं है।
- किसानों को अपनी तैयार की गई उपज का दाम लगाने का अधिकार नहीं

उद्योगों को सुविधाएं कम दी जा रही
कोटा औद्योगिक नगरी रहा है। यहां बड़े-बड़े उद्योग थे। अभी भी  नए उद्योग के लिए जमीन भी पर्याप्त मात्रा में है। लेकिन सरकार व प्रशासन की ओर से उद्योगों के लिए जमीन नहीं दी जाती। बिजली पर्याप्त है लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में यहां उद्योगों को कई गुना अधिक महंगे दाम पर बिजली दी जा रही है। एलपीजी जीएसटी के दायरे में आ रही है लेकिन पीएनजी को शामिल नहीं किया है। जिससे पीएनजी आधारित उद्योग नहीं लग पा रहे हैं। एक्सप्रेस हाइवे बनाया जा रहा है लेकिन रेलवे कोरिडोर बन रहा है लोकिन हम ध्यान नहीं दे रहे। दूसरी बड़ा कारण नरेगा  के कारण उद्योगों को श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। बिना श्रमिक के उद्योग चलाना मुश्किल है। सरकारी पेचीदगियां कम हों और राजनीतिक इच्छा शक्ति होने पर यहां नए उद्योग लग सकते हैं। 
- गोविंद राम मित्तल, संस्थापक अध्यक्ष दी एसएसआई एसोसिएशन 

कोटा शिक्षा नगरी नहीं कोचिंग इंडस्ट्री
कोटा को बार-बार शिक्षा नगरी के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। जबकि यह शिक्षा नगरी नहीं यहां केवल कोचिंग मिल रही है। शिक्षा नहीं। शौध की कमी है। नवाचार की कमी है। नये विजन की कमी है जो शिक्षा से मिलती है। कोटा में एम्स जैसे उच्च शिक्षण संस्थान आने चाहिए।  जिससे यहां शोध किया जा सके। कोटा में उद्योगों की स्थापना के लिए राजनीतिक विजन की कमी है। उद्योग लगाने के लिए सरकारी प्रक्रिया को सरल करने की जरुरत है। साथ ही इंडस्ट्रियल फोरम का गठन किया जाए। जिसमें उद्योग जगत समेत इससे जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। जिससे नये उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिल सके। 
- डॉ. गोपाल सिंह, अर्थशास्त्री 

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प्रतिभाओं की कमी नहीं, प्लेटफार्म की जरूरत
कोटा में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। कॉमर्स में सीए व सीएस करने वालों को तो रोजगार के अवसर मिल जाते हैं। लेकिन बी.कॉम करने वाले युवाओं को रोजगार व उद्योग लगाने का पर्याप्त प्लेटफार्म नहीं मिल पाता। ऐसे में उन्हें प्रशिक्षण की आवश्यकता है। कॉमर्स कॉलेज में जगह व प्रतिभाएं हैं लेकिन प्रशिक्षण देने वाले यहां आएं तो युवा नए उद्योग लगाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। प्रैैक्टिकल एजुकेशन की कमी है। कोटा में किस तरह के उद्योग हैं और कितनी इंडस्ट्री हैं इसका एक डेटा बेस तैयार किया जाना चाहिए। कोटा में कोटा डोरिया व टैक्सटाइल के क्षेत्र में अच्छा काम हो सकता है।

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- डॉ. प्रेरणा सक्सेना, प्राचार्य कॉमर्स कॉलेज कोटा 

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लघु  उद्योगों को मिले प्रोत्साहन

कोटा औद्योगिक नगरी रहा है। यहां बड़े-बड़े उद्योग रहे हैं। लेकिन वर्तमान में जो स्थिति है। उसमें नए व बड़े उद्योग नहीं लग पा रहे हैं तो ऐसे में लघु उद्योग लगाने को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। जिससे युवा पीढ़ी सरकारी व प्राइवेट नौकरी की तरफ न भागकर उद्योग लगाने पर फोकस करे। साथ ही उद्योग लगाने में व उन्हें चलाने में जिस तरह से सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी की जाती है उसे भी समाप्त किया जाना चाहिए। सिंगल यूज प्लास्टिक,शराब व तम्बाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने से नहीं उनका उत्पादन ही बंद करना समाधान है। 
- जी.डी. पटेल, समाजसेवी

सरकारी अफसरों के द्वारा बनाई नीतियों से उद्योग नहीं पनप सकते
शहर का विकास वहां के उद्योग व व्यापार के बिना संभव नहीं है। कोटा में उद्योग व व्यापार के नाम पर फिलहाल कोचिंग है लेकिन यह स्थायी उद्योग नहीं है। कोटा के विकास के लिए स्थायी उद्योग लगाने की जरूरत है। बाहर से इनवेस्टर को लाने के लिए एयरपोर्ट यहां की महती आवश्यकता है। जिसके लिए दस साल से प्रयास तो हो रहे हैं लेकिन अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है। वहीं उद्योगों के लिए जो नीति बनाई जाती है उसमें उद्योग व व्यापार से जुड़े लोगों को शामिल किया जाना चाहिए। सरकारी अफसरों के द्वारा बनाई नीतियों से उद्योग नहीं पनप सकते। युवाओं को नई तकनीक की जानकारी दी जाए और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लगाई जाए।  
-अशोक माहेश्वरी, महासचिव कोटा व्यापार महासंघ

नई ट्रेक्नोलॉजी डवलप करने की आवश्यकता
कोटा में युवाओं के रोजगार शुरू करने के लिए काफी कुछ है। यहां बिजली, पानी और जमीन होते हुए भी उद्योग नहीं लगने की सबसे बड़ी वजह यहां पर  टेक्नोलॉजी डवलप नहीं है। युवा न्यू स्टार्टअप शुरू तो करना चाहता है लेकिन उसके पास आइडिया नहीं है। यहां सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां तैयार माल को बेचने के लिए बाजार नहीं है। ग्रामीण हाट को बढ़ावा देने की जरुरत है। कोटा में नई इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए बातें तो बहुत होती है लेकिन उनको मूर्तरूप नहीं दिया जाता है। 
-आयुष त्यागी, आई स्टार्ट नेस्ट मेंटोर

कोटा में स्किल्ड लेबर की समस्या
कोटा में बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक कैरी बैग बनाने का स्टार्टअप शुरु किया है। इसे शुरु किए दो साल का समय हो गया है।  इसका मार्केट भी अच्छा है। उत्पादन भी हो रहा है। लेकिन इसके लिए कोटा में स्किल्ड लेबर और कच्चा माल नहीं मिलता।  कच्चा माल बिहार, उत्तर प्रदेश व गुजरात से लाना पड़ रहा है जो काफी महंगा होता है। जिससे काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। साथ ही युवा कोई भी स्टार्टअप शुरु करना चाहते हैं तो उसके लिए बैंक से लोन मिलने में भी काफी परेशानी आती है। युवाओं को प्रोत्साहन, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और जागरूकता की कमी है। कॉलेजों में जाकर प्रशिक्षण देना चाहते हैं लेकिन युवा उसे सीखना नहीं चाहते। 
- मोहक व्यास,फाउंडर स्टार्टअप

कभी थी कोटा की शान जेके फैक्ट्री
उत्पादन में कोटा की पहचान नहीं
कोटा में करीब 750 से अधिक छोटे-बड़े उद्योग हैं। लेकिन यहां किसी एक विशेष उद्योग के उत्पादन में कोटा की पहचान नहीं है। हर जिले व राज्य  में होने वाले उत्पादन की अपनी पहचान बनी हुई है। लोग उसके हिसाब से ही वहां जाते हैं। कोटा में भी होने वाले सभी उत्पादनों की पहचान को प्रोत्साहन व बढ़ावा देने की जरूरत है। उस पहचान के आधार पर ही बाहर से व्यापारी यहां माल खरीदने आएगा तभी तो इनकम होगी। कोटा के उद्योग जगत को राजनीतिक इच्छा शक्ति  की जरूरत है।

-अनुज माहेश्वरी, सचिव दी एसएसआई एसोसिएशन 

एयरपोर्ट नहीं होना सबसे बड़ी समस्या
कोटा में युवाओं के लिए रोजगार के कई विकल्प है। लेकिन उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं होने से वो अपना स्वयं का न्यू स्टार्टअप कैसे शुरू करें इसके लिए कोई प्लेटफार्म नहीं है। यहां उद्योग लगाने के आइडिया तो बहुत दिए जाते है। उन्हे मूर्तरूप देने में पसीना आ जाता है। कोटा में कोई प्रोडेक्ट तैयार करें तो उसका मार्केट नहीं है। उस माल को अन्य स्थान पर बेचना बड़ा चुनौती का कार्य है। कोटा में न्यू स्टार्टअप शुरू करना ही बढ़ा चलेंज है। मैने अपना न्यू स्टार्टअप कोटा में तीन साल पहले शुरू किया था। कई बाधाएं आई लेकिन आज अच्छे मुकाम पर चल रहा है। कोटा में उद्योग नहीं पनपने का सबसे बड़ा कारण यहां एयरपोर्ट की सुविधा नहीं है। बड़े व्यापारी यहां इंड्रस्टीज लगाए तो उनकी कोटा से जोड़ने वाली एयरपोर्ट जैसी कनेक्टिविटी नहीं है। यहां उद्योग शुरू करने की सबसे बड़ी समस्या यह है कि न्यू स्टार्टअप से के लिए किसी से बात करें। यहां आ रही समस्याओं का समाधान करने वाले प्लेटफार्म नहीं है। 
- ऐश्वर्या न्यू स्टार्टअप एकत्र की फाउंडर

लघु उद्योग से तैयार माल को बेचने के लिए बाजार नहीं
कोटा में कृषि विज्ञान केंद्र युवाओं और महिलाओं को न्यू स्टार्टअप देने के लिए कई सारे ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर रखे है। जिसमें महिलाएं व युवा अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकेते है। यहां धनिया और लहसून के प्रसंस्करण केंद्र है। सोयाबीन से सोया मिल्क और सोया पनीर बनाने का कार्य युवाओं को सिखाया जा रहा है। कोटा की अधिकांश होटल में बिकने वाला पनीर सोया पनीर है। इसका अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। कोटा लघु उद्योग को प्रोत्साहन करने के लिए बाजार नहीं है। वर्तमान में आठवीं व दसवी पास महिलाएं कई नये व्यवसाय शुरू किए लेकिन उनके माल बेचने के लिए बाजार नहीं बड़े माल में बार कोड मांगते कम पड़ी लिखी महिलाएं गुणवत्ता युक्त माल तैयार कर रही है लेकिन उसका व्यापक प्रचार प्रसार नहीं हो पा रहा है। बार कोड रजिस्टेशन कराने जाए या अपने माल को बेचे। यह सबसे बड़ी समस्या है।   हमारे किसान जो माल तैयार कर रहे उसका दाम तय करने काम व्यापारी कर रहे है। दाम तय करने काम किसानों को मिले तभी धनिया, लहसून प्रसंस्करण का पूरा लाभ किसानों को मिल सकेंगा। लोगों में जागरुकता की कमी है। मोस्टली सब्सिडी के लालच में उद्योग लगाते हैं। 
- गुंजन सनाढ्य, विषय विशेषज्ञ केवीके कोटा 

नए उद्यमी की सफलता की स्टोरी छपे, तब दूसरे युवा  प्रोत्साहित होंगे
कोटा में उद्योग लगाने की अपार संभावनाएं है।  कोटा में नए उद्यमी के लिए क्लब बनना चाहिए जिसमें उन्हे यह बताया जाए कि करना क्या है। अपने न्यू स्टार्टप में जो सफल रहे उनकी सक्सेज स्टोरी सोशल मीडिया अखबार में प्रकाशित हो जिससे प्रेरित होकर दूसरे युवा भी  अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। कोटा युवाओं के साथ सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वो करना क्या चाहते उनका विजन क्लीयर होना चाहिए। कई ऐसे उद्योग है जिसमे कच्चा माल लेकर युवा अपने घर से माल तैयार कर न्यू स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। हमने उनको ट्रेनिंग देने के लिए निजी वेंडर रखा हुआ जो यह जानकारी दे रहा उन्हे कैसे व्यवसाय करना है। नए उद्यमी के लिए एक प्लेटफार्म तैयार करने की आवश्यकता है। इसके लिए स्टार्टअप वाले कॉलेज स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को बताएं वो क्या उद्योग कर सकते हंै। उनका विजन सही होगा तभी वो यहां उद्योग लगा सकेंगा। कॉलेज जाकर यह बताने की जरुरत है विद्यार्थी कैसे रोजगार करें। युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए एक आॅन लाइन प्लेटफार्म तैयार हो जिससे अपनी उद्योग लगाने आ रही समस्या का समाधान पा सकें।  कोटा शीघ्र ग्रामीण हाट बाजार शुरू करने जा रहे जिसमें महिलाएं अपना तैयार माल बेच सकेंगी।  
- हरिमोहन शर्मा, संयुक्त निदेशक जिला उद्योग केंद्र कोटा 

कोटा में न्यू स्टार्टअप शुरू करना बड़ी चुनौती
हमारे पास जो युवा न्यू स्टार्टअप के लिए आ रहे उनका माइड सेट वो चार पांच साल में कमा कर दूसरा व्यवसाय करना चाहता है। अब युवा पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाले उद्योग लगाने मूड में कम नजर आते है। उन्हें कम समय में अधिक लाभ वाला व्यवसाय चाहिए। नई टेक्नोलॉजी से लेस उद्योग की डिमांड ज्यादा है। कोटा में करीब 350 से अधिक न्यू स्टार्टअप चालू किए है। हमारे पास कॉलेज के विद्यार्थी आ रहे उन्हे शार्ट टर्म वाला व्यवसाय चाहिए। कोटा में कलस्टर इंडस्ट्री चाहिए इसका डवलपमेंट हो। दूसरा यहां टूरिज्म व्यवसाय में काफी संभावनाएं इस काम को करने की जरुरत है।   
- कौस्तुभ भट्टाचार्य, आई स्टार्ट नेस्ट मेंटोर

कोटा में उद्योग की एक साइकिल चल रही उसको तोड़ना होगा
कोटा में नए उद्योग शुरू करने के लिए यहां पर्याप्त संसाधन है लेकिन यहां एक साइकिल बनी हुई वहीं घूम रही है। उसको चेंज करने की आवश्यकता है।  यहां कई उद्योग शुरू होकर बंद हो गए है। उसका कारण यह है कि जैसी यहां जोखिम बढ़ता है लोग यहां से पलायन कर जाते है। 80 के दशक में यहां काफी उद्योग थे लेकिन उसके बाद यहां से लोग पलायन करना शुरू कर दिया। उसके बाद यहां एजुकेशन की साइकिल चली लेकिन यह भी लंबी नहीं चलेगी। यहां स्थाई उद्योग शुरू नहीं हुए है। इसके कई फैक्टर है। 
- रोहित पाटोदी, अध्यक्ष सीए एसोसिएशन

युवाओं नहीं मिलता सहजता से लोन, पैचिदगियां कम हो
आजकल शिक्षा रोजगारमुखी रही नहीं है। कॉमर्स कॉलेज 80 के दशक में बना था। काफी जमीन है यहां युवाओं के लिए रोजगार का कोई ट्रेनिंग सेंटर खुले जिससे युवा प्रशिक्षित होकर अपना व्यवसाय कर सकें। यहां नेता चुनाव में उद्योगों की घोषणा तो करते है लेकिन यहां डेढ दर्जन से अधिक बंद हो चुके उद्योगों पुन शुरू करने की कोई बात नहीं करता है।राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी होने से नए उद्योग नहीं आ रहे है। युवाओं को रोजगार उद्योग के लिए अच्छे आइडिया देने वाला प्लेटफार्म नहीं है। उद्योग लगाने का कोई रोडमेप नहीं बताता है।  हर साल कॉमर्स कॉलेज में बड़ी कंपनियां विद्यार्थियों को रोजगार देने के लिए प्लेसमेंट  ऐजेंसी शिविर लगाती है। ट्रेनिंग के नाम पर 50 हजार रुपए मांगते है। लेकिन युवा 50 हजार  लाए कहां से।
- अर्पित जैन, छात्र संघ अध्यक्ष 

इको संसेटिव जोन घोषित नहीं होना बड़ी बाधा
कोटा में रोड व रेलवे कनेक्टिविटी है। बिजली व पानी की कोई कमी नहीं है। लेकिन यहां गरड़िया महादेव से कोटा बैराज तक नदी के दोनों तरफ 11-11 किमी. क्षेत्र को घड़ियाल सेंचुरी में इको सेंसेटिव जोन घोषित नहीं किया है। सरकार द्वारा जब तक इसे इको संसेटिव जोन घोषित नहीं किया जाएगा तब तक यहां न तो नए उद्योग लग सकते हैं और न ही वर्तमान उद्योेगों का विकास हो सकता है। 22 कि.मी, के क्षेत्र में पूरा कोटा कवर हो रहा है। यहां से पुराने उद्योग बंद होने का कारण भी यही है। वे विकास करना चाहते थे लेकिन उसके लिए पर्यावरण व अन्य स्वीकृतियां लेने में लगने वाले समय व उस पर होने वाला खर्चा काफी अधिक है। ऐसे में उद्यमी दूसरी जगह पर उद्योग लगा सकता है।   सरकार को शीघ्र्र सीमित एरिया को इको संसेटिव जोन घोषित करना चाहिए जिससे बाकी क्षेत्र में उद्योग लगाए जा सके। 
- मेजर विक्रम सिंह, जीएम श्रीराम रेयंस
 
लोगों में इच्छा शक्ति की कमी
कोटा में व्यापार की अपार संभावनाएं है लेकिन यहां के लोगों की अब व्यापार करने इच्छा शक्ति कम होती जा रही है। जिसका सबसे बड़ा कारण है यहां जागरुकता की कमी है। नए उद्योग शुरू करने के लिए उसकी प्रक्रिया को सरल बनाए तो यहां कई उद्योग शुरू हो सकते है। कोटा उद्योग देने वाले विभागों का आपसी तालमेल का अभाव है जिससे  यहां उद्योग शुरू नहीं हो पा रहे है। यहां उद्योग लगाने के दस्तावेज का सरलीकरण हो। लोगों को नियम और कानून की पूरी जानकारी होनी चाहिए। यहां सबसे बड़ी समस्या सस्ती दर पर जमीन नहीं मिलती है। उद्योग लगाने सबसे बड़ी बाधा यहां कागजी औपचारिकता अधिक है। यहां पर्यावरण विभाग, लोन देने वाला बैंक के बीच आपसी सामजस्य नहीं है लोग लोन के लिए चक्कर लगाते लोन नहीं मिलता। उद्योग विकसित करने के लिए ठोस नीति की आवश्यकता है। यहां उद्योग नहीं पनपने का कारण मजदूर युनियन का मजबूत होना राजनीतिक संरक्षण मिलने से यहां उद्यमी आना नहीं चाहते है। 
- प्रतिभा दीक्षित, एडवोकेट व सदस्य स्थाई लोक अदालत कोटा

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