डीवीसीएम माओवादी मल्लेश का बीएसएफ कैंप में आत्मसमर्पण : नक्सलवाद छोड़ मुख्यधारा में शामिल, बीएसएफ अधिकारियों ने बताया- सरकार की पुनर्वास योजना का मिलेगा लाभ
स्थानीय ग्रामीणों ने किया इस कदम का स्वागत
माओवादी नेता ने हिंसा का रास्ता त्यागा। सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रेरणा से यह बदलाव क्षेत्र में शांति और विकास के लिए बड़ी उपलब्धि। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मल्लेश को आर्थिक सहायता और रोजगार देकर मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा।
कांकेर। छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्र कांकेर में मंगलवार देर रात माओवादी संगठन के डिविजनल कमेटी मेंबर (डीवीसीएम) मल्लेश ने हथियार के साथ सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार मल्लेश छोटेबेठिया स्थित बीएसएफ कैंप पहुंचा, जहां उसने औपचारिक रूप से हिंसा का रास्ता छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा जताई। इस आत्मसमर्पण में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ अन्य लोगों की अहम भूमिका बतायी जा रही है। इन लोगों ने मल्लेश को प्रेरित किया और उसे बीएसएफ कैंप तक लेकर आए।
आत्मसमर्पण की पूरी प्रक्रिया बीएसएफ की सेक्टर जी ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों और 94वीं वाहिनी के कमांडेंट राघवेंद्र सिंह की मौजूदगी में संपन्न हुई। अधिकारियों ने बताया कि मल्लेश संगठन के भीतर एक सक्रिय सदस्य था और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में था। उसके आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बीएसएफ अधिकारियों ने बताया कि सरकार की पुनर्वास नीति के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले मल्लेश को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उसे सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा, जिसमें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर शामिल हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि माओवादी संगठन से जुड़े लोगों का आत्मसमर्पण करना क्षेत्र में शांति और विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे इलाके में विकास कार्यों को गति मिलने और आम लोगों को सुरक्षा का एहसास होने की उम्मीद है।

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