छात्रों को खा रहा नीट परीक्षा का डर : मेडिकल सीट का दबाव बना 2 छात्रों की मौत का कारण, तमिलनाडु में एक ने लगाया फंदा तो दूसरे ने खाया जहर
विभिन्न दलों के नेताओं ने एक स्वर में की परीक्षा में छूट की मांग
चेन्नई। तमिलनाडु में मेडिकल अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सफल न हो पाने के डर से आत्महत्या कर ली। पिछले दो दिनों में सेलम जिले में इडाप्पडी के पास वेल्लालपुरम इलाके में 12वीं कक्षा की छात्रा गोपिका ने फांसी लगाकर और कोयम्बटूर में अनुकीर्तना ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। राज्य में छात्र आत्महत्याओं की बढ़ती घटनाओं और विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा एक स्वर में परीक्षा में छूट की मांग की है। इस बीच नीट-यूजी दो अभ्यर्थियों की आत्महत्या का मामला सामने आया है। इसी दौरान पट्टाली मक्कल काची ने एक बार फिर नीट को समाप्त करने की अपनी मांग दोहराई है। ये दुखद घटनाएं ऐसे समय में हुई हैं, जब मुख्यमंत्री सी चंद्रशेखर विजय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से तमिलनाडु को नीट परीक्षा के दायरे से छूट देने और राज्य को 12वीं के अंकों के आधार पर यूजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में छात्रों को प्रवेश देने की अनुमति देने का बार-बार आग्रह किया है। इस मांग का मुख्य विपक्षी दल द्रमुक सहित सभी दलों ने समर्थन किया है। आत्महत्या की इन घटनाओं पर दुख व्यक्त करते हुए पीएमके अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. अंबुमणि रामदास ने इस बात पर जोर दिया कि आत्महत्याओं के इस सिलसिले को रोकने का एकमात्र समाधान इस जानलेवा नीट परीक्षा को समाप्त करना ही है।
यहां शनिवार को जारी बयान में कहा, प्रश्नपत्र लीक होने के कारण रद्द की गयी नीट परीक्षा रविवार को दोबारा आयोजित होने वाली है, ऐसे में सेलम जिले में इडाप्पडी के पास वेल्लालपुरम इलाके की छात्रा गोपिका का परीक्षा में सफल न हो पाने के डर से फंदा लगाकर आत्महत्या करने की खबर सुनकर मुझे गहरा धक्का लगा और बहुत दुख हुआ। मैं उसके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त करता हूं। सेलम फोर्ट सरकारी कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की बारहवीं की छात्रा गोपिका पिछले साल नीट परीक्षा में शामिल हुई थी लेकिन कम अंक आने के कारण उसे मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल सका। इसके कारण इस साल दोबारा नीट परीक्षा की तैयारी कर रही इस छात्रा ने इस डर और ङ्क्षचता में आत्महत्या कर ली कि वह इस बार भी सफल नहीं हो पायेगी।
पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि ने कहा कि इसी वजह से कोयम्बटूर की छात्रा अनुकीर्तना पहले ही जहर खाकर आत्महत्या कर चुकी है। इससे पैदा हुई चिंता और तनाव अभी कम भी नहीं हुआ था कि सेलम जिले में एक और छात्रा ने आत्महत्या कर ली। दो दिनों के भीतर दो छात्राओं को आत्महत्या करते देखना बेहद असहनीय है। उन्होंने दावा किया कि साल 2017 में नीट को अनिवार्य किये जाने के बाद से पिछले एक दशक में राष्ट्रीय स्तर पर 200 से अधिक और तमिलनाडु में 40 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। छात्रों को आत्महत्या की ओर धकेलने के अलावा इस जानलेवा नीट परीक्षा में कोई बदलाव नहीं लाया गया है। तमिलनाडु के लिए नीट को अनावश्यक बताते हुए श्री रामदास ने कहा कि पिछले 10 वर्षों के आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि नीट ने चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने या चिकित्सा शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकने में किसी भी तरह से मदद नहीं की है।
उन्होंने कहा कि हालांकि अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी दल पीएमके, जिसमें भाजपा भी शामिल है, लगातार नीट परीक्षा रद्द करने की मांग कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर रद्द किया जाना चाहिए। यदि यह संभव नहीं है, तो तमिलनाडु को नीट के दायरे से छूट देने का अनुरोध स्वीकार किया जाना चाहिए।

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