गुटखा छोड़, उन पैसों से 7 साल में लगाए 2 हजार पौधे

बनाई हनुमान वाटिका बनाई

गुटखा छोड़, उन पैसों से 7 साल में लगाए 2 हजार पौधे

पांचाल ने गुटखा खाना छोड़, उन पैसों से 7 वर्षों में करीबन 2 हजार पौधे लगा यह साबित कर दिया कि ठान लो तो कुछ भी मुश्किल नहीं।

करवर। आजकल रोजाना 30-40 रुपए का गुटखा खा जाना एक आम बात है। इस बुरी आदत से युवा कब नशे के गुलाम बन जाते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता। ऐसे में कितना भी चाहें पर वे अपनी इस आदत को छोड़ नहीं पाते हैं और आगे चलकर कई भयंकर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। लेकिन करवर क्षेत्र के सहण गांव के पर्यावरण प्रेमी महावीर प्रसाद पांचाल ने नशा छोड़, गुटखा के पैसों से वो कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। पांचाल ने गुटखा खाना छोड़, उन पैसों से 7 वर्षों में करीबन 2 हजार  पौधे लगा यह साबित कर दिया कि ठान लो तो कुछ भी मुश्किल नहीं।  उन्होंने एक हनुमान वाटिका बनाई जिसमें  61 प्रजातियों के 1500 पौधे लहलहा रहे हैं। महावीर पांचाल बताते है कि मुझे बचपन से ही पेड़ पौधों से लगाव था। बचपन में जब घर से बाहर बस से बून्दी या कोटा जाते तो खिड़की के पास बैठकर पर्वतमाला को निहारा करता था। हरियाली देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता था। बचपन में बारिश के दिनों में आम, जामुन, इमली के बीज कहीं भी लगा देता था। हालांकि ये कभी बड़े नहीं हुए।

पौधों की सुरक्षा के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा
1 मार्च 2016 को हनुमान वाटिका के बीच से गुजर रही 11 हजार केवी लाइन के तार टूटने से वाटिका में आग लग गई और 200 पौधे जलकर राख हो गए जिससे पांचाल काफी आहत हुआ लेकिन इष्ट मित्रों सहित परिवार जनो की सांत्वना से शेष बचे पौधों की सुरक्षा के लिए एक ही दिन में बाड़ की व्यवस्था की ,जिससे  जानवर पौधों को नुकसान नहीं पहुंचा सके लेकिन उससे भी बात नहीं बनी तो बच्चों कि सलाह से घर पर लगी हुई  एयरटेल के सेटअप बॉक्स को हटाकर फ्री वाला सेटअप बॉक्स लगावाया और उन पैसों से पौधों की सुरक्षा के लिए तार की जाली लगवा कर पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित की पांचाल के पर्यावरण के प्रति समर्पित देखते हुए इनके फेसबुक मित्रों ने एक पौधा उनके नाम से लगाने का अनुरोध किया। हनुमान वाटिका में किसी का सहयोग नहीं मिला इसलिए वाटिका के सामने पांच बीघा जमीन चुनी और उसे फेसबुक वाटिका का नाम दिया। राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों के मित्रों ने आॅनलाइन कुछ रुपए भेजे जिससे उनके नाम से पौधे लगाए। इसके अलावा  पिछले पांच-छह वर्षों से सीडबॉल बनाकर सहण से देई सड़क मार्ग पर फेंका इस विधि से लगभग 200-250 नीम के पेड़ लग चुके हैं।

 पौधारोपण में परिवार का पूरा सहयोग
वृक्षारोपण में महावीर प्रसाद पांचाल के बेटे चर्मेश, अर्जुन और बेटी निशा व अम्बिका के साथ पत्नी मंजू देवी भी इनका सहयोग करती हैं। पांचाल बताते हैं कि मैं जिस भी लायक हूं उसे इस प्रकृति मां को सौंपना चाहता हूं। मेरा सपना है कि मेरा गांव हरा-भरा हो,सहण गांव से देई कस्बा तक जिसकी दूरी 10 किलोमीटर सड़क के किनारे पेड़ लगाकर एक ग्रीन बेल्ट तैयार करना है।

सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को प्रेरित कर रहे
महावीर पांचाल विशेष अवसरों पर गांव के लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित कर उनसे जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ, नौकरी लगने की खुशी, पूर्वजों की स्मृति आदि में फेसबुक वाटिका में पौधे लगवाना है साथ ही व्हाट्सएप ,फेसबुक ,इंस्टाग्राम पर जुड़े हुए सभी साथियों से वाटिका में पौधे लगाने के लिए प्रेरित करते रहते हैं।

 परिंदों ने बनाया अपना बसेरा
अब हनुमान वाटिका में पेड़ों पर फल आने लग गए हैं। इन फलों का उपयोग  सिर्फ पक्षियों के लिए होता हैं, जिससे मोर, कोयल, तोते, पपीहे, तीतर और नाना प्रकार के रंग बिरंगे पक्षी यहां बसेरा करने लगे हैं। हनुमान वाटिका पक्षियों की प्रजनन स्थली बन गई है। फिल्म कलाकर प्रदीप काबरा, जिला वन संरक्षक सतीश कुमार जैन भी वाटिका में अपने हाथों से पौधे लगा चुके हैं। पांचाल की पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में भागीदार  उनके बेटे अर्जुन के जन्मदिन पर इतिहासकार डॉ. एस.एल. नागौरी, मार्गदर्शक विट्ठल सनाढ्य, लादूलाल सेन सहित ग्रामीणों की मौजूदगी में  51 पौधे लगाए  गए। इससे इनके कार्य की प्रसिद्धि स्थानीय क्षेत्र के साथ साथ जिले से बाहर भी होने लगी।

हनुमान वाटिका में पौधारोपण से लेकर अब तक काफी संघर्ष किया है और परिवार जनों के साथ साथ सभी इष्ट मित्रों से प्रेरणा मिलती रही और में अपनी मंजिल को पाने के लिए अग्रेषित होता रहा। इसी का परिणाम आज हनुमान वाटिका में 1 हजार 5 सौ पौधे में 61 प्रजातियां लहरहा रही हैं।
-महावीर प्रसाद पांचाल,पर्यावरण प्रेमी सहण

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