nature
राजस्थान  अजमेर 

अजमेर के जंगलों में 1–2 मई को वन्यजीव गणना, 85 से अधिक वाटर होल्स पर नजर

अजमेर के जंगलों में 1–2 मई को वन्यजीव गणना, 85 से अधिक वाटर होल्स पर नजर अजमेर वन विभाग 1 और 2 मई को जिले के 85 से अधिक वॉटर होल्स पर वन्यजीव गणना आयोजित करेगा। यह गणना 24 घंटे चलेगी, जिसमें वन कर्मी पग-मार्क और प्रत्यक्ष दर्शन के आधार पर आंकड़े जुटाएंगे। पुष्कर, किशनगढ़ और नसीराबाद सहित सभी क्षेत्रों के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
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भारत 

कॉर्बेट नेशनल पार्क में दिखा दुर्लभ और खूबसूरत पक्षी''लॉन्ग टेल मिनिवेट'',पक्षी प्रेमियों में उत्साह

कॉर्बेट नेशनल पार्क में दिखा दुर्लभ और खूबसूरत पक्षी''लॉन्ग टेल मिनिवेट'',पक्षी प्रेमियों में उत्साह रामनगर के कॉर्बेट नेशनल पार्क में दुर्लभ लॉन्ग टेल मिनिवेट पक्षी देखा गया। इसकी मौजूदगी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और सुरक्षित वन्य आवास का संकेत मानी जा रही है।
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ओपिनियन 

खतरे का संकेत है प्रकृति से छेड़छाड़

खतरे का संकेत है प्रकृति से छेड़छाड़ जहां तक जंगलों के खत्म होने का सवाल है, उसकी गति देखते हुए ऐसा लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब दुनिया से जंगलों का नामोनिशान तक मिट जायेगा और वह किताबों की वस्तु बनकर रह जायेंगे।
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राजस्थान  जयपुर 

प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी भी और कर्तव्य भी : राज्यवर्धन

प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी भी और कर्तव्य भी : राज्यवर्धन कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि जलवायु की रक्षा के लिए, पर्यावरण की रक्षा के लिए हमारे प्रयासों का संगठित होना बहुत ज़रूरी है।
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ओपिनियन 

श्रीराम के प्रकृति-प्रेम की सकारात्मक ऊर्जा

श्रीराम के प्रकृति-प्रेम की सकारात्मक ऊर्जा सनातन शास्त्रों में निहित है कि त्रेता युग में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ था।
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राजस्थान  झालावाड़ 

बेसाल्टिक चट्टानें होंगी जियो साइट के रूप में विकसित

बेसाल्टिक चट्टानें होंगी जियो साइट के रूप में विकसित इंटेक ने देशभर की 150 भू विरासत सूची में किया शामिल ।
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राजस्थान  कोटा 

जामुनिया आईलैंड में दौड़ेगी बोट, बनेगा वॉच टावर

जामुनिया आईलैंड में दौड़ेगी बोट, बनेगा वॉच टावर जामुनिया आईलैंड को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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राजस्थान  जयपुर 

नाटक ‘बगिया बांछाराम की’ में दिखा प्रकृति प्रेम

नाटक ‘बगिया बांछाराम की’ में दिखा प्रकृति प्रेम राम सहाय पारीक निर्देशित नाटक एक गरीब वृद्ध किसान बांछाराम की धरती के प्रति प्रेम और संघर्ष की कहानी है। बांछाराम ने उम्र भर मेहनत करके अपनी बगिया को संजोए रखा है।
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ओपिनियन 

प्रकृति को संभालने की नीतियां बनाने की जरूरत

प्रकृति को संभालने की नीतियां बनाने की जरूरत पचास वर्ष पूर्व तक भारत और भारत जैसे देशों में वैज्ञानिक औद्योगिक उन्नति अच्छी धारणा थी। भारत जैसे देशों के विपरीत पश्चिम के विकसित देशों में तो उन्नति की अच्छाई सौ-डेढ़ सौ वर्ष पूर्व समाप्त हो गई थी।
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